चढ़ती जवानी में हुई मेरी चूत मस्तानी- 1

(Bro Sis Sex Need)

ब्रो सिस सेक्स नीड की कहानी में पढ़ें कि एक बार भाई बहन खूब चुदाई कर चुके थे पर तब भी दोनों के बीच संकोच बाक़ी था. दोनों चुदाई करना चाह रहे थे पर कह नहीं पा रहे थे.

नमस्ते दोस्तो,
मैं गरिमा एक बार फिर हाजिर हूं अपनी कहानी लेकर।

पिछली कहानी
मेरी चढ़ती जवानी के रोचक प्रसंग
मैंने जैसा मैंने बताया था कि हम अपने मामा की शादी में गाँव आये थे। रेलवे स्टेशन पर छोटे भाई और एक अनजान शख्स से चुदने के बाद हम घर पहुंचे।

फिर सबसे मिलकर और खाना खाकर हम सो गये।

अगले दिन सोकर उठे तो देखा कि घर में और भी सारे रिश्तेदार आए हुए थे।
जिनमें से कुछ परिचित थे, वहीं कई लोगों से पहली बार परिचय हो रहा था।

उनमें से ही अमित और स्वीटी थे जो भाई-बहन थे. वे हमारी बड़ी मामी की बहन के लड़के थे.
अमित की उम्र में मुझसे करीब एक साल बड़ा था जबकि स्वीटी उसकी छोटी बहन थी।

स्वीटी का जैसा नाम था वैसी ही स्वीट वो भी सुंदर सी थी।
लंबे-लंबे बाल और उस पर भरा हुआ बदन … वह एकदम सेक्सी लगती थी।

अमित और स्वीटी से मेरी और सोनू की अच्छी दोस्ती हो गई थी।

मैंने देखा था कि सोनू अक्सर किसी न किसी बहाने से स्वीटी से बात करता रहता था।
उधर अमित भी मुझसे खूब बात करता था।

घर में हालांकि बहुत से हमउम्र लोग थे मगर हम चारों में कुछ ज्यादा ही पटने लगी थी।

हम चारों अक्सर एक साथ ही बैठे और बातें करते थे।
मजाक में हम सब चुटकुले भी सुनाते थे जो कभी-कभी डबल मीनिंग के भी होते थे।

पहले तो मैं और सोनू इस तरह की बात करने में हिचकिचाते थे कि कहीं अमित और स्वीटी बुरा ना मान जाए या फिर मेरे और सोनू के बारे में मैं क्या सोचेंगे कि भाई-बहन होकर भी ये कैसा मजाक करते हैं।
मगर बाद में मैंने और सोनू ने महसूस किया कि अमित और स्वीटी भी एक दूसरे से काफी खुले हुए थे।

अमित भी खूब डबल मीनिंग चुटकुले सुनाता था जिन पर स्वीटी भी खूब मजे लेती और हंसती थी।

खैर इसी तरह चार-पांच दिन कट गए और मामा की शादी भी हो गई।
घर में नई दुल्हन आ गई.

शादी के अगले ही दिन से रिश्तेदारों का वापस जाना शुरू हो गया।

हमने भी जाने की तैयारी शुरू कर दी।

मगर बड़े मामा-मामी और नानी, मम्मी को जबरदस्त रोकने लगे और कुछ दिन और रुकने के लिए कहा।
जिस पर मम्मी तैयार हो गई।

फिर हमें और सोनू को एक बार फिर अकेले ही सफर करना था।
मैं तो मन ही मन खुश हो गई कि चलो मौका मिला तो एक बार फिर स्टेशन पर मजे करेंगे।

सोनू का चेहरा देख कर मैंने महसूस किया कि वह भी काफी खुश था।
अगले दिन शाम को हमें निकालना था।

ट्रेन का टाइम रात 9 बजे का था.
इस बार हमें गांव से शहर जाना था तो कोई दिक्कत नहीं थी।

रात में हमें पता चला कि अमित और स्वीटी भी उसी ट्रेन से जायेंगे।
उन्हें आगे तक जाना था.

