मेरी चुदाई से खुश होकर पड़ोसन ने मुझे अपना बनाया

(Aunty Ki Chut: Meri Chudai Se Khush Hokar Padosan Ne Mujhe Apna Banaya)

मेरे पड़ोस में नीलम नाम की एक लड़की रहती थी. वह उम्र में मुझ से दो साल बड़ी थी. मैं मन ही मन उसे पसंद करने लगा था. शायद यह प्यार था जिसका मुझे उस वक्त कोई आभास नहीं था. उसके साथ बातचीत करते हुए मैं बेहद प्रसन्न होता था.

उसी दौरान नीलम के घर में निखिल नाम के युवक की आवन जावन शुरू हो गई थी. वह काफी हेन्डसम और स्मार्ट था. शायद इसी वजह से नीलम पहली नजर में ही निखिल की प्रेम दीवानी हो गई थी. देखते ही देखते दोनों मेरे ही सामने प्यार के मुसाफिर बन चुके थे.

नीलम ने मेरी ही मौजूदगी में निखिल को राखी बाँधी थी जिसने मुझे यह मानने के लिये प्रेरित किया था कि दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता था. नीलम की माँ ने भी अपनी बेटी के इस भाई बहन के रिश्ते का जोर शोर से एलान किया था. लेकिन बात कुछ ओर ही थी.

मेरी ही मौजूदगी में निखिल नीलम को अपने गले लगाता था, उसके गालों को चूमता था, उसको कपड़े पहनने भी मदद करता था. नीलम उसकी गोद में सिर रखकर सो जाती थी, भाई बहन का रिश्ता दो प्रेमी वाला रिश्ता बन चुका था. दोनों के बीच का हॉट रोमान्स मेरे दिमाग में कई सवाल पैदा करता था. मैंने कई बार खुले बाथरूम में नीलम को पेशाब करते समय निखिल को उसकी चूत को घूरते हुए देखा था.

ऐसे रोज रोज के नजारों ने मुझे रिश्तों की गलत परिभाषा सिखा दी थी. उनके विवादास्पद व्यवहार ने मुझे यह मानने को प्रेरित किया था कि भाई बहन के बीच भी यह सब हो सकता है.

बाद में मैंने बहुत कुछ देखा था.

निखिल नीलम के ब्लाउज में हाथ डालता था, उसके उरोज को उग्रता से दबाता था, उसको चुम्बन भी करता था. नीलम भी इस मामले में पीछे नहीं रहती थी, वह निखिल के पेन्ट की जिप खोलकर मुंह में उसका लोड़ा लेकर चूसती थी, अपनी छाती पर रगड़ती थी. नीलम घर मेरी उपस्थिति को नजर अंदाज करते हुए ये सब करती थी और मैं छिप के देखता था.

ब्लू फिल्म का जीवंत नजारा मुझे अकसर बेहद उकसाता रहता था. उनकी हरकतें देखकर मेरा लोड़ा खड़ा हो जाता था. नीलम को शायद इस बात का पता चल गया था कि मैं छिप कर उसकी हरकतें देखा रहा हूँ, वह मेरी हाजरी में ज्यादा आक्रमक हो जाती थी, अपनी हरकतों से मुझे उकसाने की कोशिश करती थी.

मैं भी वही सब कुछ नीलम से दोहराना चाहता था. लेकिन मैं थोड़ा शर्मीले स्वभाव का लड़का था, मुझमें ऐसा करने की कोई हिम्मत नहीं थी. लेकिन मैंने अश्लील साहित्य पढ़ा था, उसकी बदौलत मैं मानसिक तौर पर निखिल के साथ इस रेस में काफी आगे निकल गया था.

इम्तहान के दिनों में जल्दी उठने के लिये हम लोग दूसरे की मदद करते थे. मैं सुबह पाँच साढ़े पाँच बजे नीलम को उठाने के लिये उसके घर जाता था. उसके घर में उसकी मां थी. नीलम उन्हें जल्दी उठाने को कह सकती थी, फिर भी न जाने क्यों वह मुझे ही जगाने को कहती थी. इस बात की मुझे बेहद प्रसन्नता होती थी. इसी बहाने मुझे उसको छूने का मौका मिलता था. मैं उसकी छाती पर हाथ रख कर, उसको दबोच कर टटोल कर जगाता था.

वह भी जरूरत पड़ने पर मुझे जगाती थी, बहुधा मैं जाग ही जाता था, फिर भी नीलम का स्पर्श पाने के लिये सोने का नाटक करते हुए बिस्तर में पड़ा रहता था. जब तक वह मुझे छूकर, टटोल कर जगाती नहीं थी, मैं आँखें नहीं खोलता था.

बिल्डिंग में सभी लोग निखिल से नाराज थे, दोनों का प्रेम प्रकरण एक बड़ी चर्चा का विषय बन गया था. फिर भी उन्हें किसी बात की फिक्र या चिंता नहीं होती थी. निखिल खुद मेरे लिये एक सिर दर्द बन रहा था.

मैंने शारीरिक तौर पर भले नीलम के साथ कुछ नहीं किया था लेकिन मानसिक रूप से मैं हरदम उसकी चूत चुदाई करता रहता था. मैंने उस को लेकर न जाने कितनी कपोल कल्पित कहानियाँ अपने दिमाग में लिख डाली थी जो मुझे बेहद प्रसन्नता प्रदान करती थी.

