दर्जी के लौड़े पर हूर की चूत -1

(Darji Ke Laude Par Hoor Ki Chut-1)

This story is part of a series:

मेरा नाम किशोर वर्मा है। मेरी उम्र यही कोई 40-42 की है.. रंग साँवला.. इकहरा बदन.. कद लगभग साढ़े पाँच फुट और काम दर्जी का.. मैं लेडीज़ टेलर हूँ।
पिछले लगभग 20 सालों से लखनऊ के एक अच्छे मोहल्ले में अपनी दुकान चलाता हूँ। वैसे तो मैं सहारनपुर के एक गाँव का रहने वाला हूँ.. पर काम की खोज में यहाँ आ गया था, फिर यहीं बस कर रह गया।
मेरा परिवार अभी भी गाँव में ही रहता है।

एक बुधवार की सुबह मैं अपनी दुकान पर कुछ ग्राहकों के कपड़े ले-दे रहा था, तभी एक कम उम्र की एक नौजवान लड़की मेरी दुकान पर आई।
बला की ख़ूबसूरत.. एकदम खुला गोरा रंग.. सुर्ख गुलाबी होंठ.. बड़ी-बड़ी आँखें.. हवा में लहराते काले घुँघराले बाल.. लम्बा-छरहरा.. पर भरा-पूरा बदन।
उम्र यही कोई 18 साल और कद लगभग 5 फुट 4 इंच।
वो चिकन का सूट पहने.. एकदम अप्सरा लग रही थी। मैं तो और काम भूल उसे ही देखने लगा।

उसने बताया कि उसे अपने कॉलेज के किसी कार्यक्रम के लिए 3 कपड़े सिलवाने थे। एक ब्लाउज.. एक सूट और एक जींस पर पहनने के लिए कुर्ती।

उसने यह भी बताया कि उसे मेरी दुकान के बारे में उसकी एक सहेली.. निगार ने बताया था.. जो कि मेरी पुरानी ग्राहक है।
उसने अपना नाम शाजिया बताया था।

मेरा मन तो यही कर रहा था कि उस गुलाब के फूल को तुरंत ही सूंघ लिया जाए.. पर दुकानदारी के उसूल आड़े हाथ आ गए।
खैर.. मैंने उससे कहा- तुम्हें जैसे भी कपड़े चाहिए.. उसके लिए नाप का कपड़ा और सिलवाने वाला कपड़ा दे जाओ। मैं सोमवार तक सारे कपड़े सिल कर दे दूँगा।

वो बोली- अंकल.. मुझे एकदम फिटिंग के कपड़े चाहिए.. जैसे आप निगार के सिलते हैं। मैं सिलवाने वाले कपड़े तो लाई हूँ.. पर नाप का कपड़ा अभी नहीं है।
फिर वो मुझे कुछ डिज़ाईनर सूट.. कुर्ती आदि की फोटो दिखाने लगी.. जो वो साथ ही लाई थी और जैसे कि वो सिलवाना चाहती थी।

इतने में एक आंटी जो काफी देर से खड़े होकर हम लोगों की बात सुन रही थीं.. वो गुस्साते हुए बोलीं- किशोर.. मैं इतनी देर से खड़ी हूँ.. और तुम इस लड़की से ही बात करते जा रहे हो। मेरे कपड़े नहीं सिलने हैं क्या?

मैंने आंटी को शांत करते हुए उस लड़की से कहा- बेटा तुम दोपहर में आ जाओ। उस समय दुकान खाली रहती है। मैं ठीक से तुम्हारी बात समझ लूँगा और जैसे कपड़े तुमने सोचे होंगे.. वैसे ही सिल दूँगा।
उसे भी ठीक लगा और वो अपनी फोटो वगैरह समेट कर बाहर चली गई।

तभी मुझे याद आया कि उसे नाप के कपड़े लाने के लिए तो कहा ही नहीं और फिर उन आंटी के चक्कर में मैं उस परी को दिल खोल कर आँखों में भर भी नहीं पाया था।

