बिहार की गर्म कुंवारी चूत-1

(Bihar Ki Garam Kunvari Chut Part-1)

रूद्र 2016-10-02 Comments

नमस्ते मेरा नाम मन्नी है, मैं 23 साल का हूँ.. पूरे 6 फीट का हूँ। मैं पंजाब का रहने वाला हूँ।

अभी मैं मेडिकल का स्टूडेंट हूँ और कसरत करने का दीवाना हूँ। किशोरावस्था से ही जिम में कसरत करने के कारण मेरा कद इतना बढ़ गया।

मेरा लंड 18 की उम्र से ताकत बढ़ाने वाली दवाएं लेने के कारण मेरा लंड औसत से काफी बड़ा हो गया था।

ये उस वक्त की बात है, मैं जब 19 साल का था।
हमारे खेतों में बिहार की एक लड़की काम कर थी और अब भी करती है। वो उस वक्त 23 साल की थी.. देखने में बहुत सुंदर है। उसका रंग गेहुआं है और नाम चांदनी है।

चांदनी 5.5 फीट की है। वो हमारे खेतों में ही अपने परिवार के साथ ही रहती है।

मेरे घर वाले ज्यादातर अमेरिका में रहते हैं, वो साल में एक बार ही आते हैं। इसलिए मेरे घर वालों ने चांदनी की माँ को मेरे कपड़े धोने और घर की साफ-सफाई के लिए रखा हुआ था और खाना मेरे दोस्त के घर से आता था।

चांदनी की 2 और बहनें हैं, वो अभी छोटी उम्र की हैं।

मेरे कसरती जिस्म के कारण गांव की हरेक लड़की मुझ पर मरती थी और चांदनी भी उनमें से एक थी।

अपनी बॉडी को अच्छा बनाए रखने के लिए मैं चुदाई वाली हरकतें.. जो जिस्म को कमजोर करने वाली होती है.. शादी तक कुछ नहीं करना चाहता था। बस कभी-कभी मुठ मार कर खुद को शांत कर लेता था क्योंकि मुझे मालूम था कि एक बार चूत का चस्का लग जाएगा.. तो चूत के बिना कुछ नहीं दिखाई देता।

हमारे खेत घर के सामने हैं।

जब चांदनी के माँ-बाप को एक शादी के लिए 20 दिन के लिए बिहार जाना था। वो चांदनी और उसकी बहनों को यहीं पर छोड़ कर जा रहे थे।
वो चांदनी को घर पर काम की देखरेख करने के लिए छोड़ गए।

मेरे मन में तब चांदनी के लिए कोई बुरी सोच नहीं थी। चांदनी के घर वालों को भी ये पता था कि मैं सीधा और अच्छा लड़का हूँ।
मैं उनकी लड़की के साथ कुछ नहीं करूँगा।
पर वो क्या यह बात जानते थे कि उनकी लड़की ही मेरा लंड लेना चाहती है।

मैं कभी-कभी पोर्न फिल्म भी देख लेता था।
मेडिकल का स्टूडेंट होने के कारण सब कुछ पता भी था।

एक शाम बहुत तेज तूफान आया.. जिसके कारण चांदनी के झोपड़े की छत उड़ गई। तब मैं अपने खेतों में एक चौबारे में कसरत में लगा हुआ था।
तभी चांदनी भागती हुई आई।

पहले तो वो मेरी बॉडी पर पसीना और बॉडी के कट्स देख कर चौंक गई, फिर सहमी हुई बोली- मन्नी मेरे झोपड़े की छत तूफान के कारण उड़ गई।
मैं- कोई बात नहीं.. तुम अपना सामान उठाकर मेरी कोठी में रख लो।
पंजाब में बड़े घर को कोठी कहते हैं।

मैंने उसे कोठी के बाहर वाले कमरे में सामान ले आने के लिए कहा और मैंने उसको अपनी बहनों के साथ वहीं सोने की अनुमति दे दी।
वो सब मान गई।

