देवरानी-जेठानी को चोदा-1

हमारे पड़ोस वाले घर में कमलनाथ नाम का जो आदमी रहता था उसकी दो बहुएँ थी। घर में सास थी नहीं, केवल दो लड़के थे गाँव के रहने वाले, दोनों सीधे सादे थे और दोनों बहुएँ भी अभी कम-उम्र थी। बड़ी बहू 20-21 की और छोटी वाली तो 18 की ही लगती थी। दोनों साड़ी पहनती थी और घूंघट भी करती थी पर जब दोनों लड़के काम पर चले जाते तो दोनों सलवार-कमीज़ पहन लेती थी। उनकी इस हरकत से मुझे एक शक सा हुआ।

मैं ताक-झाँक करने लगा। एक महीना इसी तरह बीत गया। एक दिन करीब 11 बजे मैंने कमलनाथ को अपनी बड़ी बहू को आवाज़ देते सुना तो जल्दी से मैं दीवार से उचक कर देखने लगा।

वह एक कुर्सी पर बैठा था, बड़ी बहू आई तू वह उसकी चूचियों को देखता बोला- आओ मेरी जान !

यह देख कर मैं समझ गया कि मेरा शक सही था।

वह पास आई तो उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर कमलनाथ बोला- छोटी वाली कहाँ है?

“वह कपड़े बदल रही है बाबूजी !”

उस बुड्ढे को जवान बहू की चूचियाँ पकड़ते देख मैं तड़प गया, मेरा लंड तड़पने लगा। मैं इसी दिन के इंतज़ार में था। चूची पकड़ने के साथ बड़ी बहू ने अपनी कमीज़ के बटन खोल दोनों को नंगा किया तो वह मजे से दोनों को मसलने लगा। मुझे सब साफ दिख रहा था। तभी वह बोली- कल की तरह पियो ना बाबूजी !

और चूची की घुंडी को ससुर के होंठों से लगा कर ज़रा सा झुकी।

तब वह बूढ़ा ससुर अपनी जवान बहू की एक चूची को मुंह से दबा दबा चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा। बड़ी बहू प्यार से ससुर के गले में हाथ डाल कर बोली- बाबूजी आप घुंडी चूसते है तो मुझे खूब मज़ा आता है।

इस पर वह और जोर से घुन्डियों को चूसने लगा। कसी कसी जवान चूचियों का मज़ा बुड्ढे को लेते देख मैं तड़प गया, मैं समझ गया कि दोनों बहुएँ जवानी से भरी हैं और चोदने पर पूरा मज़ा देंगी। आज मैं मौका जाने नहीं देना चाहता था पर रुका रहा कि थोड़ा और मस्त हो जाएँ दोनों !

वह बार बार ‘चूसिए बाबूजी’ कह रही थी। बुड्ढा ससुर जवान बहू के निप्पल चूस रहा था। अभी छोटी वाली नहीं आई थी।

दोनों को ससुर से मज़ा लेते देख मैं समझ गया कि दोनों प्यासी हैं और अपने पति से उनकी प्यास नहीं बुझती।

फ़िर जब सहा नहीं गया तो अपना डिजिटल कैमरा लेकर उनकी तरफ़ कूद गया। धप्प की आवाज़ से दोनों ने चौंक कर देखा। मुझे देख दोनों घबरा गए और बड़ी बहू अपनी चूचियों को अन्दर करने लगी और बुड्ढा मेरे हाथ में कैमरा देख कर काँपने लगा।

मैंमे तेज़ आवाज़ में कहा- तुम दोनों की हरकतें मेरे कैमरे में आ गई हैं, पिलाओ अपनी जवान चूचियाँ इस मरियल बुड्ढे को !

बहू तो थर थर काँप रही थी, उसने चूचियों को अन्दर कर लिया था पर घबराहट में बटन नहीं बंद किए थे। दोनों मस्त चूचियों को पास से देख मेरा लंड झटके लेने लगा।मैं मौके का फायदा उठाने के लिए बुड्ढे से बोला- कमीने, बहुओं को चोदता है? सबको बता दूंगा !

वह गिड़गिड़ाने लगा- नहीं भगवान के लिए ऐसा नहीं करना, अब कभी नहीं करूँगा !

ससुर को गिड़गिड़ाते देख बड़ी बहू भी घबरा गई। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

“कमीने, मैं सब देख रहा था ! बुढ़ापे में बहुओं के साथ मज़ा ले रहे थे तो जवानी मैं अपनी बेटी को भी छोड़ा होगा ! सच बताओ कितनी बार चोदा है?”

“एक बार भी नहीं बेटे, अब नहीं करूँगा !”

“जब चूची पीते हो तो दोनों को चोदते भी होंगे, तुम बताओ, चुदवाती हो?”

बड़ी वाली से पूछा तो वह मेरी ओर देखती चुप रही। बुड्ढा बोला- भगवान कसम बेटा, केवल दिल बहलाता हूँ !

