निरंकुश वासना की दौड़- 5

(Dost Ki Biwi Xxx Chudai)

दोस्त की बीवी Xxx चुदाई का मजा मैंने दिलाया अपने सेक्सी पति को … पर बदले में मैंने उनके दोस्त के लंड से चुद कर अपनी चूत में पांचवें लंड का प्रवेश करवा लिया.

कहानी के चौथे भाग
हया की गिरती दीवारें
में अब तक आपने पढ़ा कि नीलम अपनी चूत की नए लंड की तलब मिटाने, अपने पति के मित्र निखिल से चुदवाने मुंबई पहुंचती है।
उसकी अतृप्त पत्नी संध्या के साथ लेस्बियन संबंध स्थापित करके उसको काम संबंधों पर विस्तृत ज्ञान देती है।
संध्या को न केवल अपने पति से बिना उसकी जानकारी में लाये चुदवा देती है बल्कि निखिल की वासना को भी भड़का कर उसको स्वैपिंग का खेल खेलने के लिए मना भी लेती है।

अब आगे दोस्त की बीवी Xxx चुदाई:

रात में निखिल को चित लिटा कर मैं उसके खड़े लंड पर बैठ गई।
उसका समूचा लंड मेरी चूत में समा गया था।

एक ही दिन में किसी औरत को तीसरी बार चोदने का उल्लास उसके चेहरे पर झलक रहा था।
उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों से खेलने लगे।

मैं भी निखिल के लंड को अपनी चूत के भीतर लेने के बाद उसका आनन्द ले रही थी।
निखिल ने जब देखा कि मैं कोई हरकत नहीं कर रही हूं तो वह नीचे से कमर उछालने की नाकाम कोशिश करके मेरे से इसरार करने लगा कि मैं अपनी कमर को हिला कर उसके लंड को घर्षण सुख पहुंचाऊं।

मैं शरारत से बोली- मुझे घोड़े की सवारी में भी मजा आता है. पर इस लौड़े की सवारी का जवाब नहीं।

उसके बाद मैं उछल-उछल कर चूत और लंड दोनों को रगड़ों की गर्मी प्रदान करने लगी।
पहली बार मैं और संध्या के हसबैंड स्वैपिंग की सहमति के बाद एक दूसरे के पतियों से चुदने का पूरा मज़ा ले रही थी।

मेरी चूत की मस्ती अपने चरम पर थी.

बहुत जल्दी निखिल के चेहरे पर बेचैनी झलकने लगी जैसे वह चुदाई के इस आसन में अपने आप को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है।

मैं रुक गई और झुक कर उसके होठों को चूमने लगी, अपने दोनों हाथों से उसकी निप्पल को मसलने लगी।

उसका लंड निप्पलों से प्राप्त काम तरंगों के कारण और अधिक ऐंठने लगा।
उसने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ भींच लिए।

वह लंबी-लंबी सांसें लेता हुआ अपने आप को स्खलित होने से रोक रहा था।
उसके बाद उसने आसन बदला, मेरे को नीचे लिटाया और स्वयं मेरे ऊपर आ गया।

एक मिनट के विश्राम के बाद उसने फिर से मुझे चोदना शुरू किया और कस कस के 8 -10 धक्के लगा दिए।

उसके बाद फिर उसने रुक कर लंबी-लंबी सांसें भरी और अपने लंड से बाहर निकलने को उतावले हो रहे वीर्य को डिस्चार्ज होने से रोका।

जब वह धक्के लगाना बंद करता तो मुझे झुका कर मेरी निप्पलों को चूसना शुरू कर देता।

मेरे दोनों बोबे आम की तरह दबा दबा के, चूस चूस के जैसे उसने निचोड़ लिये।

रुक रुक के धक्के लगाने का यह सिलसिला करीब 20 मिनट तक चला.
उसके बाद निखिल अपना नियंत्रण खो बैठा और लगातार 20-25 धक्के लगाकर अपने लंड से वीर्य की पिचकारी मेरी चूत में छोड़ते हुए चरम सुख के क्षणों को भोगने लगा।

मेरे परमानन्द के पल जरा से अटके हुए थे।
मैंने उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत की ऊपरी संवेदनशील सतह पर कुछ सेकंड के लिए रगड़ा और मेरी चूत की एक एक नस फड़कने लगी।
एक-एक फड़कन दिमाग को अजीब सी शांति से भर रही थी, मेरे दिमाग में वासना की ज्वाला, शनैः शनैः शांत होने लगी थी।

