सुनीता की चाहत-1

दोस्तो, ‘साजन का अधूरा प्यार’ लिखने के बाद मुझे आपके बहुत से मेल आये और अभी तक भी आ रहे हैं, आप सभी ने अपनी अपनी राय भी दी, मैं आप सभी का बहुत बहुत आभारी हूँ कि आप सभी लोगों ने मेरी बात का समर्थन किया है। मेरे पास ऐसे बहुत से मेल आये जिसमे में लिखा था, मेरी कहानी भी आप जैसी है, मुझे ये मेल पढ़कर मुझे कोई हैरानी नहीं हुई, न जाने ये कहानी मेरे जैसे कितने ही नौजवानों की है। आपने ‘साजन का अधूरा प्यार’ में सुनीता के बारे में पढ़ा, और मुझसे आप लोगों ने पूछा कि उसके बाद सुनीता का क्या हुआ। इस कहानी में आप सभी को आपके पूछे हुए सवालों के जवाब मिल जायेंगे, जिन्होंने मेरी कहानी ‘साजन का अधूरा प्यार’ नहीं पढ़ी तो जरूर पढ़ें, तभी आपको मेरी यह कहानी समझ में आएगी।

सुधा कुछ दिनों के लिए अपने मम्मी पापा के यहाँ चली गई और मैं यहाँ पर उसके इंतजार में दिन गिनने लगा। अभी सुधा को गए दो दिन ही हुए थे, सुनीता ने मुझे बुलाया और बोली- कल मेरा जन्मदिन है और मैं चाहती हूँ, अपना यह जन्मदिन मैं तेरे साथ ही मनाऊँ। तुम और मैं बस और कोई न हो, बस मेरी यही चाहत है, इसको तुम पूरी करोगे न?

मैंने कहा- ठीक है, जैसा तुम चाहती हो, वैसा सा ही हो जायेगा।

मेरी बात सुनकर सुनीता बहुत खुश हो गई।

सुनीता ने तो मुझे बोल दिया वो अपना जन्मदिन मेरे साथ मनायेगी, पर कहाँ और कैसे, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मन तो मेरा भी कर रहा था कि मैं भी उसके साथ कुछ वक्त अकेले में बिताऊँ, पूरी रात यही सोचता रहा पर कुछ समझ नहीं आया।

अगले दिन मैं सुबह देर से उठा और जब टाइम देखा तो 9 बज रहे थे। जैसे ही मैं उठा तो देखा मम्मी और पापा और भाई भी तैयार हो रहे थे। मैंने मम्मी से पूछा- कहीं जा रहे हो क्या?

मम्मी बोली- तेरी दादी की तबियत खराब है, हम तेरी दादी को देखने जा रहे हैं।

तो मैंने कहा- मैं भी चलता हूँ !

मम्मी ने कहा- नहीं, तुम यहीं पर रहो, आज शायद गैस वाला सिलेंडर लेकर आएगा, तो घर पर कोई तो होना चाहिए।

मैंने मम्मी से पूछा- भाई भी जा रहा है क्या?

मम्मी ने कहा- हाँ, वो भी जा रहा है, वहाँ से कुछ दुरी पर इसके दोस्त की बहन की शादी है, हम कल शाम तक हम आ जायेगे मम्मी ने तैयार होते हुए कहा।

मैंने मम्मी से कहा- क्या मैं घर पर अकेला रहूँगा?

तो मम्मी बोली- नहीं, मैंने सुनीता के घर पर उसकी मम्मी को बोल दिया है, रात को वो यहीं पर ही सो जाएगी और खाना भी वही पका देगी !

मुझे समझाते हुए मम्मी बोली- सुनीता दीदी को जरा भी परेशान मत करना !