सो मैं आंटी से ‘बस एक मिनट’ की मोहलत मांग कर बाहर उस लड़की की स्कूटी के पास पहुँच गया, वो बस जाने ही वाली थी।

मैंने उसे रोका और कहा- शाजिया.. दोपहर में आते वक़्त अपने नाप के कपड़े भी ले आना।

वो बोली- लेकिन अंकल मैं चाहती हूँ.. ये कपड़े आप एकदम सही फिटिंग के बनाएं। मेरे पुराने कपड़े जिस टेलर ने सिले हैं.. वो सब ढीले-ढाले टाइप के हैं। तभी तो निगार के कहने पर मैं इस बार टेलर बदल रही हूँ। वो आपकी काफी तारीफ़ करती है और वास्तव में उसके कपड़ों की फिटिंग से आपके हुनर का पता चलता है।

उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मानो मैं हवा में ही उड़ने लगा।

खैर.. अपने उत्साह को सम्हालते हुए मैंने बड़ी अनिच्छा वाले लहज़े में उससे कहा- तो फिर बेटा, मुझे तुम्हारे बदन से ही नाप लेनी पड़ेगी। वैसे तुम्हारा बदन बहुत खूबसूरत है और फिटिंग के कपड़े इसे और उभार देंगे..
वो थोड़ा हिचकी.. शरमाई और उसने बिना मुझसे आँख मिलाए स्कूटी स्टार्ट की और चली गई।

मुझे लगा कि कहीं उसे मेरी बात बुरी न लग गई हो।

मैं खुद को कोसते हुए अन्दर आ गया.. पर किसी काम में मन नहीं लग रहा था। आँखों के सामने बस उसी का कामुक बदन.. परी चेहरा और उसकी मुस्कान घूम रहे थे।

वैसे तो मैं रोज़ दोपहर में दुकान बंद करके खाने और सोने चला जाता हूँ.. पर उस दिन तन.. मन और आँखों की भूख ने पेट की भूख मार दी थी।
बस कुछ केले-वेले खा कर दुकान पर ही बैठा उसका इंतजार करता रहा कि न जाने कब वो आ जाए.. क्योंकि समय तो उससे कुछ तय नहीं हुआ था।

दोपहर दो बजे के करीब इंतज़ार ख़त्म हुआ और वो कमसिन हसीना दुकान पर आई। उसे देख दिल को तसल्ली हुई कि शायद सब ठीक था और यह भी लगा कि उसे मेरी वो बात भी बुरी नहीं लगी।

मैंने उससे बड़े अदब से कहा- अन्दर वाले कमरे में चलो.. मैं फीता और डायरी लेकर आता हूँ।
वो भी बिना झिझके.. अन्दर की ओर चल दी।
फिर क्या था मैंने फटाफट दुकान के पल्ले अन्दर से बंद किए और जरूरी सामान लेकर अन्दर पहुँच गया।

कमरे में थोड़ा अँधेरा था.. मैंने जल्दी लाइट जलाई ताकि उसके जिस्म को अपनी आँखों में भर सकूं.. क्योंकि इतना तो लग रहा था कि इससे आगे तो शायद वो मुझे बढ़ने भी न दे।

इसलिए आँखें ही सेंक ली जाएँ.. वही बहुत है और मौका लगा तो इस गुलाब को नाप लेते-लेते थोड़ा बहुत छू लूँगा। डर बस उसके काँटों का था.. पर चूंकि सुबह की बात वो पचा ले गई.. तो इतना तो सोच लिया था कि हिम्मत करके आगे बढूंगा जरूर..

