लॉकडाउन के बाद सौतेली मां के साथ चुदाई- 2

(Step Mother Son Hindi Sex)

हिंदी सेक्स की इस गर्म कहानी में पढ़ें कि सौतेले माँ बेटे को कई महीनों के बाद चुदाई का अवसर मिला तो उन्होंने इसका फायदा उठाया. दोनों ने नंगे होकर फोरप्ले शुरू कर दिया.

दोस्तो, मैं हर्षद अपनी सौतेली मम्मी अदिति की चुदाई की कहानी आपको सुना रहा था.
हिंदी सेक्स कहानी के पहले भाग
सौतेली मां की अन्तर्वासना का ज्वार
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी माँ अदिति मुझसे मेरे दोस्त की बीवी सरिता की चुदाई की चर्चा कर रही थी. मुझे लग रहा था कि वो मेरी चुदाई की बात सुनकर मुझसे गुस्सा हो जाएगी. मगर वो मेरी बात सुनकर मेरे मुँह की तरफ देखने लगी.

अब आगे हिंदी सेक्स की गर्म कहानी:

अदिति मेरी बातें सुनकर बोली- ये तो अच्छी बात है. लेकिन हर्षद मुझे जरूर बता देना कि तुमने सरिता के साथ कब और कैसे संभोग किया. उसके अलावा और किसके साथ किया है, वो भी बता देना … भले अभी नहीं, कभी फुर्सत से बता देना.
मैंने अदिति से कहा- हां जरूर बताऊंगा अदिति.

ये मैं अपने हाथों से लंड मसलते हुए बोला.
अदिति मेरे लंड को ही देख रही थी जो मसलने से खड़ा होता जा रहा था.

कुछ देर में खाना बन चुका था.

अदिति की नजर मेरे लंड पर ही थी. उससे रहा नहीं गया तो उसने अपने एक हाथ से नाईटी के ऊपर से ही अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया.

मैं उसे देखकर भी अनजान बन गया था और अब दोनों हाथों से लंड मसलने लगा था.
उधर अदिति भी जोर से अपनी चूत रगड़ने लगी.
शायद उसकी चूत गीली हो गयी थी.

तभी अदिति बोली- उठो हर्षद, हाथ धोकर आओ … खाना बन गया है.
वो फ्रेश होने चली गयी और वापस आ गयी.
मैं भी हाथ धोकर आया.

तब तक अदिति ने मेज पर हम दोनों के लिए खाना परोस दिया.

हम दोनों साथ में खाना खाने लगे.
कभी मैं उसे एक ग्रास खिलाता, कभी वो मुझे खिलाने लगी.
ऐसे ही हम दोनों ने खाना खत्म किया.

घड़ी में नौ बज चुके थे. मैं टीवी देखने लगा और अदिति किचन में बर्तन मांजने लगी.
मै सोफे पर लेटकर टीवी देख रहा था. इतने में मेरे ध्यान में कुछ आया, तो मैं अपने रूम में गया और क्रीम लेकर आ गया.

तब तक अदिति अपना काम निपटाकर सोफे पर बैठ गयी थी.
मैं भी उससे सट कर बैठ गया.

अदिति ने पूछा- तुम्हारे हाथ में क्या है हर्षद?
मैंने कहा- क्रीम है.

उसने कहा- किसलिए लाए हो?
मैंने कहा- बताता हूँ अदिति. पहले खड़ी हो जाओ.

अदिति खड़ी हो गयी.

उसके खड़े होते ही मैंने अदिति की नाईटी के बटन खोलकर नाईटी निकाल दी.
अदिति झूठा विरोध करती हुई बोली- ये क्या कर रहे हो हर्षद!
मैंने उसकी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी.

अब अदिति मेरे सामने पूरी नंगी थी.
अदिति ने भी मेरी लुंगी खींचकर मुझे नंगा कर दिया.

मैंने अदिति को सोफे पर वापस बिठाया और उसकी दोनों चूचियों पर क्रीम लगायी.
मैं अपने दोनों हाथों से चूचियों पर क्रीम मलने लगा.

फिर थोड़ी सी क्रीम मैंने अपनी जीभ और होंठों पर भी लगा ली.
मैं अपनी जीभ अदिति के मुँह में डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा.
मेरे होंठ भी अदिति के होंठों को चूमने लगे.

इससे अदिति को बहुत मजा आने लगा. वो थरथराती हुई आवाज में बोली- हर्षद, ये क्रीम तो मस्त स्वाद भरी और मीठी भी है. मुझे बड़ी अच्छी लग रही है.

वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी और उसने पूरी क्रीम को चाटकर साफ कर दिया.

अदिति बोली- हर्षद, बहुत मजा आ रहा है.
मैं बोला- अदिति, अभी तुम्हें और मजा आएगा.