मैंने हाँ में अपना सर हिला दिया।

कुछ देर बाद मम्मी पापा और भाई गाँव के लिए निकल गए अब रह गया मैं अकेला ! मैं सोचकर बहुत खुश था कि चलो अब सुनीता के जन्मदिन की टेंशन ख़त्म हो गई और रात भर वो मेरे साथ होगी। यही सोच सोच कर मैं रोमांचित हो रहा था।

मैं जल्दी से नहा धोकर तैयार हो गया क्योंकि आज सुनीता का जन्मदिन भी तो था। फिर मैंने नाश्ता किया और फिर घर को सही साफ़ कर दिया। मुझे ये सब करते हुए सुबह के 11 बज चुके थे, सभी लोग सुबह जल्दी चले गए थे, तो मम्मी ने दोपहर का खाना तो बनाया ही नहीं था इसका मतलब सुनीता भी अब आने वाली थी मेरे लिए खाना बनाने के लिए।

कुछ ही देर बाद सुनीता घर आई, क्या मस्त लग रही थी। गोल चेहरा, 5 फुट 2 इंच का कद, भरा हुआ बदन, मम्मे का साइज 32, चूतड़ थोड़े से उभरे हुए, और आज उसने सफ़ेद सूट और सफ़ेद सलवार पहनी थी, वो भी बिल्कुल नए कपड़े पहने थी, इन कपड़ो में वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी, उसका यह रूप देखकर उसकी सुन्दरता में खो गया था।

उसने अन्दर आकर उसने मुझे जोर से च्यूँटी काटी तो मैं होश में आया तो सुनीता मुझसे बोली- पहले कभी मुझे देखा नहीं, जो इस तरह से मुझे देखे जा रहा है?

मैंने सुनीता को अपनी बाँहों में लेते हुए कहा- जान, आज तो कयामत लग रही हो !

और मैं ‘हैप्पी बर्थ डे टू यू जान !’ इतना कह कर अपने होंठ उसके होंठ पर रख कर किस करने लगा, सुनीता ने मुझे धक्का देते हुए अपने आपको मुझसे अलग करते हुए कहा- क्या कर रहे हो? पागल हो गये हो, कम से कम यह तो देख लो कि बाहर का दरवाजा खुला हुआ है। कोई देख लेता तो?

मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ मैंने सुनीता को बोला- सॉरी जान, आज तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो कि कंट्रोल ही नहीं हुआ।

सुनीता ने हँसते हुए कहा– बस आज रात तक अपने आपको कंट्रोल कर लो, फिर पूरी रात तो हमारी है न ! आज रात को जो मन में आये वो कर लेना !

इतना कहते हुए वो रसोई में घुस गई और फिर वो खाना बनाने में लगी। मैंने घर का दरवाजा थोड़ा बन्द कर दिया, पूरा बन्द इसलिए नहीं किया कि किसी को शक न हो जाये, फिर मैं भी रसोई में घुस गया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

सुनीता रसोई में खड़ी होकर रोटी बनाने के लिए आटा गूँथ रही थी, मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा। मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे, किस करते हुए उनको दबा भी रहा था।

सुनीता ने मुझे देखते हुए कहा- साजन, अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं खाना नहीं बना पाऊँगी और देखो मेरे सूट की क्या हालत कर दी ! ऐसे में अगर में बाहर गई तो सबको पता चल जायेगा कि तुम मेरे चूचे दबा रहे थे, क्या तुम यह चाहते हो कि मैं रात को न आऊँ? मैंने कहा- नहीं यार, मैं क्यों ऐसा चाहूँगा, पर यार मुझसे कंट्रोल ही नहीं हो रहा, तुम बस एक किस दे दो तो में आराम से बैठ जाऊँगा।

सुनीता बोली- ठीक है !

उसने अपना चेहरा मेरे सामने कर दिया और अपनी आँखें बंद कर ली। उसने कहा- करो जल्दी से अब।

उसके रस भरे होंठ मुझे दावत दे रहे थे, आओ और पी लो सारा रस इन होंठों का !

पर मैंने कहा- नहीं जान, ऊपर की किस नहीं चाहिए।

सुनीता ने अपनी आँखें खोली और मुझे देखती हुई बोली- तो जनाब को कहा की चाहिए?

“तुम्हारी चूत की !” मैंने चूत की तरफ उंगली करते हुए कहा।

सुनीता लगभग चीख ही पड़ी- पागल हो गए हो? अब दिन में? जो करना है रात को करना, अभी दिन में सही नहीं है।

मैंने सुनीता से कहा- बस एक ही तो किस मांग रहा हूँ, नहीं देनी तो मना कर दो, मैं तुमको दुबारा नहीं बोलूँगा !

