चंड़ीगढ़ में मेल एस्कॉर्ट का जॉब

(Chandigarh Me Male Escort Job)

राजदीपक 2018-11-07 Comments

कौन कहता है कि इंसान का नेचर और सिग्नेचर नहीं बदलता, मैं कहता हूँ कि सिर्फ़ एक चोट की ज़रूरत है. हाथ पे लगे तो सिग्नेचर… और दिल पे लगे तो नेचर तो, क्या इंसान भी बदल जाता है.

नमस्कार पाठको, मैं राजदीपक आप के साथ अपनी फर्स्ट सेक्स स्टोरी शेयर कर रहा हूँ.

मैं 27 साल का युवक हूँ. पिछले साल मेरी जीएफ से मेरा ब्रेकअप हुआ, मैं उससे बहुत प्यार करता था और शादी करना चाहता था, लेकिन कुछ संयोग ऐसे हुए कि वो मुझे छोड़ कर चली गई और मैं गम के अंधेरे में डूबता चला गया. मैं इतना परेशान हो गया कि त्यागपत्र दे दिया जो कि मेरी परेशान हो चुकी जिन्दगी का सबसे बड़ा उदाहरण हुआ. इसके बाद 4 महीने दारू पी पी कर अपने आपको कोसता रहा.

फिर एक दिन एक न्यूज़ पेपर में मैंने एक जॉब देखी. ये जॉब थी मेल एस्कॉर्ट की.

क्योंकि मैंने अपनी पढ़ाई टूरिज्म से की थी और मैं 3 बड़ी कंपनीज़ के लिए एस्कॉर्टिंग का काम भी कर चुका था, तो मैंने सोचा क्यों ना अपने इस गुण को परखा जाए.

मैंने कॉल की, तो सामने से किसी जेंट्स की आवाज़ थी. मैंने बात की तो उसने मेरी पूरी डिटेल ली और कहा कि कल शाम एक नंबर और एड्रेस मोबाइल पे आएगा, उसी हिसाब से बात कर लेना.

अगली शाम 5 बजे मैसेज आया, एक एड्रेस था, चंडीगढ़ का ही पता था. मैंने उस नम्बर पर कॉल करके बात की. जिनसे बात हुई उसका नाम था मृदुला. मुझे लगा कि आज तो फंस गया, इस बूढ़ी औरत के साथ मारा जाएगा बेटा.

मैंने एड्रेस नोट किया और ओला लेकर पहुँच गया. उस पते पर पहुंच कर डोर बेल बजाई तो अन्दर से एक नौकरानी सी दिखने वाली औरत आई. उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और अन्दर चली गई.
दो मिनट बाद आई और मुझे अन्दर ले कर गई. मैं ड्रॉइंग रूम में बैठा वेट कर रहा था.

तभी एक आवाज़ आई- हे राज..
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक 30-32 साल की लेडी थी. मैं देखता ही रह गया. सच में स्वप्न सुन्दरी सी थी लाल रंग का स्लीब लैस सूट और हाई हील्स पहने एक जबरदस्त माल मेरे सामने खड़ा था. सौभाग्य से मैं भी फॉर्मल ड्रेस पहन कर गया था.

मृदुला ने मुझसे कहा- राज, यू लुक्स सो हैंडसम!
मैंने कहा थैंक्यू मेम.. आंड यू ऑल्सो लुक्स गॉर्जियस.

उसके साथ बातचीत हुई, उसने मुझे रोजाना के आधार पर ब्वॉयफ्रेंड हायर किया था, उसका हज़्बेंड बिज़्नेस के लिए ऑस्ट्रेलिया में रहता था. जिस वजह से उसको समय बिताने के लिए एक मेल की जरूरत थी.
आज उसका आउटिंग का प्लान था, तो उसने ड्राइवर को बुलाने के लिए कहा, जिस पर मैंने मना कर दिया- ड्राईवर को रहने दीजिये, मैं ड्राइव कर लूँगा.
उसने पूछा- क्या तुम चंडीगढ़ में ड्राइव कर सकते हो?
मैंने कहा- हां, मैं कर सकता हूँ.