“छोटी वाली कहाँ है?”

“अन्दर है अभी !”

“जाओ उसे यहाँ लेकर आओ !”

मेरी बात सुन वह अन्दर गया तो मैंने बड़ी वाली को अपने पास बुलाया, वह पास आई तो उसके चूतड़ों पर हाथ लगा कर बोला- तुम दोनों तो अभी जवान हो, तुम लोगों का मज़ा लेना तो समझ में आता है पर यह साला बुड्ढा केवल चूचियों को चूसता है?

“जी !”

“चूत भी चाटता है?”

“जी हाँ !”

“मुझे तुम दोनों की जवानी पर तरस आ रहा है, तुम दोनों की उम्र है मज़ा लेने की ! पर यह तो तुमको गर्म करके तड़पाता होगा। सच बताओ, चोदता है?”

मेरी बात सुन वह कुछ सहमी तो उसकी चूचियों को पकड़ हल्का सा दबा कर बोला- मुझे लगता है कि यह तुम दोनों को चोदता भी है !

“नन्न नहीं !” वह सहमकर बोली।

तभी वह घबराया सा अपनी छोटी बहू के साथ वापस आया। तंग शलवार कमीज़ में छोटी बहू की छोटी छोटी चूचियों को देख लंड ने तेज़ झटका लिया। बड़ी वाली के साथ मुझे देख वह घबराई। छोटी को देख मैं बेचैन हो गया, बहुत कसा माल था !

वह भी डरी हुई थी।

फ़िर बुड्ढा पास आकर मेरे सामने हाथ जोड़ बोला- बेटा मेरी इज्ज़त तुम्हारे हाथ में है..

मैं दोनों कुंवारी लड़कियों सी बहुओं को देखते बोला- चूचियों को पीते हुए फ़ोटो आया है !

“भगवान के लिए बेटा !” वह गिड़गिड़ाया।

अब वह मेरे बस में था।

मैं लंड को दोनों के सामने पैंट के ऊपर से मसलता बोला- जब लोग जानेंगे कि तुम अपनी बहुओं को चोदते हो तो क्या होगा?

“नहीं नहीं बेटा !”

“तुम्हारे लड़के नामर्द लगते हैं जो इन बेचारियों को चोदकर ठंडा नहीं कर पाते ! ज़रा इधर आओ।”

फ़िर उसे एक तरफ़ ले जाकर मैं बोला- खूब मज़ा लेते हो अकेले अकेले ! चोदते भी हो दोनों को?

“नहीं बेटा, अब ताकत नहीं रही !”

“अपने लड़कों के जाने पर अपनी बहुओं से मज़ा लेते हो, मैं एक शर्त पर अपनी जुबां बंद रख सकता हूँ।”

“बेटा मुझे मंज़ूर है।

“तुम्हारी बहुएँ प्यासी हैं, इस उमर मैं उन्हें पूरी खुराक चाहिए, लड़के तो तुम्हारे बेकार लगते हैं, इस उमर मैं तो दो-चार से चुदने पर ही मज़ा आता है। उंगली से चोदते हो?”

“कभी-कभी !”

“देखो मेरी बात मानो, तुम जो करते हो करते रहना, किसी को पता नहीं चलेगा। अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो ये दोनों अपनी प्यास बुझाने के लिये बाहर के चक्कर में पड़ जाएँगी।”

“बेटा यही सोचकर तू दोनों को चूम चाटकर उंगली से चोदता हूँ।”

“तुम दोनों को चूस चाटकर गर्म करो और मैं दोनों को चोद कर ठंडा कर दिया करूँगा। उंगली से तू बुढ़ियों को चोदा जाता है। जवान तो लंड खाती हैं, दोनों जवान हैं, जब तक लंड डालकर न चोदा जाए उनको मज़ा नहीं आयेगा। बोलो तैयार हो?”

“हाँ बेटा आओ !”

“जाओ पूछकर आओ, मेरी ड्यूटी रात की है, दिनभर हम दोनों एक एक को मज़ा दिया करेंगे। जाओ !”

“दोनों मेरी हर बात मानती हैं, आओ बेटा अभी से काम शुरू कर दो !”

“चलो, मुझसे चुदकर तुम्हारी बहुएँ खुश हो जाएँगी, तुमको भी खूब मज़ा देंगी क्योंकि तुम उनके लिए लंड का इन्तजाम कर रहे हो ना !”

“हाँ बेटा, दोनों मेरे साथ ही रहती हैं।”

“मैं भी अकेला हूँ, दिन भर मज़ा लिया करेंगे ! छोटी वाली तो कुंवारी लगती है?”

“हाँ बेटा अभी ठीक से चुदी नहीं है, मुझसे शर्माती है।”

“जब मेरा जवान लंड खायेगी तू शर्माना छोड़ देगी !”

