बहन का लौड़ा -25

(Bahan Ka Lauda-25)

पिंकी सेन 2015-06-13 Comments

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अब तक आपने पढ़ा..

रोमा- ओके बाबा, मैं कान पकड़ कर सॉरी कहती हूँ.. बस अब आप जो कहोगे.. मैं करूँगी और थैंक्स कि आज आपने मुझे इतना मज़ा दिया।

नीरज- ये हुई ना मोहब्बत वाली बात.. अब देखो मेरी जान.. मैंने तुम्हें इतना मज़ा दिया.. तुमने सारे कपड़े निकाल दिए। मगर ब्रा और पैन्टी नहीं निकाली.. बस एक बार तुम्हारे संगमरमरी जिस्म को बिना कपड़ों के भी दिखा दो न.. अपने संतरे जैसे कड़क मम्मों का रस पिला दो.. पैन्टी में छुपी अपनी मादक चूत के दीदार करा दो.. तब मैं समझूँगा कि तुम मुझसे सच्ची मोहब्बत करती हो.. बोलो दिखाओगी ना?

रोमा- छी: छी:.. आप कितने बेशर्म हो.. कैसी बातें करते हो.. मैं नहीं दिखाती.. मुझे शर्म आ रही है..
नीरज- अरे यार.. अब आधी नंगी मेरे सामने खड़ी हो.. पूरी होने में कैसी शर्म और मैं तो तुम्हारा होने वाला पति हूँ.. आज नहीं तो कल.. मेरे सामने नंगी होना ही है.. तो आज क्यों नहीं..
रोमा- ओके ओके.. चलो अपनी आँखें बन्द करो.. मुझे ऐसे शर्म आ रही है और मैं कहूँ.. तब आँखें खोलना।

अब आगे..

नीरज ने अपनी आँखें बन्द कर लीं.. तब रोमा ने अपनी ब्रा-पैन्टी भी निकाल दी।

दोस्तो, अभी तक मैंने आपको रोमा का फिगर नहीं बताया है.. अब ये पूरी नंगी हो गई है.. तो आप भी गौर से देख लो..

रोमा के मम्मे एकदम गोल सेब की तरह कड़क थे.. उनका साइज़ करीब 30″ का होगा और उसकी कमर एकदम पतली हिरनी की तरह थी.. गाण्ड भी ज़्यादा बड़ी नहीं थी.. मगर थी बड़ी मस्त.. एकदम मुलायम और लचीली.. करीब 32″ की रही होगी। उसकी फूली हुई गुलाबी चूत जिसके आस-पास हल्के रोंए से थे.. बहुत सेक्सी लग रही थी।

रोमा ने धीरे से कहा- लो अब देख लो..

नीरज ने जब आँखें खोलीं.. तो बस देखता ही रह गया.. उसका लौड़ा तो पहले से ही उफान पर था.. अब तो वो पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो गया था।

नीरज- वाउ कुदरत ने बड़ी फ़ुर्सत से तुम्हें बनाया है रोमा.. तुम किसी अप्सरा से काम नहीं दिख रही हो.. अरे अरे.. ऐसे हुस्न को छुपाओ मत.. प्लीज़ देखने दो मुझे.. जी भर कर देख लेने दो न.. प्लीज़ प्लीज़..
रोमा- बस बहुत देख लिया.. आज ही सब कुछ देख लोगे क्या.. अब मुझे देर हो रही है।
नीरज- अरे एक बार मुझे तुम्हारे मम्मों को छूने तो दो..
रोमा- प्लीज़ आज नहीं.. दोबारा आऊँगी.. तब जी भर कर छू लेना.. अभी मुझे जाना होगा।

नीरज- तुम तो बड़ी मतलबी निकलीं यार.. मैंने तुम्हें कितना मज़ा दिया.. तुम्हारी चूत को सुकून दिया और तुम मुझे ऐसे ही अधूरा छोड़ कर जा रही हो.. यह कहा का इंसाफ़ हुआ..?