मैं रोज रात को सोने से पहले निखिल की हरकतों को याद करके नीलम की चुदाई का प्रारंभ करता था. मैं उसको सबसे पहले अपनी बांहों में कैद करता था, उसके सारे बदन को चूमता था. उसके ब्लाउज के भीतर हाथ डालकर उसके बूब्स को दबाता था. मेरी इस हरकत पर वह नाराज हो जाती थी. पल भर उस को चोदने का उत्साह ठंडा पड़ जाता था. मुझे उस पर गुस्सा भी आता था. उस पर जोर आजमाइश करने का नशा भी चढ़ जाता था.

मेरी ऐसी हालत देखकर वह मन ही मन मुस्कराती थी, उसके चेहरे पर नई चमक उभर आती थी. उसकी बोडी लेंग्वेज देखकर मुझे ऐसा लगता था कि शायद वह मेरे साथ मजाक कर रही थी. मैं बुद्धू बनकर उसके उरोज को मसलने और उसका दूध पीने के लिये बेताब हो जाता था.

मेरी हालत देखकर वह मेरा हाथ पकड़ कर अपने ब्लाउज पर रखकर मुझे इशारा करती थी- पागल, तुझे मेरे बूब्स के दर्शन करने हैं ना? मेरा स्तनपान करना है ना? तो बेकार में ब्लाउज में हाथ डालकर समय क्यों नष्ट कर रहा है? फट से मेरा ब्लाउज उतार, मेरी ब्रा भी निकाल और शुरू हो जा! मैं कितने दिन से तुझे देखती आई हूँ, तू मेरी और निखिल की चुदाई का नजारा चुपके चुपके देखता है. चुदाई मेरी निखिल करता था लेकिन तेरा लोड़ा एक घोड़े के लोड़े जैसा बन जाता है, मैं तो उसी वक्त चाहती थी कि तू भी मेरी चुदाई करे लेकिन निखिल यह बात हरगिज बरदाश्त नहीं करेगा. यह सोचकर मैं खामोश रहती थी.

नीलम का इशारा मिलते ही मैंने अधीरता से उसका ब्लाउज उतार दिया, ब्रा को भी निकाल दिया और उसको बिस्तर पर पटक कर उसके होठों को चूमने लगा. मेरा एक हाथ उसकी चूचियों को मसल रहा था, दूसरा हाथ उसकी चड्डी में प्रवेश कर रहा था. मैं काफी उसकी चूत को सहलाता रहा था.

फिर मैंने उठ कर 69 की पोजीशन में आकर नीलम की चूत को चूसना शुरू किया, उसकी गांड में हाथ की उंगली डालकर उसकी गांड चुदाई करने लगा. उसी वक्त नीलम भी मेरा लोड़ा मुंह में लेकर मुझे चोदने लगी.
नीलम मुझे अपने हाथों से अपना दूध पिलाती थी, मेरा घी खाती थी, अपने हाथों से छाती पर भी मलती थी. उसकी ऐसी हरकतें मुझे और भी उकसाती थी. मैं भी अपने घी को उसके नंगे बदन पर स्प्रे करता था. मेरी यह हरकत नीलम को बेहद भाती थी.

आखिर नीलम ने निखिल से शादी कर ली और निखिल उनके घर में ही रहने लगा था.

निखिल भले नीलम को प्यार करता था, उसकी चुदाई भी करता था. लेकिन वह पाँच मिनट से ज्यादा नीलम की चुदाई कर नहीं पाता था. बहुत ही जल्द उसका लोड़ा ढीला पड़ जाता था. वह थक जाता था.

मेरी फेन्टेसी, मेरी कल्पना आखिर रंग लाई थी. मैं वास्तव में भी नीलम को चोदने का अधिकारी बन गया और मैंने नीलम पर मानो जादू ही कर दिया था. वह मुझसे बेहद प्रभावित हो चुकी थी. मैं निखिल से कई गुना बेहतर था. इस बात का नीलम को मानो प्रमाणपत्र मिल गया था.
एक दिन नीलम बहुत बेचैन थी क्योंकि उसकी चूत रात को प्यासी रहा जाती थी. मैं उसके घर गया तो उसने आँख की श्रम त्याग कर मुझे पकड़ लिया और उसकी चूत चुदाई का खुला न्यौता दे दिया.
मैंने उसे चोदा और मेरा लोड़ा तो एक घोड़े से भी बढ़ कर निकला जो कभी थका नहीं था. नीलम को पूरा आनंद मिला मेरे चोदने से.

शायद इसी वजह से मुझे उसकी चुदाई का ओपन जनरल लाईसेन्स मिल गया था. उसने भले निखिल से शादी की थी, लेकिन मैं उसका स्टेन्ड बाय बन गया था. निखिल उसका रात का साथी था जबकि मैं उसका दिन का पति.

नीलम दो अलग समय पर दो अलग शख्स की बेड पार्टनर बन कर दोनों को खुश रखती थी. उसने तीन बच्चों को जन्म दिया था लेकिन उनमें कौन सा मेरा, कौन सा निखिल का? इस बारे में कभी सोचा भी नहीं था.
निखिल भले उसका मुंह बोला पति था लेकिन उसका असली पति मैं ही था. वह मुझे निखिल से ज्यादा प्यार करती थी.

मेरी शादी हो जाने के बाद भी हम दोनों के बीच पति पत्नी का रिश्ता कायम था.
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