चांदनी- मन्नी.. मेरे घर का सामान भारी भी है.. मैं अकेले नहीं उठा सकती.. मेरी मदद कर दो।
मैंने कहा- चलो मैं मदद कर देता हूँ।

मैंने उसके झोपड़े की नई छत लगवाने का वादा भी किया।
उसने मुझे मुस्कुराते हुए मुझे ‘थैंक्यू’ कहा।

मैं उसकी मदद करने के लिए चला गया। वहाँ पहुँच कर मैं नीचे से भारी सामान उठाकर कोठी के बाहर वाले कमरे में ले गया। चांदनी भी हल्का सामान लेकर आ गई.. उसकी बहनें भी मदद कर रही थीं। जब मैं सामान छोड़ कर पीछे हटा.. तो चांदनी के साथ टकरा गया और चांदनी सहम कर हट गई।

मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं.. बस जरा ऐसे ही झटका सा आ गया था।

मैं पहली बार उसके साथ टच हुआ था शायद इसलिए वो सहम गई थी।
मेरे मन में उसके बारे में अब तक कोई गलत विचार नहीं था।

फिर मैं उससे ठंडा पानी मेरे बाथरूम में भर कर रखने के लिए कह कर फिर से कसरत करने चला गया।
मैं बाद में आकर नहाया और खाना आदि खाकर अपने कुत्तों को रोटी खिलाकर बाहर घुमाने ले गया।

जब मैं रात को 9 बजे वापिस आया तो चांदनी के कमरे में से अजीब सी आवाज आ रही थी। जब मैंने खिड़की में से देखा तो हैरान रह गया।
चांदनी बिस्तर पर नंगी पड़ी थी और अपनी चूत को उंगली से संतुष्ट कर रही थी।
उसकी बहनें गर्मी के कारण बाहर कमरे के बाहर तख्त पर सो रही थीं।

मैंने पहली बार किसी लड़की को असली में नंगी देखा था और चांदनी मेरा नाम लेकर उंगली को चूत में अन्दर-बाहर कर रही थी।
मैं अपने आप पर कंट्रोल रखने के लिए वहाँ से जाने लगा तो मेरा पैर अंधेरे में अपने एक कुत्ते से टकराया।

मेरा कुत्ता जोर से रोने लग गया और चांदनी की बहनें उठ गईं.. चांदनी भी जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आ गई और बात को संभालते हुए मैं वहाँ से चला गया।

उस रात को मैं बड़ी मुश्किल से सो पाया। मैं मुठ भी नहीं मार सका क्योंकि दवा लेने के कारण माल जल्दी बाहर नहीं आ रहा था।
फिर मैं किसी तरह सो गया।

दो-तीन दिन मैं रात को उसे देखता रहा पर एक रात मैं पकड़ा गया।
उस रात चांदनी जिस कमरे में रह रही थी उस छोटी लाइट बन्द थी।

मैं अंधेरा देख कर वापस आने लगा और जाते समय मैं बड़बड़ा रहा था- साला आज चांदनी की चूत नहीं दिखाई दी।

उस रात चांदनी बाहर सो रही थी और उसने यह सुन लिया, वो उठकर बोली- तुमको शर्म नहीं आती?
उसे तो मौका मिल गया.. मैं घबरा गया।

वो मुझे धमकी देने लगी- मैं अपने माँ और बाबा को बताएगी।

मैं वहाँ से भाग कर कमरे की ओर चल दिया.. पर वो मेरे पीछे आ गई।
मैं डरा हुआ था।

वो अन्दर आकर बोली- मुझे पता है कि तुम क्या कर रहे थे.. मैं अपने माता-पिता को सब कुछ बता दूँगी।