रोमा- क्क्क..क्या मैं कुछ समझी नहीं.. आप अब मुझसे क्या चाहते हो.. मैंने सब कुछ तो दिखा दिया आपको..
नीरज- तुमने तो दिखा दिया.. मेरा कहाँ कुछ देखा है.. तुम्हारी चूत की आग तो मिट गई.. मेरे लौड़े का भी कुछ सोचो न..
रोमा- छी: छी: .. आप कितने गंदे हो.. कैसी बातें कर रहे हो.. मुझे नहीं देखना.. अब मैं जा रही हूँ और प्लीज़ अब कोई इमोशनल ड्रामा मत करना..

नीरज- हाँ हाँ जाओ.. तुम्हें तो मेरी मोहब्बत ड्रामा लगती है ना.. जाओ.. मगर जाने से पहले बस एक बार अपने मन से सोचो.. मैं तुम्हें सेक्स करने को नहीं बोल रहा.. बस अपना लौड़ा देखने को बोल रहा हूँ.. मैं जानता हूँ सेक्स करना ठीक नहीं होगा। यह प्यार का अपमान होगा.. मगर तुम मेरे ज़ज्बात को नहीं समझोगी.. जाओ तुम..

रोमा- ओके ओके.. बाबा.. अब नाराज़ मत हो.. दिखा दो.. मगर प्लीज़ सेक्स नहीं करना.. तुम्हें मेरी कसम है..
नीरज- ठीक है जान.. नहीं करूँगा.. बस आओ तुम खुद अपने हाथों से इसे आज़ाद करो।

रोमा डरते हुए नीरज के पास आई उसकी पैन्ट खोली.. अब चड्डी में से लौड़ा उसको दिखने लगा। उसने डरते हुए चड्डी नीचे की.. तो नीरज का 7″ का लौड़ा उसको सलामी देने लगा।

रोमा- ओह्ह.. माँ.. ये इतना बड़ा होता है.. मैंने तो कभी सोचा नहीं था..
नीरज- कैसी बात करती हो.. आज नेट के युग में.. तुमने कभी लौड़ा नहीं देखा.. इतनी सीधी भी मत बनो..
रोमा- आपकी कसम.. मैंने कभी नहीं देखा.. बस सुना था कि यह ऐसा होता है।

नीरज- इसका नाम लो जान.. लौड़ा कहो.. लंड कहो.. इसे छू कर देखो.. अच्छा लगेगा..
रोमा का मन भी उसे छूने को बेताब था.. बस नीरज के कहते ही वो लौड़े को सहलाने लगी।
नीरज- आह्ह.. ऐसे मुलायम हाथ.. आज पहली बार लौड़े को छुए हैं.. मज़ा आ गया.. आह्ह.. बस थोड़ी देर ऐसे ही सहलाओ जान.. मेरा पानी निकाल दो.. ताकि मैं भी ठंडा हो जाऊँ.. उसके बाद कोई ड्रामा नहीं.. सीधे घर जाएँगे..

रोमा कुछ नहीं बोली और लौड़े को बड़े प्यार से सहलाती रही।

नीरज उसको समझाता रहा.. ऐसे आगे-पीछे करो.. फिर उसको चूसने को कहा तो रोमा नहीं मानी। उसने साफ-साफ मना कर दिया। नीरज ने भी ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया.. वो जानता था.. कि आज नहीं तो कल.. इसको लौड़ा चुसवा ही देगा!

दस मिनट की कड़ी मेहनत के बाद नीरज के लौड़े ने वीर्य छोड़ दिया.. जो रोमा के हाथों पर जा लगा.. जिससे उसको बड़ी घिन आई। वो भाग कर बाथरूम में गई.. सब साफ किया।

रोमा- छी:छी: कितने गंदे हो आप.. मेरे हाथ पर ही पानी निकाल दिया।

नीरज- मेरी जान मैंने तो तुम्हारी चूत का पानी पिया है.. तुम हाथ की बात कर रही हो.. कुछ दिनों बाद देखना.. तुम खुद इसे चूस-चूस कर इसका पानी पिओगी।

रोमा- छी:छी:.. कभी नहीं.. मैं ऐसा कभी नहीं करूँगी.. अब प्लीज़ बातें बन्द करो.. चलो.. नहीं तो आज की ये मुलाकात आखिरी मुलाकात बन जाएगी। आप मेरी मॉम का गुस्सा नहीं जानते हो..