मैंने उससे एक छोटे स्टूल पर खड़े होने को कहा.. ताकि मैं आसानी से नाप ले सकूं और कहा- अरे ये क्या..! तुमने इतना ढीला सूट पहन रखा है। तुम्हें मालूम था कि नाप देना है.. तो इस सूट पर से तो तुम्हारे उभार दिख ही नहीं रहे हैं.. मैं कैसे नाप लूँ..?
मैंने ये कहते हुए उसके सीने की ओर इशारा किया। वो भी अपने सीने की ओर देखने लगी.. जिनसे उसके स्तनों की शुरुआत और अंत का पता ही नहीं चल रहा था।

वो बोली- अंकल मेरे पास ऐसे ही सूट हैं। आपको तो अनुभव है.. आप ही कुछ करिए न..
कहते हुए वो स्टूल पर खड़ी हो गई।

मैंने उससे कहा- अपना ये दुपट्टा तो हटाओ..
वो बोली- ओ सॉरी अंकल..!
उसने तुरंत दुपट्टा उतार कर पास में पड़े तख्त पर उसे फेंक दिया।

उसने दोनों हाथ फैला लिए थे और छत की तरफ थोड़ा असहज भाव से देखने लगी.. जैसे कि उसने अपना पूरा बदन मेरे हवाले कर दिया हो.. कि जहाँ हाथ लगाना है लगा लो।
मैं भी अपने अन्दर उछल रहे तूफ़ान को छिपाते हुए फीता लिए उसके जिस्म के करीब पहुँच गया।

पहले उसका पेट नापा.. फिर कन्धा नापा.. इतने में ही उसकी साँसें हल्की सी तेज हुई और उसने आँखें बंद कर लीं।

मैं समझ गया कि तवा गरम हो रहा है। मैं हल्का सा बुदबुदाया- ये सीने के उभार कैसे नापूं?
अब भी उसकी आँखें बंद थीं.. जैसे वो हर चीज़ नज़रंदाज़ सी कर रही हो।
मैंने थोड़ी हिम्मत दिखाई और उसके पेट से हाथ फिराते हुए उसके स्तनों के नीचे की सीमा ढूँढने की साधारण सी कोशिश की।

जैसे ही मैंने उसके स्तनों को नीचे से छुआ.. उसके पूरे बदन में करंट सा दौड़ गया.. जैसे कि पहली बार उसके उन मुलायम और रसीले संतरों को किसी ने छुआ हो।
उसकी साँसें और तेज़ हो गईं.. पर उसने कोई विरोध नहीं किया।
मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके स्तन के नीचे के सूट को उसकी ब्रा के नीचे दबा दिया.. ताकि नाप हो सके.. फिर स्तन के नीचे की नाप ले ली।

वो कुछ भी नहीं बोली।
अब मेरे लिए जरूरी हो गया कि उससे कुछ बुलवाया जाए ताकि उसके मन के अन्दर क्या चल रहा है.. यह मैं समझ सकूँ।
मैं इतना तो जान गया था कि चिड़िया अब मेरे आँगन में उतर आई है। मैंने उससे कहा- शाज़िया तुम तो ऐसे शर्मा रही हो.. जैसे पहली बार किसी ने तुम्हें छुआ हो.. अच्छा ये बताओ कि गला कितना गहरा करना है।

उसने शरमाते हुए आँखें खोलीं.. पर मुझसे नज़र नहीं मिला पा रही थी। जबकि छेड़खानी मैं कर रहा था.. पर नज़र वो झुका रही थी।
वो बोली- बस अंकल.. इतना गहरे हो कि क्लीवेज (स्तनों के बीच की रेखा) हल्की सी दिखाई दे..

जब उसके मुँह से मैंने ‘क्लीवेज’ का नाम सुना.. तो मैंने सोचा कि थोड़ा आगे बढ़ा जा सकता है।
मैंने कहा- पर इसके लिए पहले मुझे ये तो समझ आए कि तुम्हारे स्तनों के उभारों के टिप कहाँ हैं..? तुम्हारा ये सूट बहुत दिक्कत कर रहा है। अच्छा अपने दोनों टिप पर अपनी उंगलियाँ रखो।

एक मिनट को वो कुछ सोच में पड़ी.. पर फिर उसने अपने दोनों हाथ की एक-एक उंगली अपने टिप्स पर रख कर ऊपर देखने लगी।