मैंने कहा- इस तरह की कोई बात नहीं है।
पर वो मानने को तैयार नहीं थी।

मैंने उससे कहा- तुम कुछ मत कहना.. मैं सब कुछ करूँगा जो तुम कहोगी।
वो अन्दर ही अन्दर खुश हो रही थी कि मैं आज उसके जाल में फंस गया।

चाँदनी बोली- मैं अपने माता-पिता को नहीं बताऊँगी.. अगर तुम सब कुछ करने के लिए तैयार हो।
‘ठीक है।’
बोली- मैं 5 मिनट में आती हूँ।

वो अपनी बहनों के पास गई और बहाना बनाकर आई- मन्नी आज बीमार है.. उसको रात को किसी चीज की जरूरत हो सकती है.. तो मैं उसकी मदद के लिए कोठी में ही सो जाऊँगी।

सब कुछ ठीक करके वो कोठी में अन्दर आई और दरवाजे को अन्दर से बन्द कर दिया।

वो रसोई घर से दूध का गिलास लेकर आई थी और उसके पास एक पुड़िया थी। जिसमें कुछ पाउडर था। उसने पाउडर को दूध में मिलाकर पीने को कहा।

मैंने मना किया तो बोली- मैं अपने माता-पिता को सब कुछ बता दूँगी।

मैं डर कर पी गया।

चाँदनी- आज तुम नहीं बचोगे।
मैं बोला- यह दूध में क्या था?
चांदनी हँसते हुए बोली- अभी पता चल जाएगा।
मैंने गुस्से से पूछा- बता मुझे.. ये क्या था?

चांदनी- मेरे राजा डर मत.. यह तेरी आग को जगाएगा और तेरे लंड को ताकत देगा।
मैं- यह तुमने क्या किया..
यह कह कर मैं मदहोश हो कर बिस्तर पर गिर गया।

चांदनी- मेरे राजा लगता है.. देसी दवाई का असर चालू हो गया।

मेरे शरीर में हलचल नहीं हो रही थी.. क्योंकि मैंने कभी यह दवाई नहीं ली थी।

फिर चांदनी ने मेरा लोवर उतार दिया। वो मेरे लंड को सहलाने लगी, पर अभी लंड अपनी जवानी पर नहीं था, अभी दवाई काम कर रही थी।

फिर उसने अपनी साड़ी उतार दी और अपनी पैन्टी उतार कर अपनी चुदासी चूत मेरे मुँह के पास ले आई और बोली- मैं इसे डेढ़ साल से तुम्हारे लिए तैयार कर रही थी.. आज मौका मिला है।

मैं गुमसुम सा उसे देख रहा था।
चांदनी की चूत पर एक भी बाल नहीं था।

फिर वो बोली- इस चूत के लिए सारे गाँव के लड़के मर रहे हैं.. पर ये मैंने तेरे लिए सील बन्द करके रखी है। मेरी एक सहेली कहती है कि मेरे मालिक मेरी हर रोज लेते हैं और मजा भी देते हैं और मुझे कह रही थी कि तेरा मालिक तो अभी इतना जवान है.. क्या वो तुमको चोदता नहीं है। आज के बाद मैं उस साली का मुँह बन्द कर दूँगी।

वो अपनी चूत को मेरे होंठों पर रगड़ने लगी।
मैंने अपना मुँह नहीं खोला तो वो फिर से मुझे धमका कर चूत को जीभ से चाटने को कहा।
मुझे मजबूर होकर उसकी चिकनी चूत को चाटना पड़ा।

कुछ मिनट बाद वो झड़ गई और उसने अपना सारा रस मेरे मुँह पर झाड़ दिया।

अब तक मेरे लंड में भी हलचल चालू हो गई थी, शायद दवा का असर शुरू हो गया था, मेरा लौड़ा अपने भीमकाय आकार में आ रहा था।

चांदनी- अहह.. मेरा छोटा राजा जाग गया।
फिर वो लौड़े को हाथ में लेकर मुठ मारने लगी।

दो मिनट बाद ही वो मेरे कड़क लौड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.. पर अभी मैं मदहोश सा ही पड़ा था।

फिर वो मेरे ऊपर आई.. अपनी चूत को लंड के टोपे सी घिसने लगी, फिर सिसकी लेने लगी ‘आहहह..’