यह सुनकर हमें अंदर-अंदर गुस्सा आ रहा था कि मैं और सोनू पिछली बार की तरफ मजा नहीं कर पाएंगे।
सोनू का भी चेहरा उतर गया था।

हालांकि हम दोनों ने एक दूसरे से अभी कुछ कहा नहीं था मगर मन ही मन सब समझ रहे थे।

खैर… रात में हम सब सो गए।

अगले दिन सुबह तो कर उठे तो देखा कि अमित और स्वीटी कहीं जाने के लिए तैयार थे।

मैंने पूछा तो उन्हें बताया कि वे अपने गांव जा रहे हैं और वहीं से सीधी रात में स्टेशन आ जाएंगे।
दरअसल उनका गांव हमारे गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर था। तो उन्होंने सोचा था कि जब इतनी दूर आए तो एक बार अपने गांव भी सबसे मिल लें।

थोड़ी देर बाद वे दोनों भाई बहन तैयार हो कर चले गए।

हमने भी तैयारी शुरू कर दी.

दिन में खाना खाते समय सोनू ने मुझसे धीरे से कहा- दीदी, हमारी ट्रेन रात 9 बजे है। मगर हम स्टेशन के लिए जल्दी निकल लेंगे।
मैं- क्यों?
सोनू- कुछ नहीं बस ऐसे ही! अगर अमित और स्वीटी के आने से पहले हम पूछ जाएंगे तो थोड़े स्टेशन वाले अंकल से एक बार फिर मुलाकात कर लेंगे।

और यह कह कर वह हल्का सा मुस्कुराने लगा।
मैं समझ गई कि सोनू क्या चाह रहा है।

मैंने भी हल्का सा मुस्कुरा कर कहा- ठीक है।
हम ब्रो सिस सेक्स नीड को समझ रहे थे.

फिर खाना खाकर हमने अपने सामान की पैकिंग कर ली।

शाम 5 बजे के करीब सोनू ने मम्मी से कहा- मम्मी हम स्टेशन जल्दी चले जाएंगे।
मम्मी ने पूछा- क्यों?
सोनू ने कहा- अरे अंधेरा जल्दी हो जाता है और अगर पिछली बार की तरह अगर बाइक फिर से पंचर हो जाएगी तो परेशानी हो जाएगी। फिर रास्ते में कोई सवारी भी नहीं मिलती।

मैं सोनू के बहाने सुनकर मन ही मन हंस रही थी।

खैर मम्मी मान गयी और उन्हें कहा- ठीक है।
हम दोनों खुश हो गये।

5.30 होते-होते अँधेरा होने लगा।
सोनू और हम तैयार हो गए।

तो माँ ने कहा- इतनी जल्दी क्या है?
फ़िर हमने कहा- माँ जल्दी पहुँच जाएँगे तो ठीक रहेगा, ज़्यादा रात में निकलेगा ठीक नहीं।

दअरसल हम दोनों जल्दी से जल्दी स्टेशन पहुंच जाना चाह रहे थे ताकि अमित और स्वीटी के आने से पहले थोड़े मजे ले सकें।

घर में इतनी भीड़ होने की वजह से हम उस दिन के बाद एक बार भी एक दूसरे से कोई मजे नहीं ले पाए।
यहां तक कि मुझे बाथरूम में उंगली से भी अपनी चूत की प्यास बुझाने का मौका नहीं मिल रहा था।

खैर जल्दी करते-करते 6.00 बजे तक हम घर से निकल लिए।
मामा अपनी बाइक से हमें छोड़ने स्टेशन तक आये थे।

6.30 बजे तक हम स्टेशन आ गये।
मामा थोड़ी देर स्टेशन पर रुकने को कह रहे थे मगर हमने किसी तरह उन्हें समझाकर स्टेशन के बाहर से ही वापस कर दिया।