मैंने धीरे से उसके दोनों हाथ उसके स्तनों से हटाए और फिर.. अपनी चार उंगलियाँ उसके उसके स्तनों के नीचे लगाते हुए उसके दिखाए स्थान पर अंगूठों से हल्का-हल्का रगड़ना शुरू किया।
उसकी साँस बहुत तेज़ चलने लगी और आँख बंद किए-किए वो बोली- अंकल.. ये क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा- तुम्हारे उभारों को और उभारने की कोशिश कर रहा हूँ.. ताकि सूट के ऊपर से ही सही नाप ले सकूँ।
यह कहते हुए मैंने हाथ हटा लिया और कहा- सॉरी शाज़िया.. पर सूट के ऊपर से तुम्हारे उभार ठीक से समझ में नहीं आ रहे। ऐसे तो नाप गलत हो जाएगी।

उसने आँखें खोल दीं और बोली- फिर क्या करें? आप निगार के सूट कैसे एकदम फिटिंग के बना देते हैं?
मैंने कहा- देखो अगर तुम निगार को बताओ नहीं.. तो मैं तुम्हें बताता हूँ।
उसने नहीं बताने का ‘वादा’ किया।

मैंने कहा- देखो सही नाप तो तभी आ सकती है.. जब मैं तुम्हारे कोरे बदन की नाप लूँ। निगार ने भी एक बार यहीं इसी कमरे में पूरे कपड़े उतार कर सिर्फ ब्रा-पैंटी में नाप दी थी। अब मैं उसकी उसी नाप से उसके कपड़े सिल देता हूँ। तुम भी अगर एक बार हिम्मत करो तो हमेशा की दिक्कत दूर हो जाएगी और मैं शर्त लगा सकता हूँ कि तब मैं तुम्हें जैसी फिटिंग दे दूँगा.. वो बड़े-बड़े फैशन डिजाईनर भी नहीं दे पाएंगे।

मैंने तीर तो मार दिया था और अब इंतजार कर रहा था कि तीर सही निशाने पर लगा कि नहीं। बस यही सोच रहा था कि एक बार यह सूत उतारने को राज़ी हो जाए.. फिर तो इस अंगूर का रस अन्दर तक चूसूँगा।

वो लगातार मुझे देखती जा रही थी। वो कुछ कहती या करती.. मैंने उसे फिर समझाया- देखो इस कमरे के अन्दर तुम्हारे बदन को सिर्फ मैं देखूंगा.. पर जब तुम मेरे सिले कपड़े पहन कर बाहर जाओगी.. तो पूरी दुनिया तुम्हें ही देखेगी, अब निर्णय तुम्हारा है।

वो थोड़ा शरमाते हुए बोली- पर अंकल अगर किसी को इस बारे में पता चला तो मेरे लिए बहुत दिक्कत हो जाएगी और थोड़ी देर पहले आपने सही कहा था कि आज तक मेरे स्तनों को छूना तो दूर उन्हें किसी ने देखा भी नहीं है। इसलिए मुझे बहुत शर्म भी आ रही है।

मैंने उसकी बात को बीच में ही काट कर कहा- देखो.. पहली बात तो ये.. कि इस कमरे में क्या हुआ.. ये किसी को नहीं पता चलेगा और दूसरी बात कि ये हो सकता है कि आज तक तुम्हारे बदन को किसी ने बिना कपड़ों के नहीं देखा या छुआ है.. पर कल को तुम्हारी शादी होगी तब भी क्या तुम उसे अपना बदन नहीं छूने दोगी और फिर मुझे कौन सा तुम्हारा बदन एक घंटे तक निहारना है बस दस मिनट में तुम दुबारा कपड़े पहन लेना। निगार भी दस मिनट के लिए ही मेरे सामने नंगी हुई थी।

साथियों.. इस मदमस्त कहानी का अगला भाग जल्द ही आपके सामने पेश करूँगा। इस बात के साथ इजाजत चाहूँगा कि आप मुझे अपने प्यार से भरे हुए ईमेल जरूर भेजेंगे।
कहानी जारी है।
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