मेरी और निखिल की सांसें भरी हुई थीं.
निखिल मेरे ऊपर निढाल लेटा हुआ लंबी-लंबी सांसें ले रहा था।
मैंने निखिल को अपनी बाहों में भींचा हुआ था।

हम दोनों के नंगे जिस्म पसीने में लथपथ हो चुके थे।

उधर सुनील ने संध्या के कमरे में प्रवेश किया तो संध्या दरवाजे के पीछे छुपी हुई थी।

सुनील ने खाली बिस्तर देखा तो वह असमंजस में पड़ गया कि संध्या कहां गई?
इतने में संध्या दरवाजे के पीछे से आई और सुनील की शॉर्ट्स उतार दी।

सुनील चौंक कर पलटा तो संध्या घुटनों के बल होकर सुनील का आधा तना हुआ लंड चूसने लगी।

सुनील ने तो संध्या को सुबह पौ फटने से पहले चोदा था, उसके लंड को दिन भर का रेस्ट मिल चुका था इसलिए उसका लंड बहुत जल्दी संध्या को चोदने के लिए कड़क हो गया।

उसने संध्या को उठाया और उसके होठों का रसपान करने लगा और उसके भरे भरे स्तनों से खेलने लगा।
इस चलती कामक्रीड़ा के बीच सुनील ने संध्या से पूछा- सुबह-सुबह मेरे नए लंड से पहली बार चुद कर कैसा लगा?

संध्या, सुनील के इस प्रश्न से चौंक गई.
फिर उसने शरमाते हुए कहा- मुझे तो पता था कि मैं अपने पहले पराए मर्द से चुदवा रही हूं। इसलिए मुझे तो बहुत मजा आया यार! सुबह सुबह तुम्हारे कड़क और नए लंड से चुदाई का मेरा अनुभव बहुत ही शानदार रहा।

उसके बाद संध्या ने सुनील से पूछा- तुमको कब पता लगा कि तुमने नीलम को नहीं मुझे चोदा है? और मुझे चोद कर कैसा लगा?
इस पर सुनील ने कहा- मुझे तो नीलम ने कुछ देर पहले ही बताया कि सुबह चुदने वाली वह नहीं, तुम थीं। मुझे तो रोज जितना ही मजा आना था क्योंकि मैं तो नीलम समझ कर ही चुदाई कर रहा था। अगर मुझे पता होता कि मेरा लंड, तुम्हारी नई चूत में जा रहा है तो मेरा आनन्द चौगुना हो जाता। मैंने सुबह अनजाने में जो तुम्हारी चुदाई की थी, उसकी कसर मैं अभी निकालता हूं।

उसके बाद में सुनील ने संध्या को कुतिया बनाया और कुत्ते की तरह पहले उसकी चूत में मुंह देकर, उसकी चूत को चाट चाट कर अपनी मुखलार से चिकना किया और फिर खड़े होकर, उसकी कमर को पकड़कर, अपना कड़क लंड एक झटके में उसकी चूत में पूरा घुसेड दिया और फिर हौले हौले धक्के लगाने लगा।

इस पोजीशन की सबसे खास बात यह है कि इसमें मर्द को मेहनत कम करना पड़ती है और लंड भी औरत की चूत में पूरा जाता है।
औरत को इस आसन में यह फायदा है कि वह इसमें लंड के धक्कों के मजे भी लेती है और उसे मर्द का वजन भी नहीं झेलना पड़ता।

लेकिन कमी है तो केवल इतनी कि यदि पहले से पता न हो तो औरत को चुदवाते हुए भी यह पता नहीं चलता कि उसे उसका पति चोद रहा है या कोई और मर्द।
जैसे कुतिया को पता नहीं चलता कि जो तीन चार कुत्ते उस पर चढ़ना चाह रहे थे उन में से कौन सा कुत्ता उसकी चुदाई कर रहा है?