स्टेशन पर एकदम सन्नाटा पसरा था।
ऐसा लग रहा था कि हमारे अलावा कोई और है ही नहीं।

6.30 हो रहे थे, अँधेरा पूरी तरह हो चुका था।
स्टेशन पर ऑफिस के पास बस एक बल्ब जल रहा था।

हम टिकट विंडो पर गए तो देखा कि उसी ऑफिस में, जहां हम पिछली बार बैठे थे, एक तरफ से खिड़की खोल कर टिकट विंडो बनी थी।
अन्दर एक आदमी था.
हमने दो टिकट लिए।

खिड़की से अंदर देखा तो बुकिंग क्लर्क के अलावा और कोई ऑफिस में नहीं था।
हम समझ गए कि इस बार स्टेशन पर इसकी ड्यूटी है और अंकल की छुट्टी है।

तो मैं और सोनू टिकट लेकर प्लेटफॉर्म पर आ गए।
प्लेटफॉर्म पर देखा तो वहां भी एकदम सन्नाटा पसरा था।
बस ऑफिस के पास जो बल्ब लगा था, उसकी रोशनी हो रही थी बाकी जगह अंधेरा था।

हल्का-हल्का कोहरा भी गिरना शुरू हो गया था इसलिए ज्यादा दूर तक कुछ दिखाया भी नहीं जा रहा था।

प्लेटफार्म पर लोहे की बेंच बनी थी इसके अलावा 7-8 पेड़ भी लाइन से थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगे थे।
जिनके चारों ओर या बैठने के लिए सीमेंट का पक्का चबूतरा बना था।

पहले तो थोड़ी देर हम वहीं खड़े रहे.
फिर सोनू ने एक तरफ इशारा करते हुए कहा- दीदी, आओ उधर चल कर बैठते हैं।

हम दोनों प्लेटफार्म के एक तरफ चल दिये।
एक पेड़ के नीचे पहनने पर मैंने सोनू से जानबूझ कर कहा- यही बैठ जाते हैं।
सोनू ने कहा- थोड़ा और आगे चल कर बैठते हैं दीदी!

मैं मन ही मन हल्का सा मुस्कुरा रही थी; मैं समझ रही थी कि सोनू एकदम अकेले में चल कर बैठना चाह रहा था।

वैसे सच कहूँ तो मन मेरा भी वही था इसलिए मैं बिना कोई हील हुज्जत किये चल दी।

फिर प्लेटफॉर्म के एकदम आखिरी हिस्से में हम पहुंचे.
वहां पेड़ के नीचे चबूतरे पर सोनू ने बैग रखे हुए कहा- दीदी यहीं बैठते हैं।

मैंने भी इधर-उधर देखा और ‘ठीक है’ कह कर बैठ गयी।

स्टेशन पर हम दोनों के अलावा कोई नहीं था।
रेल पटरियों के पास एक लैंप पोस्ट की रोशनी हल्की-हल्की आ रही थी।
वो बस इतनी ही थी कि हम आस-पास ही देख सकते थे लेकिन हमें कोई नहीं देख सकता था।

कोहरा भी हल्का घना हो रहा था।
ऐसा कहूँ तो माहौल एकदम मस्त और सेक्सी हो रहा था।

मैंने सलवार-कुर्ता पहना हुआ था और उसके ऊपर जैकेट पहना था।

जानबूझ कर मैंने इस बार सलवार पहन ली थी ताकि जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से उतारा जा सके।
मैंने अन्दर पेंटी भी नहीं पहनी थी।
वहीं कुर्ता भी वो वाला पहना था जिसमें आगे बटन लगे हुए थे।

वैसे कहूं तो मैं चुदने की पूरी तैयारी के साथ आई थी।

उधर सोनू ने भी पिछली बार की तरह ही स्पोर्ट्स वाली लोअर और जैकेट पहनी हुई थी।
उसने भी शायद यही सोच कर पहना था कि नीचे उतरने में कोई परेशान न हो।