इसके बाद उसकी हाइ एंड वेर्ना गाड़ी लेकर हम दोनों घूमने चले गए. पब्लिक पार्क, एक गार्डन और एक क्लब भी गए, काफी देर तक हम दोनों ने समय व्यतीत किया.

जब वापिस 11 बजे घर की तरफ़ जाने लगे, तो उसने मेरे कंधे पे अपना सर रखा. उस वक्त मुझे मेरी जीएफ नीरू की याद आ गई और मैं रोने लगा.
उसने मुझसे पूछा- क्या हुआ?
तो मैंने अपने रिलेशन के बारे में उसे बता दिया. उसने कहा कोई बात नहीं परेशान मत हो.. तुम्हें जीवन में बहुत अच्छा गिफ्ट मिलेगा.

खैर हम दोनों उसके घर पहुँचे. मैंने कार पार्क की और मैं मोबाइल पर ओला बुलाने के लिए ऑर्डर करने लगा.
तो वो बोली- आज यहीं रुक जाओ.
मैंने मना किया, लेकिन वो नहीं मानी और मुझे उसकी बात माननी पड़ी.

उसने अपनी नौकरानी को बोल कर खाना बनवाया. कुछ देर बाद हम दोनों ने खाना खाया.
रात गहराने लगी तो मैंने पूछा- मेरा रूम मुझे बता दो.
उसने ओके कहा और वो मुझे अपने रूम में ले गई. वहाँ मैंने देखा कि ड्रिंक्स का एक अच्छा ख़ासा कलेक्शन था.

उसने मुझे ऑफर किया लेकिन मैंने मना कर दिया. उसने पूछा कि पीते तो हो न?

मैंने कुछ नहीं कहा लेकिन मेरी आँखों में मनाही के भाव नहीं थे, जिसे महसूस करते हुए उसने दो पैग बनाए और एक गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया. उसके 2-3 बार कहने के बाद मैंने गिलास ले लिया और चीयर्स बोल कर एक पैग खींच लिया.
कुछ देर बाद वो जब चेंज करके गाउन में आई तो माँ कसम मन कर रहा था कि साली को यहीं पटक कर अभी का भी चोद डालूँ.

सुरा का असर होने लगा था, तो मैं अपने रूम में जाने की ज़िद करने लगा. मेरी बात पर उसने मुझे अपनी ओर खींचा, मेरे होंठों पे किस करने लगी और पागलों के तरह काटने लगी.

मुझे लगा जैसे कि मैं नीरू के साथ हूँ. बस मैं शुरू हो गया. उसके गाउन में हाथ डाल कर उसके बूब्स दबाने लगा. उसके चूतड़ों को सहलाने लगा और धीरे धीरे हम बिल्कुल नंगे हो गए.

मेरा लंड एक सौ दस डिग्री पर खड़ा था. मृदुला अपने घुटनों पर बैठ गई और अपने मुँह में मेरा लंड भर के चूसने लगी.. और काटने लगी. मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था.

मैं थोड़ा सा होश में आया और मैंने उसे रोकने के कोशिश की, तो वो अब कहां मानने वाली थी. उसने दरवाजा बंद किया और अपने बाल बांधे और ड्रॉवर से ड्यूरेक्स का कंडोम निकाला और बोली- लगा लो.

मैंने फिर मना किया तो बोली- मैं तुमसे जिस लाइफ के गिफ्ट की बात कर रही थी, वो ये ही है.
मैं मस्त हो गया और थोड़ा उत्तेजित होते हुए कंडोम पहनकर उसके ऊपर चढ़ गया.

मैं पहले उसकी चूत को चाटा.. क्योंकि उसकी चूत सफाचट थी और मुझे उसकी चूत से बड़ी मस्त महक आ रही थी. मैंने आज तक अपनी जीएफ की चूत तो कभी देखी ही नहीं थी, उसे तो बस ऊपर से ही छुआ था. तो आज इसी चूत पर सारे एक्सपेरीमेंट करने का मन हो चला था.
करीब 5 मिनट चूत चाटने के बाद मैंने उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारने शुरू किए और चूत चूसना जारी रखा.