सुनील तो चुदाई का एक्सपर्ट है ही … वह जम कर संध्या की चूत चोदने लगा।
चुदाई को बीच में रोक कर कभी वह उसके बोबे मसलने लगा जाता और कभी उसके चूतड़ों पर तड़ातड़ थप्पड़ मारने लग जाता।

संध्या को पहली बार अपने मांसल चूतड़ों पर, मर्द के हाथों थप्पड़ का मजा मिल रहा था।

वैसे संध्या ने तो सुबह भी सुनील के लंड से चुदाई का आनन्द लिया था पर सुबह की तुलना में अभी वाली चुदाई का आनन्द कहीं ज्यादा था क्योंकि अभी सुनील को भी नई चूत का, नए जिस्म का अहसास था इसलिए वह उत्साह से लबालब हो के उसको चोद रहा था।

उनकी चुदाई करीब आधा घंटा चली होगी.
तब सुनील ने कहा- संध्या, तैयार हो जा … अब मेरा निकलने वाला है।

संध्या, जो कि चुदाई का पूरा मजा लेते हुए हर धक्के के साथ में अपने चूतड़ पीछे करते हुए सुनील के आनन्द को दुगना कर रही थी, खुद भी झड़ने की कगार पर पहुंच गई।
तो संध्या ने उत्तेजित स्वर में कहा- यस … यस … सुनील डॉन्ट स्टॉप … डॉन्ट स्टॉप … चोदो … चोदो … कस के चोदो! फक मी … फक मी हार्ड … प्लीज फक मी हार्ड!

और वह जादुई क्षण आ गया जब सुनील और संध्या दोनों एक साथ झड़े।

दोस्त की बीवी Xxx चुदाई करते समय सुनील का लंड जड़ तक संध्या की चूत में समाया हुआ था।
उसकी आंखें बंद थीं और पूरा शरीर अकड़ा हुआ था।
उसके लंड से वीर्य के कतरे एक-एक करके निकल रहे थे और सुनील के बदन के तनाव को राहत पहुंचा रहे थे।

सुनील का वीर्य, संध्या की चूत रस के साथ मिलकर, पलंग के किनारे चादर पर टपक टपक के गिरने लगा।

इधर निखिल ने तो मेरी चूत में झड़ने के बाद करवट बदली और तुरंत सो गया।

उसकी इस हरकत से ही मैं समझ गई कि निखिल और संध्या की जिंदगी नीरस क्यों है?
क्योंकि स्वार्थी होते हैं वे मर्द जो औरत की चुदाई करते हुए अपने लंड का तनाव वीर्य स्खलन के रूप में उसकी चूत में निकालने के बाद मुंह फेर के सो जाते हैं।

औरत को चुदाई के बाद में भी मर्द का आलिंगन, उसका स्पर्श, उसकी आंखों में खुशी, तृप्ति, उमड़ा हुआ प्रेम देखकर जो संतुष्टि मिलती है, उसको मर्द कभी समझ नहीं सकता।

जो मर्द औरत की इस भावना को समझ लेते हैं, उनकी जिंदगी हमेशा आनन्द से भरी रहती है।
उनका एक दूसरे पर विश्वास दिनों दिन मजबूत होता जाता है और इसी विश्वास के सहारे वे फिर अपने आनन्द को और अधिक बढ़ाने के लिए नए साथी भी अपने सैक्स जीवन में सम्मिलित करते हैं और अपने आनन्द को विस्तार देते हैं।
आनन्द के साथ ही वे अपने जीवन से ऊब और एकरसता को भी समाप्त करते हैं।

सुनील और संध्या तो एक दूसरे को भरपूर मजा दे रहे थे और बदले में एक दूसरे से भरपूर मजा ले रहे थे।

झड़ने के बाद अपनी अपनी वासना को कुछ समय के लिए शांत कर के दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले बातें कर रहे थे।

संध्या ने सुनील को कहा- आज मेरी जिंदगी की सबसे मस्त चुदाई हुई है लेकिन एक कसर रह गई।
सुनील चौंक गया- क्या कसर रह गई? इतना मस्त ऑर्गेज्म मिला है तुमको, उसके बाद भी ऐसा कह रही हो?