और पैंट खोल लंड बाहर निकाला मैंने तो वह मेरा लंड देख बोला- अरे बेटा, तुम्हारा तो बहुत लंबा मोटा है, ऐसा तो घोड़े का होता है।

“इसे अपनी दोनों बहुओं को खिला दोगे तो तुमसे खुश हो जाएँगी, सोचेंगी कि बाबूजी की वजह से ऐसा लंड मिला है। जाकर दोनों को समझा दो !”

वह चला गया। मैं खुश था कि एक साथ दो गदरयी जवान चूतें मिल रही हैं। जब बुड्ढे के साथ मज़ा लेती हैं तो मेरे साथ तो दोनों मस्त हो जाएँगी।

मैं जल्दी से अपने घर गया, पेशाब करके केवल लुंगी बाँध रहा था कि तभी बुड्ढे की आवाज़ आई- आ जाओ बेटा !

तो मैं फौरन दीवार फ़ांद कर उसकी तरफ़ गया।

दोनों उसके अगल बगल खड़ी थी और दोनों का चेहरा लाल था और डर नहीं रही थी।

मैं पास पहुँचा तो वह बोला- बेटा, किसी से कहना नहीं, जाओ दोनों को ले जाओ।”

मैं दोनों को देखते बोला- अभी आपने तो मज़ा लिया नहीं !”

“कोई बात नहीं बेटा, जाओ अन्दर कमरे में ले जाओ !”

“आप जैसे रोज़ मज़ा लेते थे, वैसे ही लीजिये, एक को मेरे साथ भेजिए और दूसरी को आप चूसिये चाटिये !” और लंड को लुंगी से बाहर कर दोनों को दिखाया तू दोनों मेरे पास आकर बोली- अब क्या हुआ बाबूजी?

मेरे लंड को देख दोनों मस्त हो गई, अब वे ख़ुद तैयार थी मेरे साथ चलने को !

मैंने कहा- ऐसा है, आज पहला दिन है इसलिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, आज एक एक को भेजिए, कल दोनों को साथ ही मज़ा दूंगा।

“ठीक है बेटा !”

“जाओ बाबूजी को खुश करो !”

और छोटी के कूल्हों पर हाथ से थप्पड़ लगाया तो वह चुपचाप मेरी ओर देखने लगी।

मैं छोटी वाली का हाथ पकड़ अपनी ओर खींच कर बोला- बड़ी को अपने पास रखिये, इसको ले जाता हूँ, इसके साथ ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इसको चोदकर बाहर भेजूँ, तब बड़ी को अन्दर भेजियेगा।

मैं छोटी बहू के चूतड़ों की दरार में उंगली करते बोला- आज तुम दोनों को मज़ा आएगा। चल अब यहाँ सामने बैठ कर मूत ले ! एक बार एक लड़की को चोदने लगा तो कहने लगी कि पेशाब आ रहा है।

“ऐसा हो जाता है बेटा !”

मेरी चुदाई की रसीली बातें सुन दोनों लाल हो गईं, पेशाब की बात से दोनों शरमाई।

फ़िर छोटी को अपने बदन से लगा उसकी गदरारे चूतड़ों को दबाया तो लगा कि मैं जन्नत में हूँ। उसकी चूचियों को पकड़ा तो वह मुझे इशारे से बोली- अन्दर चलो !

शायद उसे शर्म आ रही थी।

उसके इशारे से मैं खुश हो गया, जान गया कि वो पूरी तरह से चुदासी है। पर पहले छोटी को ले जाने की बात से बड़ी वाली का चेहरा उतर गया, वो उदास हो गई। इससे उसकी बेकरारी भी पता चली। उनका ससुर तो कुछ कहने की हालत में नहीं था।

मैं वहीं छोटी की चूचियों को दबाने लगा, लंड में करंट दौड़ रहा था, अनार सी कड़ी कड़ी थी उसकी चूचियाँ, एकदम कुंवारी लड़की की ही सी ! पति और ससुर से मज़ा लेने के बाद भी कलि से फूल नहीं बनी थी वो !

मैं कामयाबी की शुरुआत छोटी बहू के साथ करने जा रहा था। लम्बे अरसे तक दोनों को चोद सकता था, खूब मज़ा देने वाली थी दोनों ! दोनों फंसी थी और खूब जवान थी।

मैं छोटी वाली से बोला- चल अब मूत कर ले !

वो अन्दर जाने लगी तो मैंने उसे रोका, कहा- यहीं सबके सामने बैठ कर !

वो मना करने लगी तो मैंने उसका कमीज ऊपर करके उसकी पजामी का नाड़ा खींच दिया, बोला- चल अब यहाँ सामने सबके बीच में आकर पजामी नीचे करके पेशाब कर !

वो कभी अपनी जिठानी की ओर तो कभी अपने ससुर की ओर देखने लगी।

कहानी जारी रहेगी।
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