मैं अपनी जीभ की नोक से उसके कड़क चूचुकों को रगड़ने लगा.
वो सिहर उठी और ‘आह हम स् स्ह हा स् …’ करने लगी.

मेरी जीभ का स्पर्श होते ही उसकी चूचियां और कड़क हो गईं और चूचुक भी तन गए थे.
मैं बारी बारी से दोनों चूचियों पर अपनी जीभ गोलाकार घुमाकर क्रीम चाटने लगा.
अदिति कामुक सिसकारियां लेने लगी.

फिर मैं दोनों चूचियों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा और पूरी क्रीम को खा लिया.
मैंने उसकी चूचियां और चिकनी बना दीं.

अदिति अपने हाथ मेरे सर पर रखकर मुझे अपनी चूचियों पर दबाने लगी. अदिति कामुक हो गयी थी.

एक साल के इंतजार के बाद हमारे नंगे बदन एक दूसरे के साथ में थे.
हम दोनों ही ज्यादा उतावले हो गए थे. हम दोनों को रोकना बहुत मुश्किल था.

मैंने अदिति को सोफे पर लिटा दिया और उसकी चूत पर ढेर सारी क्रीम टपका दी.

अदिति बोली- आंह … ये क्या कर रहे हो हर्षद?
मैंने कहा- अदिति, अब तुम सिर्फ देखती जाओ और मजे लो.

मैंने अपने एक हाथ से उसकी गुलाबी चिकनी चूत पर क्रीम फैला दी और उंगलियों से उसकी चूत में भी लगा दी.

चूत में उंगलियां जाते ही अदिति सीत्कारने लगी- ओह हर्षद स् स् स्ह स्ह हं हम् आह … बहुत गुदगुदी हो रही है चूत में … आंह अब कुछ करो हर्षद.

मैंने अपने लंड पर भी क्रीम लगाकर लंड लबालब कर दिया और 69 पोजीशन लेकर अपनी जीभ अदिति की चूत में डाल दी.

मैं जीभ गोल गोल घुमाने लगा.
अदिति जोर जोर से सीत्कारने लगी- ओह हर्षद हम स् स् स्ह स्ह ऊं उफ्फ कितने दिनों बाद मेरी चूत को तुम्हारी जीभ का स्पर्श हुआ है हर्षद. मैं इस पल के लिए बहुत बेकरार थी.

मैं जोश में आकर कुत्ते की तरह उसकी क्रीम चाटकर खाने लगा.
अदिति अपनी जांघों से मेरा सर पकड़कर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबाए रखे थी.

उधर मेरा क्रीम से लबालब लंड उसके होंठों को छू रहा था.
अदिति अपनी जीभ की नोक मेरे लंड के सुपारे पर गोलाकार घुमाने लगी और क्रीम चाटने लगी.

इससे मेरे लंड में बहुत गुदगुदी होने लगी. मैंने अपना सुपारा उसके मुँह में डाल दिया.

अदिति मेरा लंड चूसती हुई क्रीम खाने लगी. मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए.

हम दोनों मदहोश होकर एक दूसरे के गुप्तांग चूस रहे थे. महीनों का इंतजार आज खत्म हो गया था.
मैंने अदिति की चूत चाट चाट कर सब क्रीम साफ कर दी.

फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड के नीचे डालकर उसकी गोरी, मांसल गाड को थमा और उसे मसलने लगा; साथ में अपनी उंगलियों से उसकी गांड के छेद को सहलाने लगा.

अदिति मचलने लगी और मदहोश होकर मेरा आधा लंड अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी.
मैं भी लंड अन्दर ठेलने लगा तो उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी.

मेरा बड़ा लंड उसके मुँह में एकदम कस गया था. उसने थोड़ा सा लंड बाहर निकालकर लम्बी सांस भरी और अगले ही पल फिर से लंड का सुपारा मुँह में लिया.
अब वो सिर्फ लंड का सुपारा ही चूस रही थी.

मैं फिर से जोश में आ गया, मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डालकर अन्दर बाहर करके चोदने लगा.

अदिति एकदम से गर्मा गई और उसने अपने हाथों से मेरा सर अपनी चूत पर दबा लिया.
वो जोर जोर से सिसकारियां लेती हुई झड़ गयी.

उसकी चूत से ढेर सारा चूतरस बहने लगा और मैं उसे पीने लगा.
अदिति का बहुत ही स्वाद भरा और मीठा चुतरस था.

उसने अपने दोनों हाथों में मेरा मूसल जैसा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी.

इधर मैंने पूरा योनिरस पीकर चूत साफ कर दी. साथ में गांड के छेद पर जीभ रगड़कर गांड को चाटा और फिर से चूत पर जीभ को गोल गोल घुमाने लगा.