अब मेरा लंड बिल्कुल चुदाई के मूड में आ चुका था और मैं अपना लंड उसकी चूत में डालना चाहता था. जैसे ही लंड डालने लगा तो पता नहीं क्या हुआ मैं ठीक से अन्दर नहीं डाल पा रहा था.
तो उसने मुझसे कहा- मैं हेल्प करती हूँ.. लगता है ये तुम्हारा फर्स्ट टाइम है शायद.. और मैंने तुमसे बड़ा चूतिया आज तक नहीं देखा जो 5 साल के रिलेशन मैं एक भी बार अपनी जीएफ को नहीं चोद सका.

मैंने कहा- मैं उसे दिल से प्यार करता था और शादी के बाद सब करने के सोचा था.
इस पर उसने मुझे टोन्ट मारते हुए कहा- सच्चा प्यार घुस गया ना तुम्हारे पिछवाड़े में? आजकल कोई भोसड़ी का सच्चा प्यार नहीं करता.
मुझे उसकी बात का बुरा लगा और मैं साइड में बैठ गया.

मृदुला मेरे पास आई और बोली- बुरा लग गया?
मैंने कहा- हाँ मुझे बहुत बुरा लगा.
तो उसने मुझे एक किस किया और बोली- सॉरी.. आ जाओ, हम कंटिन्यू करते हैं.

हम दोनों ने फिर से एक ही पैग से मजा लेना शुरू किया. इस बार उसने मेरी गोद में बैठ कर मुझे अपने मम्मों पर नीट दारू डाल कर चटाई और उसी शराब को मेरे मुँह से चूस कर खुद पी. कुछ मेरे अन्दर गई और कुछ उसके.

इस क्रिया से हम दोनों फिर से गर्म हो गए. अब वो बेड पर चित लेट गई. मैं उसके ऊपर आ गया. मैंने उसके बड़े बड़े बूब्स चूसे और निप्पल काटे. इस बार उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिकाया और मैंने लंड अन्दर डाल दिया तो मुझे सच में ऐसा लगा कि जन्नत मिल गई हो.

मैं उसको जोश में चोदने लगा, लेकिन जल्दी ही झड़ गया. मुझे बुरा लगा और उसे भी. वो बोली- एक काम करो, किचन में जाओ.. दूध रखा है, वो पी लो. फिर मैं तुम्हें एक मेडिसिन देती हूँ, तुम वो खा लेना.
मैं समझ गया कि ज़रूर वियाग्रा होगी.

उसने मेरी तरफ दवाई का पत्ता बढ़ा दिया तो मैंने दूध नहीं पिया लेकिन 1 की जगह 2 गोलियां खा लीं और 15 मिनट बाद फिर से चार्ज हो गया.

कुछ तो पहली बार चूत मिलने का नशा, कुछ दारू और ऊपर से वियाग्रा का असर.

मैं दूसरे दौर के लिए तैयार हुआ. इस बार मैं नीचे था, वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मेरे ऊपर चढ़ गई और हिलने लगी. उसने चुदाई चालू कर दी. बीच बीच मैं जब वो थक जाती, तो मैं उसके चूतड़ों को पकड़ कर अपनी कमर उठा उठा कर चोदने लगता.

ऐसे ही दस मिनट तक चुदाई का खेल चला. फिर पोज़िशन चेंज हो गई, अब मुझे उसके पीछे से लंड पेल कर चुदाई करना था. उसे इस तरह से चुदाई का बड़ा शौक था. मैंने भी अक्सर ब्लू फिल्म्स में देखा है.

मैं उसके पीछे आ गया और उसकी चूत मैंने लंड घुसा दिया. मैं ज़ोर ज़ोर से झटके मारता और वो मजे से ‘अहहहः उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाआह..’ जैसी आवाज कर रही थी.
कभी कभी तो मेरी स्पीड तेज़ हो जाती तो चिल्ला देती- हेईई मार दिया रे तूने कमीने आह.. छोड़ दे मुझे.