नीरज ने आगे कुछ नहीं कहा, दोनों ने कपड़े पहने और नीचे आ गए।

नीरज- रोमा बुरा मत मानना.. तुम बार-बार अपनी मॉम का जिक्र करती हो.. कभी पापा नहीं कहती.. ऐसा क्यों?

रोमा- जब मैं 8 साल की थी.. मेरे पापा एक एक्सीडेंट में चल बसे.. मॉम ने दूसरी शादी नहीं की.. पापा हमारे लिए इतना कर गए थे कि कोई कमी ना रहे.. उनके जाने के बाद मॉम चिड़चिड़ी हो गईं.. बस उनका गुस्सा दिन पर दिन बढ़ता गया.. अब तो मुझे उनसे डर लगने लगा है।
नीरज- ओह्ह.. आई एम सॉरी.. मुझे पता नहीं था..

दोनों बस यूं ही बातें करते रहे.. गाड़ी रोमा के घर से थोड़ी दूर रोक कर नीरज ने रोमा को हल्का सा किस किया और रोमा चली गई।

उधर राधे और मीरा मूवी देख कर एक रेस्तरां में गए.. वहाँ से खाना पार्सल करवा कर वापस घर आ गए।

मीरा ने बहुत कहा कि यहीं खाएँगे.. मगर राधे ने उससे कहा.. कुछ खास है घर जाकर बताऊँगा.. तुम खाना ले लो.. मैं अभी आता हूँ।
मीरा- जानू तुमने तो कहा था.. आज ड्रिंक करोगे.. मगर चुपचाप घर आ गए.. ड्रिंक तो की नहीं लगता है.. भूल गए तुम..
राधे- नहीं मेरी जान.. याद है.. खाना लेने के समय में दस मिनट के लिए तुमसे दूर हुआ था.. तब मैंने बियर की बोतल ले ली थीं।
मीरा- झूठ.. तुम्हारे हाथ में कुछ नहीं था.. कहाँ है बताओ?

राधे ने अपनी सलवार के अन्दर से दो बोतलें निकाल कर दिखाईं.. तो मीरा बस देखती रह गई..

मीरा- वाह.. क्या बात है.. मेरे आशिक.. तुम तो बहुत तेज़ निकले.. चलो चेंज कर लो.. पहले पेट भर कर खाना खाएँगे उसके बाद जाम कर पीयेंगे।
राधे- अरे नहीं पगली.. बियर खाने के बाद नहीं.. पहले पीते हैं.. उसके बाद खाना खाते हैं।
मीरा- ओह्ह.. ये बात है.. अच्छा मैं गिलास लेकर आती हूँ.. बाद में मज़े से पीयेंगे.. तुम जल्दी से लड़की से लड़का बन जाओ।

मीरा गिलास लेने गई.. तब तक राधे ने अंडरवियर के अलावा सब कुछ निकाल दिया और बिस्तर पर बैठ गया।

मीरा- ये लो जी.. आप तो बड़े बेशर्म हो.. चेंज करने को कहा था.. तुम तो नंगे ही हो गए।
राधे- मेरी जान पीने का मज़ा दुगुना करना है.. तो तुम भी कपड़े निकाल दो.. आज तुम्हें नये तरीके से पिलाऊँगा।
मीरा- अच्छा ये बात है.. तो लो अभी निकाल देती हूँ.. तुम भी ये अंडरवियर निकाल दो.. जब नंगा होना ही है.. तो पूरी तरह हो जाओ ना..

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा..
और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
[email protected]

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