अदिति सह ना सकी वो और मदहोश होकर मेरे मूसल जैसे लंड को अपने दोनों हाथों से रगड़ती हुई बोली- हर्षद … आंह अब बस करो … और नहीं सहा जाता मुझसे. अब तुम अपना ये मूसल जल्दी से मेरी चूत में डाल कर मुझे चोद दो.

मैं अदिति की बात सुनकर उसका ये तड़पना नहीं देख सका. मैं उठकर सीधा अदिति के ऊपर चढ़ गया और उसे चूमने लगा.

अदिति ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी चूचियां मेरे नंगे सीने पर रगड़ खाने लगी थीं. नीचे मेरा लंड उसकी दोनों जांघों के बीच जाकर चूत पर रगड़ खा रहा था.

अदिति ने जोर से मेरे लंड को अपनी मांसल जांघों में जकड़ लिया और अपनी गांड ऊपर नीचे करने लगी.
वह बहुत कामुक हो गयी थी.

वो मुझे चूमकर बोली- हर्षद, घड़ी देखो साढ़े दस बज चुके हैं. अब हम दोनों बेडरूम में चलकर बाकी का खेल खेलते हैं. अब मुझसे नहीं सहा जाता. कितने दिन बाद हम दोनों एक दूसरे के नंगे बदन का स्पर्श पा रहे हैं. अब हम एक दूसरे को और ज्यादा नहीं रोक सकते हर्षद.
मैंने कहा- हां अदिति, अब मुझसे भी ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा है. अब हमारा बेडरूम में जाना ही ठीक रहेगा.

ये कहते हुए मैं उसके ऊपर से उठ गया.
मैंने टीवी बंद कर दिया.

मैं अदिति के पास आ गया. मैंने नीचे झुककर अपना एक हाथ उसके सर के नीचे डाला और दूसरा हाथ उसके घुटने के नीचे डालकर अदिति को उठा लिया.

अदिति ने अपने दोनों हाथ मेरे में गले में डाल दिए और मुझे पकड़ लिया.

मैंने अदिति को चूमते हुए कहा- अदिति, क्या हम तुम्हारे बेडरूम में चलें?
अदिति बोली- हां चलो हर्षद.

मैंने अदिति की चूचियों पर चूम लिया और बेडरूम की ओर चलने लगा.

अदिति की गांड मेरे लंड पर झूल रही थी.
चलते समय मेरा तने हुए लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रगड़ खा रहा था.

अदिति को इससे मजा आ रहा था, मुझसे बोली- हर्षद, मुझे ऐसे लेकर हॉल में ही कुछ देर चलते रहो ना, मुझे बहुत मजा आ रहा है. चलते समय तुम्हारे लंड का चिकना सुपारा मेरी गांड के छेद पर और मेरी चूत पर रगड़ खा रहा है. मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है हर्षद. आज पहली बार इस नए अनुभव से मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए हैं.

मैं भी अदिति की बातें सुनकर उसे हॉल में ही इधर उधर घुमाने लगा.

अदिति ने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड के चिकने सुपारे को अपनी गांड के छेद और चूत पर मारने लगी.

वो आहें भरती हुई बोली- ओह हर्षद … तुम्हारे लंड ने तो आज कमाल ही कर दिया है. तुम्हारे इस मोटे लंड का चिकना सुपारा मेरी चूत और गांड के छेद पर रगड़ खा रहा है. मुझे बड़ा सुकून मिल रहा है.

मैं अदिति की बातें सुनकर जोश में आ गया और उसके होंठ चूसने लगा.
अदिति मदहोश होकर बोली- हर्षद अब चलो बेडरूम में. अब नहीं रहा जाता … मेरी चूत एकदम गीली होने लगी है.

मैं बेडरूम की तरफ बढ़ गया.
अदिति के बेडरूम में जाकर मैंने उसे बेड पर सीधा लिटा दिया, ट्यूबलाईट चालू कर दी.

अदिति बोली- ये लाईट क्यों जलायी … जीरो लाईट ही रहने दो ना हर्षद … मुझे शर्म आ रही है.
मैंने उसके सर के नीचे तकिया लगाकर कहा- आज हम दोनों अपनी लज्जा और शर्म छोड़कर एक दूसरे को इस उजाले में देखकर प्रणय क्रीड़ा करेंगे अदिति.

अदिति बोली- हर्षद तुम जैसा चाहे करो, मुझे तो तुम्हारी खुशी में ही खुशी मिलेगी.
उसने मुझे चूम लिया.

अब मैंने दूसरा तकिया लेकर उसकी गांड के नीचे रख दिया ताकि चूत और गांड ऊपर आ जाएं. चूत का मुँह भी खुल जाए. इसे चोदने में भी आसानी हो जाएगी और अदिति को भी लंड का पूरा नजारा देखने को मिलेगा.