मुझे अब कुछ अलग सा लग रहा था मानो मैं स्वर्ग में हूँ।
कुछ ही पलों बाद बहुत अच्छा लगने लगा था।

वो लंड को चूत के अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी.. पर सील बन्द चूत के कारण वो नाकाम रही।

अब तक मैं होश में आ गया था.. मैं भी वासना का भूखा था।
जब वो फिर से कोशिश करने लगी.. तो मैंने उसे नीचे धकेल दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया।

वो खुश हो कर बोली- आह्ह.. राजा बजा दे मेरी चूत का बाजा।
मैंने कहा- मैं अब तुमको बताता हूँ.. तुमने सोए हुए शेर को जगा दिया है.. अब तू और तेरी चूत किसी भी तरह नहीं बचेगी।
चांदनी- मन्नी राजा.. मैं भी यही चाहती हूँ। अब लगता है कि दवाई पूरे असर में है।

मैंने उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश की.. पर वो बार-बार दर्द के कारण लंड का टोपा बाहर निकालने को कहती।

मैं- अब क्या हुआ.. पहले तो ‘लंड.. लंड..’ कर रही थी।

बातों-बातों में मैंने पूरा लंड उसकी चूत में जोर लगाकर डाल दिया।

वो दर्द से चीखने लगी।
मेरा कमरा कोठी के पीछे के हिस्से में था और कोठी खेतों में होने के कारण किसी को कुछ नहीं पता चल सकता था।
मैंने अपना लंड कुछ देर अन्दर रखने का फैसला किया।

चांदनी ने दर्द से तड़फते हुए कहा- मुझे माफ कर दो.. गलती हो गई।
मैं- अब कुछ नहीं हो सकता.. जानवर उठ गया है.. और इसे सुलाएगी भी तू ही।

उसका दर्द का मारे बुरा हाल था।

मेरा कद और वजन अधिक होने के कारण वो हिल भी नहीं पा रही थी। मैं उसकी बुर में मोटा लंड डाल कर उसके ऊपर लेटा था।

वो ‘माफ कर दो..’ कह रही थी।

मैं कुछ मिनट बिल्कुल भी नहीं हिला, उसे शांत करने लगा।

वो अधमरी सी हो गई थी, मैंने 5 मिनट बाद लंड को धीरे से बाहर को निकाला।
जब मैंने लंड निकाला उसकी चूत से खून बाहर आ रहा था। अब उसे अच्छा लगा रहा था। जब उसने खून देखा तो डर गई और बकने लगी।

चांदनी- साले चूतिए.. गान्डू.. ये क्या किया तूने.. खून निकाल दिया।
मैं- जानेमन चूत चुदाने से पहले अपनी सहेली से पता तो कर लेती कि पहली बार खून आता ही है.. मैं मेडिकल का स्टूडेंट हूँ.. मुझे पता है। बड़ी आई चुदवाने वाली.. साली मेरी।

चांदनी ने भी अब हँसते हुए कहा- तुम भी ना छुपे रुस्तम निकले।
मैं- ये तो कुछ भी नहीं, मैंने तो कामसूत्र वाली किताब पढ़ी हुई है। तू देखती चल अब कैसे तेरी चुदाई करूँगा।
चांदनी ने फिर हँसते हुए कहा- चल-चल पहले अब कुछ कर तो..