दस मिनट बाद वो झड़ गई.. लेकिन अबकी बार मुझे कुछ नहीं हुआ और मेरा लंड यूं ही तना खड़ा रहा.
वो बोली- निकाल ले..
मैंने मना किया तो बोली- कमीने, मेरी चूत आज ही नहीं फाड़नी है.. निकाल हरामी जल्दी से.
मैंने लंड निकाल लिया और बैठ गया. मैं अपने लंड को हिलाने लगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मेरा लंड शांत ही नहीं हो रहा था.

दस मिनट बाद मृदुला बोली कि तेरे लंड की आग को मैं ही शांत करूँगी.. आ जा मेरे पास.
इस बार वो बोली- तू इसे मेरी गांड में डाल दे.
यह सुन कर मुझे लगा कि जैसे मेरी लॉटरी खुल गई हो. मैं एकदम से तैयार हो गया और उससे बोला- चल तू कुतिया बन जा.
वो बोली- हरामी मैं कुतिया नहीं बनूँगी, चोदना है तो खड़े खड़े घोड़े की तरह चोद.
मैंने कहा- ठीक है.

वो बेड के साइड पर खड़ी हो कर गई झुक. मैंने दूसरा कंडोम लगाया और उसकी गांड में लंड घुसाने की तैयारी करने लगा. उसकी गांड के होल पर बहुत सारा चिकनाई लगा कर लंड घुसाने की कोशिश करने लगा. गांड मारना इतना ईज़ी तो नहीं था. लेकिन तब भी मैंने दम लगा कर पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
वो चीखें मारने लगी.. गालियां देनी लगी- हरामी कमीने भैनचोद.. रंडी समझा है क्या?

मैं गुस्से में आ गया और मैं भी पूरे जोश में लंड पेलने लगा. मैंने उसे 10-15 मिनट ऐसे ही चोदा, उसकी कमर दर्द करने लगी और मेरी टांगें जबाव देने लगीं.
मैंने कहा- बेड पे लेट जाते हैं.
वो बोली- तू चालू रख, मैं झड़ने वाली हूँ.

मैं गांड मारने में लगा रहा और 2 मिनट बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए.
फिर हम बेड पे आ गए.

थोड़ी देर बाद मैंने अपने लंड से कंडोम उतारा और उसे गले लगा कर थैंक्स कहा. मैं बोला कि मृदुला मैं तुमसे आज के पैसे चार्ज नहीं करूँगा. एक बात और.. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ रिलेशन कंटिन्यू रख सकता हूँ.

तो मृदुला बोली- रिलेशन ज़्यादा दिन स्टे नहीं कर सकता क्योंकि मेरे हज़्बेंड जैसे ही आएंगे मुझे ऑस्ट्रेलिया ले जाएंगे और मैं जितना तुम्हें समझी हूँ वो ये कि तुम मुझसे दिल लगा बैठोगे और फिर हर्ट हो जाओगे.. हाँ इतना ज़रूर वादा करती हूँ कि जितने दिन मैं यहाँ हूँ, तुम ही मेरे परमानेंट एस्कॉर्ट रहोगे.

फिर उसने एक लम्बा सा लिप किस किया हम दोनों यूँ ही नंगे लिपट कर सो गए.

अगली सुबह 10 बजे नौकरानी ने दरवाजा खटखटाया तो मेरी आंख खुली. मैंने मृदुला को जगाया. मैं खुद उठ कर बाथरूम में चला गया और उसने नौकरानी से चाय नाश्ता तैयार करवाया.

हम दोनों ने ब्रेकफास्ट किया. मैंने आज का प्लान पूछा तो उसने बताया- आज हम एक बजे के करीब मोहाली जाएंगे. वहाँ एक जमीन की पेमेंट करनी है और कुछ कागजी कार्यवाही है.. तो साथ चलना है.

मैंने भी ओके कह दिया और सोचने लगा कि देखो आगे क्या होता है.

मैं उसके साथ हुई इस घटना का जिक्र अपनी अगली सेक्स कहानी में आपको लिखूंगा.
फ्रेंड प्लीज़ आप अपने मेल जरूर लिखिएगा.
[email protected]

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