तो संध्या हंसने लग गई, बोली- कसर ये रह गई कि तुम मुझे पीछे से चोद रहे थे और मैं तुम्हारा यह सुहाना मुखड़ा देख नहीं पा रही थी, तुम्हारे जिस्म से लिपट नहीं पा रही थी। मैं चाहती हूं कि तुम मेरे ऊपर आकर मुझे चोदो और मैं पूरे समय तुम्हें निहारती रहूं, अपनी बाहों में तुम्हें जकड़ के रखूं। मैं निखिल का चेहरा देख-देख कर उकता चुकी हूं इसलिए मैं एक बार फिर से चुदवाना चाहती हूं लेकिन इस बार घोड़ी बनकर नहीं, तुम्हें अपने ऊपर लेकर तुम्हारे नीचे दब कर पिस जाना चाहती हूं।

सुनील ने कहा- अभी तो हमारी चुदाई खत्म हुए मुश्किल से 10 मिनट हुए हैं। जब तुम्हारी एक और बार चुदवाने की इतनी इच्छा है तो मैं जरूर चोदूंगा बस मुझे और मेरे लंड को थोड़ा समय चाहिए जिससे मेरा लंड फिर से तुम्हारी चूत से घमासान करने के लिए तैयार हो सके।

उसके बाद संध्या और सुनील के बीच अतृप्त कामनाओं तथा फैंटेसी पर बात होने लगी।

सुनील की रसीली बातें सुनकर संध्या की चूत में सरसराहट बढ़ने लगी।
संध्या अनुमान लगाने लगी कि सुनील और मेरे साथ यदि वह जाती है तो उसे कौन-कौन से नए आह्लादकारी अनुभव मिल सकते हैं.

उसकी जवानी, उसकी वासना, उसकी लालसा उसे कहां तक ले जा सकती है?
पर उसकी कल्पना कोई निश्चित आकार नहीं ले सकी क्योंकि उसने अपने बेडरूम में निखिल के साथ चुदाई के अलावा और कुछ भी अनुभव नहीं लिया था।
वह बाहरी दुनिया की रंगीनियों से पूरी तरह अनभिज्ञ थी।

इतना तो निश्चित था कि उसको जो आनन्द मिलने वाला था वह अकल्पनीय था।
इन कामुक ख्यालों के कारण उसकी चूत पुनः रिसने लगी।
वह अब एक और चुदाई के लिए फिर से कुलबुला रही थी।
अब जरूरत थी तो सुनील के लंड को तैयार करने की।

संध्या ने लेटे लेटे ही सुनील के लटके हुए नर्म, मुलायम लंड को चूसना शुरू किया.
सुनील जो कि मानसिक रूप से, संध्या को फिर से चोदने के लिए तैयार था, उसे ज्यादा समय नहीं लगा दो-तीन मिनट में ही लंड फिर से कड़क हो गया।

इस बार सुनील ने पहले तो संध्या की चूत में मुंह दिया और उसको बहुत देर तक चाटता रहा।
चूत के होठों को अपने होठों में जकड़ के चूसता रहा।

संध्या के शरीर में रमी हुई वासना की बहती बयार धीरे-धीरे चक्रवात का रूप लेने लगी।

जब संध्या बेताब होने लगी, उसका शरीर उत्तेजना के मारे कांपने लगा, तब उसने सुनील को कहा- सुनील डाल दो न यार, मेरी चूत में अपना मूसल लंड डाल दो न!
सुनील समझ गया कि ओरल के कारण वह झड़ने की कगार पर है, अब उसकी चूत को बस कुछ जबरदस्त रगड़े चाहियें।

तब सुनील ने अपने लंड को एक करारे झटके के साथ संध्या की चूत के अंदर डाला और लगातार धक्के पर धक्के लगाने लगा।
संध्या तो सुनील की चूत चुसाई के कारण चरम सुख के मुहाने पर ठहरी हुई थी इसलिए वह तो 8 -10 धक्कों के बाद ही झड़ने लग गई।

जबकि सुनील के लंड से 1 घंटा पहले ही वासना का तूफान गुजरा था, अभी उसके लंड में पूरी तरह शांति थी।
वह इतनी जल्दी झड़ने वाला नहीं था.
उसने अपने धक्के जारी रखे और संध्या की चूत लगातार झड़ रही थी।

पहली बार संध्या ने लगातार मिल रहे ऑर्गेज्म की बेचैनी महसूस की थी।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इतने अधिक आनन्द को कैसे समेटे?
संध्या मदहोश हो चुकी थी, उसे ऐसी मस्ती भरी चुदाई का अनुभव ही नहीं था।

उसके लिए तो यह आश्चर्य की बात थी कि इतने सारे ऑर्गेज्म एक ही चुदाई में मिल सकते हैं।
उसकी चूत लगातार फड़क फड़क के थक चुकी थी, शरीर की एक-एक नस खिंची हुई थी, सांसें भारी हो गई थीं।