मैं अदिति के ऊपर चढ़ गया और उसको चूमने लगा.

कुछ मिनट हम दोनों ने चूमाचाटी की. इसके बाद मैं उसकी चूचियां बारी बारी से चूसने लगा.
अदिति सिहर उठी.

नीचे मेरा लंड अदिति की गीली चूत पर रगड़ खा रहा था.
मैं नीचे सरककर अदिति के पेट और नाभि को हर जगह चूमने लगा; साथ में अपनी जीभ उसकी नाभि में डालकर गोलाकार घुमाने लगा.

अदिति कसमसाने लगी- ओह हर्षद स् स् स्ह स्ह ऊं ऊं आह.
वो मादक आवाजें निकलने लगी और अपनी गांड उठाकर अपनी गीली चूत मेरे लंड पर रगड़ने लगी.

मुझे और जोश आ गया; मैं और नीचे सरक गया और मैंने अपने होंठ उसकी गीली चूत पर रख दिए.
इससे अदिति सीत्कारने लगी.

मैंने अपने होंठों से उसकी चूत की फांकों को फैलाया और अपनी जीभ उसकी चूत में डालकर अन्दर बाहर करने लगा.

उसकी चूत गर्म हो गयी और रिसने लगी.
अदिति ये सह नहीं पा रही थी. उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थीं.

वो मेरे सर को अपने हाथों से चूत पर दबाने लगी और बोली- हर्षद, अब बस भी करो. अब जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो. मैं अब नहीं रुक सकती.

मैंने उसकी चिकनी, गुलाबी चूत को हल्के से अपने दांतों से काटकर चूम लिया और उठकर अदिति की दोनों जांघों के बीच अपने घुटनों के बल बैठ गया.

मैंने अपना तना हुआ लंड एक हाथ में पकड़ा और चिकने सुपारे पर क्रीम लगा ली. दूसरे हाथ से क्रीम मलकर पूरा लंड चिकना कर लिया. फिर थोड़ी सी क्रीम अदिति की चूत के मुँह पर भी लगा दी.

अदिति ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को फैलाकर रखा.
मैंने अपने एक हाथ में लंड पकड़कर सुपारा अदिति की चूत की दरार पर टिका दिया.
मैं लंड चूत में रगड़ने लगा तो अदिति सिहर उठी.

थोड़ी देर ऐसे करते हुए मैंने एक जोर जोर से धक्का दे मारा तो मेरा मूसल जैसा लंड अदिति की चूत को चीरता हुआ आधा अन्दर घुस गया.

अदिति जोर जोर से चिल्लाने लगी और रोने लगी- ऊंई मां मर गइ रे हर्षद … आह ऊंई हम स् स् … फिर से फाड़ दी तुमने मेरी चूत को … अंह!

उसका ये हाल देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और हाथ से उसके आंसू पौंछकर कहा- क्या करूं अदिति? रुक जाऊं … या बाहर निकाल लूं! सालों बाद तुम्हारी ये चिकनी और गुलाबी चूत का स्पर्श मेरे लंड को मिला तो ये बहुत फड़फड़ाने लगा. मैं खुद को नहीं रोक सका अदिति.
वो बस कराह रही थी.

“बस अब आहिस्ता आहिस्ता करूंगा.”
मेरी बात सुनकर वो मेरी पीठ को सहलाती हुई मुझे चूमने लगी और बोली- हां हर्षद, मुझे भी पता है कि हम दोनों इस पल के लिए कितने दिनों से बेकरार थे. आज एक साल बाद, तुमने फिर से मेरी चूत फाड़ दी हर्षद. मैं ये सोच भी नहीं सकती थी कि ऐसा कुछ होगा. मुझे अभी समझ आ गया है कि पहले से तुम्हारा लंड कुछ ज्यादा लंबा और मोटा हो गया है हर्षद.

ये सब कहते हुए अदिति अपनी गांड ऊपर नीचे हिलाने लगी.
वो बोली- देखो हर्षद तुम्हारा मूसल मेरी चूत में कितना फिट बैठा है … टस से मस नहीं हो रहा है.

मैं अदिति की चूचियां दोनों हाथों से मसलने लगा. साथ में लंड अन्दर बाहर करने लगा.

दोस्तो, आपको मेरी सौतेली मां अदिति के साथ मेरी चुदाई का मजा आ रहा होगा.
अपनी मां की चुदाई की हिंदी सेक्स कहानी को मैं अगले भाग में आगे लिखूँगा.
आप मुझे मेल करना न भूलें.
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हिंदी सेक्स की गर्म कहानी का अगला भाग:

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