थोड़ी देर हम चुप बैठे और फिर इधर-उधर की बात करते रहे।
मगर हम दोनों ही जान रहे हैं कि हम कुछ और करना चाह रहे हैं।

हालांकि एक सप्ताह भी नहीं बीता है जब सोनू ने मुझे चोदा था, मेरी चूचियों को चूसा था और मैंने भी उसका लंड चूसा था।

मगर फिर भी हम दोनों आपस में इतना नहीं खुले थे कि सोनू मुझे सीधे कहे कि वह मुझे चोदना चाहता है या मैं उसे कहूं कि सोनू मुझे चोदो।

वजह यही थी कि उस दिन तो पहली ट्रेन में बिना एक दूसरे से बात किए सब कुछ हुआ था और पहले स्टेशन पर अंकल के बहाने हम दोनों ने आपस में मजे लिए थे।

मगर आज हम न तो ट्रेन में थे और न ही पिछली बार की तरह वो बुड्ढे अंकल थे कि हम उनके बहाने कुछ कर सकें।

उस दिन के बाद हम दोनों ने इस विषय पर कोई बात भी नहीं की थी और आज पहली बार हम दोनों अकेले थे।
इसलिए ना सोनू मुझसे कुछ खुल के कह रहा था और ना मैं कुछ कह पा रही थी।

बात करते-करते थोड़ी देर में सोनू हमारे टॉपिक पर आ गया जिसका हम दोनों को इंतज़ार था।

सोनू- पिछली बार अंकल की वजह से स्टेशन पर हमने खूब मजे किये थे।
मैं हल्का सा शरमाते हुए हंस पड़ी और कुछ कहा नहीं।

सोनू ने फिर कहा- अगर अंकल आज भी होते तो फिर मजा आता ना!
मैं हंसती हुई- तो जाओ खोज कर लाओ अंकल को!
सोनू मुस्कुराते हुए- अब कहां खोजूं उन्हें?

सोनू और मैं अब धीरे-धीरे एक दूसरे से खुलते जा रहे थे।
साथ ही मेरी चूत में भी खुजली होने लगी थी।

सोनू ने फिर मुस्कुराते हुए कहा- बिना अंकल के मजे नहीं कर सकते हम लोग?
मैं हंसने लगी और उसे चिढ़ाते हुए बोली- किस मजे की बात कर रहे हो तुम? मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है।

इस पर सोनू ने मुझे चिकोटी काटते बोला- अच्छा … बहुत भोली मत बनो दीदी। सच कहूं तो पिछली बार सबसे ज्यादा मजे तो तुम्हीं ने लिया था और अब भोली बन रही हो।

सोनू ने जैसे ही ये कहा, मैं एकदम शरमा गई और हंसती हुई बोली- अच्छा बाबा, चलो सारे मजे मैंने ही लूटे थे … अब खुश?

अभी सोनू कुछ कहने ही वाला था कि कुछ आवाज सुन कर हम दोनों एकदम चुप हो गए।

हमने पलट कर देखा तो स्टेशन ऑफिस के पास से कुछ आवाज आ रही थी मगर हम दोनों प्लेटफार्म के एकदम आखिर में थे।
अंधेरा और कोहरे की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

थोड़ी देर बाद ऐसा लगा कोई हमारी तरफ ही आ रहा है।
हम दोनों उठ कर पेड़ की आड़ में हो गये।

पास आने पर दो परछाई दिखाई देने लगी।
मगर अभी वे इतने पास नहीं थे कि हम उन्हें देख सकें कि वे कौन थे।

जैसे ही वे पास आए, हम दोनों एकदम चौंक गए।
क्योंकि वे अमित और स्वीटी थे।

प्रिय पाठको, आपको यह ब्रो सिस सेक्स नीड कहानी अच्छी लग रही होगी ना?
मुझे कमेंट्स में बताएं.

ब्रो सिस सेक्स नीड कहानी का अगला भाग: चढ़ती जवानी में हुई मेरी चूत मस्तानी- 2

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