उसने सुनील को भींच रखा था लेकिन सुनील की कमर लगातार ऊपर नीचे होकर संध्या को पागल किये दे रही थी।
कम से कम 30-40 दमदार धक्कों के बाद सुनील ने अपने लंड को संध्या की चूत में जड़ तक पहुंचाया और फड़कते लंड से वीर्य के कतरे उछल-उछल के बाहर निकलते रहे और संध्या की चूत को भरते रहे।
उसके बाद सुनील पस्त होकर संध्या पर पड़ गया और तूफान के बाद की शांति का आनन्द लेने लगा।

संध्या और सुनील दोनों एक दूसरे से लिपटे अपनी सांसें नियंत्रित करते रहे।
दोनों के नंगे बदन पसीने में नहा चुके थे।

उसके बाद संध्या ने सुनील को अपनी बाजू में लिटाया और उससे लिपटकर बोली- सुनील, तुम मेरे लिए कामदेव बनकर आए हो। मेरे शरीर को, मेरे दिल को, मेरे दिमाग को, मेरी आत्मा को, आज तुमने संतृप्त कर दिया है। चुदाई के ऐसे आनन्द की तो मैंने कभी कल्पना तक नहीं की थी. तुमको थैंक यू बोलना भी तुम्हारी मेहनत का, तुम्हारे जोश का, तुम्हारी मस्ती का, तुम्हारी मोहब्बत का बदला नहीं हो सकता। मैं बस यही कह सकती हूं कि आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे अधिक यादगार दिन है।

वह बोलती रही- सुनील, आज तुमसे चुद कर ऐसा लग रहा है जैसे मैंने आनन्द के उस शिखर को छू लिया है जिसके बाद की यात्रा केवल उतार है।
सुनील ने कहा- नहीं संध्या, यह तुम्हारी चुदाई के तुरंत बाद की सोच है. आनन्द की इस यात्रा में अभी तो कई शिखर आने बाकी हैं।

उसके बाद सुनील और संध्या की बात चलती रही.

अचानक सुनील के दिमाग में जैसे बिजली सी कौंधी, उसने संध्या से कहा- अरे यार, सुबह हम गोवा जा रहे हैं, निखिल से पूछ लो।
संध्या ने जवाब दिया- वह तो किसी हालत में नहीं जायेगा, उसे ये गलतफहमी है कि पूरी कंपनी उसी के बल पर चल रही है।

सुनील ने कहा- वह चलता है तो अच्छा है, नहीं चलता है तो ज्यादा अच्छा है, फिर तुम अकेली चलो, बिंदास हो के जिंदगी का मजा लो।
संध्या ने पूछा- क्यों गोवा में कोई विशेष प्लानिंग है क्या?
इस पर सुनील ने कहा- अरे तुम चलो तो सही, जितना मजा तुम्हें आज आया है, उससे अधिक नहीं आए तो कहना! गोवा के नशीले माहौल में तुम मस्ती में झूम उठोगी।

संध्या के तन मन में गुदगुदी सी होने लगी।
वह सोचने लगी कि हम दोनों (नीलम और सुनील) किस मिट्टी से बने हैं? आखिर हम इतने रोमांटिक कैसे हो सकते हैं?
उसने सोच लिया कि अब जब सुनील ने पूछा है तो चाहे कुछ भी हो जाए, वह हम लोगों के साथ जाएगी और अनुभव करेगी कि ‘जिंदगी में कितनी शरारत भरी मस्ती और मस्ती भरी शरारत की जा सकती है?’ कितना इस वासना भरे मादक शरीर से आनन्द उठाया जा सकता है.

संध्या ने कहा- मैं तैयार हूं। वहां जो कुछ भी करने की तुमने सोची है, वह सब तुम जानो, मुझे तो तुम दोनों के साथ चलकर ही मस्ती के नए फलक छूने हैं।

मेरे कामुक पाठको, आशा है कहानी मजेदार लग रही होगी.
अगले भाग में हम देखेंगे कि नीलम और संध्या की मुंबई से गोवा की मस्त चुदाई यात्रा और संध्या का उन्मुक्त अवतार!

दोस्त की बीवी Xxx चुदाई कहानी पर अपने विचार एवं सुझाव मुझे मेल कर सकते हैं.
ध्यान रखें कि आप केवल कहानी के विषय में ही बात करें. हाय, हैलो, चैट या मिलने के निवेदन वाले मेल पह्जली नजर में डिलीट कर दिए जायेंगे।
मेरी आईडी है
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