और इतना कह कर मैं रसोई से बाहर आने लगा तो सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- जान नाराज हो गए ! अच्छा चलो, बाहर का दरवाजा बंद करके आओ, आज के दिन मैं तुम को नाराज नहीं करना चाहती, पर ज्यादा समय मत लगाना।

सुनीता की बात सुन कर मैं खुश हो गया और फिर बाहर का दरवाजा सही से बंद करके रसोई के अन्दर आ गया।

सुनीता बोली- जो करना है जल्दी कर लो !

मैंने कहा- ठीक है, तुम अपना काम करती रहो और मैं अपना काम करता हूँ।

वो फिर से आटा गूंथने में लग गई, मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला तो उसकी सलवार नीचे गिर पड़ी, उसकी टाँगें बेहद चिकनी और मुलायम थी, मैंने उसकी टांगों पर हाथ फिराते हुए उसकी पेंटी नीचे सरका दी।

क्या मस्त चूतड़ थे उसके ! अब वो नीचे से बिल्कुल नंगी हो चुकी थी।

मैंने सुनीता की सलवार और पेंटी दोनों निकल कर सही जगह पर रख दी ताकि वो गन्दी न हो जायें, फिर मैं सुनीता के पैरों के बीच मैं बैठ गया और उसकी चूत को ध्यान से देखने लगा, सुनीता की चूत पर एक भी बाल नहीं था, शायद उसने आज ही अपने बाल साफ़ किये थे।

मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत पर फेरा तो तो उसकी चूत मुझे बहुत गर्म लगी, फिर मैंने उसकी चूत पर एक चुम्बन अंकित कर दिया। जैसे ही मेरे होंठों ने उसकी चूत को छुआ तो वो सिहर उठी, मैंने सुनीता की तरफ देखा तो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, मेरी नजर उसकी नजर से मिली तो उसने शरमा कर अपनी आँखें बंद कर ली।

फिर मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह लगाया और उसको चूसने लगा।

“म्म्म म्म्म्मा आ आआआ आअह्ह !’ अब उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी, सुनीता ने इस वक़्त काम करना बंद कर दिया था, वो मस्त होकर अपनी चूत चुसवा रही थी, फिर मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ डाल दी और उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा, उसकी चूत मेरे थूक से और भी ज्यादा गीली हो चुकी थी और उसकी चूत भी पानी छोड़ रही थी।

सुनीता के हाथ आटे में सने हुए थे, इसलिये उसने मुझे हाथ नहीं लगाया बस उसने अपने पैरों को और थोड़ा सा खोल दिया था, अब उससे खड़े होने में दिक्कत हो रही थी तो वो दीवार से टेक लगाकर खड़ी हो गई और अपनी चूत को मेरे मुँह पर जोर जोर से रगड़ने लगी। मैं अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर रख कर उसकी चूत को चूसे जा रहा था, तभी वो अकड़ने लगी, मैं समझ गया कि अब सुनीता झड़ने वाली है, तो उसकी चूत में अपनी जीभ डाल कर मुख चोदने करने लगा।

“ऊऊ ऊऊउह आह्ह्ह्ह !” और कुछ देर बाद ‘उईई ईई माँआआअ आहह्ह्ह’ करते हुए मेरे मुँह में अपना सारा रस छोड़ दिया। सुनीता मेरे मुंह पर ही झड़ गई, मैंने चाट चाट कर उसकी चूत साफ़ कर दी, उसकी चूत चूसते हुए लंड तो मेरा भी खड़ा हो गया था पर उस वक़्त चुदाई नहीं हो सकती थी।

उसके बाद मैं खड़ा हुआ और सुनीता के लबों को चूम लिया, फिर मैंने अपने हाथों से उसको पेंटी और सलवार पहना कर उसका नाड़ा बांधा, और बोला- जान, अब तुम खाना बना लो, मैं अब तुमको परेशान नहीं करूँगा।

कहानी जारी रहेगी।

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