मैं फिर से उसकी चूत में जोर-जोर से धक्के लगाने में लग गया, चांदनी ‘आहह..ह ईई..ई..’ की आवाज निकल रही थी।
सारे कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी।

देर तक चूत की कुटाई हुई, फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए, मैंने सारा गरम रस उसकी चूत में ही निकाल दिया।

माल निकलने के बाद मैं निढाल हो कर उसके ऊपर ही ढेर हो गया। वो मेरे शरीर के मुकाबले एक खिलौने वाली गुड़िया जैसी मेरी नीचे दबी हुई थी।
वो भले मुझसे उम्र में 4 साल बड़ी थी।

मैं थोड़ी देर बाद उसके नीचे उतर गया।

चांदनी भी हरकत में आकर अपना चेहरा दूसरी तरफ करके सो गई।

मेरी नजर उसकी गांड पर गई। मेरा मन कर रहा था कि उसकी गांड भी फाड़ डालूँ.. चूत का नजारा और ही होता है।

मैंने लंड खड़ा करके चांदनी को मुँह और छाती के बल लिटा कर उसके ऊपर आ गया। वो कुछ भी प्रतिवाद नहीं कर रही थी।
मैंने चांदनी की दोनों बाजू से पकड़ कर उसकी लातें थोड़ी फैला दीं और उसे पीछे को खींच लिया। अब मैंने लंड का निशाना साध कर चूत में डाल कर उसे घोड़ी सा बना लिया.. पूरा लवड़ा अन्दर पेल दिया और मेरे चौके-छक्के लगने लगे।

वो नींद से उठ गई थी और मुझे गाली दे रही थी ‘हरामी अब तो तू पक्का चोदू हो गया.. आआहह..ह ईई..’
उसकी मादक आवाजें निकल रही थीं।

मैं- अब तो तुमने चूत का चस्का डाल दिया.. अब तू हर वक्त और रोज चुदेगी।
चांदनी- बस कर.. हब्सी जानवर.. पता है मुझे.. साले अभी तो सोने दे।

मैं उसे अनसुना करके छक्के लगाता रहा। कुछ ही देर में उसको भी मजा आने लगा था और वो भी पूरा साथ दे रही थी।
उसकी मादक ध्वनियाँ ‘आआहह.. ईईई..’ मुझे बहुत मधुर लग रही थीं।

इस बार मैं कुछ देर तक उसकी चूत चोदता रहा, फिर मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
मैंने उसको सुबह 4:30 तक पेला, फिर मैं थक कर सो गया।

दूसरे दिन मैं सुबह 10 बजे उठा तो देखा कि चांदनी नहीं थी। मैंने सोचा कि वो घर का काम कर रही होगी। पर जब मैंने चादर की ओर देखा और चांदनी को जोर से आवाज लगाई।

जब वो आ रही थी तो मैंने देखा कि उसे चलने में तकलीफ हो रही थी।
वो आई और मुस्कुरा कर बोली- बोलो मेरे राजा क्या हुआ?

मैंने हँसते हुए कहा- जानू.. तेरी हालत देखकर तुझे कुछ कहने का मन नहीं कर रहा। तूने चूत मरवा तो ली.. सील भी खुलवा ली.. अब यह खून वाली चादर और मेरा लंड तो धो दो।
चांदनी हँसती हुई बोली- तो खुद से धो लो.. किसने मना किया है।
‘मैं अभी बताता हूँ तुझे साली..’

मैं चांदनी के पीछे कोठी में पीछे भागने लगा। फिर उसे पकड़ कर दीवार से लगा कर लंबा चुम्मा किया और उसे चादर धोने के लिए कहा।

इसके बाद मैं नित्य क्रिया से फारिग होकर कसरत करने चला गया।

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा कि मैंने कैसे चांदनी के साथ खेत में रात गुजारी और उसे उसकी शादी के पहले तक कैसे चोदा।

कैसे वो अपने ससुराल जाने से पहले बिहार की चूत को.. बिहार की चूतों में बदल गई।

लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दिया जा रहा है.

कहानी का अगला भाग: बिहार की गर्म कुंवारी चूत-2

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