मेरी नंगी जवानी की चुदाई की कहानी- 2

(Teacher Student Xxx Kahani)

टीचर स्टूडेंट Xxx कहानी में पढ़ें कि मुझे मेरी कोचिंग के अकाउंटेंट ने इंस्टीट्यूट में ही नंगी करके चोद दिया. उसके बाद मेरे सर ने मुझे मेरे ही घर में चोदा.

यह कहानी सुनें.

फ्रेंड्स, मैं सौम्या एक बार फिर से अपनी नंगी जवानी की चुदाई की कहानी के साथ आपके सामने हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
जवान लड़की की अन्तर्वासना
में अब तक आपने पढ़ा था कि संजीव भैया ने मेरा जन्मदिन मनाने के लिए मुझे कोचिंग में रुकने के लिए बोला था.
कुछ देर बाद जब सब लोग चले गए, तब संजीव भैया मेरे लिए केक, चॉकलेट्स, नाश्ते के लिए भी बहुत कुछ लेकर आ गए.

अब आगे टीचर स्टूडेंट Xxx कहानी:

फिर उन्होंने मुझे एक गिफ्ट पैक देते हुए कहा- इसको खोलकर देखो.
मैंने उस पैकेट को खोला तो उसमें गुलाबी रंग की बहुत ही खूबसूरत सी फ्रॉक थी.
तो मैंने पूछा- भैया ये किसके लिए?

उन्होंने कहा कि ये तुम्हारे लिए ही है और भी कुछ है इसके साथ, वो भी तो देखो.
मैंने फ्रॉक के नीचे देखा तो उसमें एक फुल नेट की ब्रा और एक नेट वाली पैंटी भी रखी हुई थी.
उन चीजों को देखकर मैं थोड़ी सी शर्मा गई.

मुझे शर्माते हुए देखकर भैया ने कहा- तुम इन सबको अभी पहनो, उसके बाद केक काटना.
मैं बोली- यहां कहां जाकर अपने कपड़े बदलूँ?

भैया ने बताया- तुम सुजय सर के केबिन में जाकर बदल लो.
मैं मान गयी और सभी चीजों को लेकर सुजय सर के केबिन में आ गयी.

उसके बाद मैंने पहले तो अपने सारे कपड़ों को उतार दिया.
मुझे फिर से अपने मदमस्त बदन में सेक्स की लहर उठने लगी.
मैंने पूरी नंगी होकर अपने दूध मसले और चूत में भी उंगली चलाई.

फिर मैंने संजीव भैया के दिए हुए ब्रा, पैंटी और फ्रॉक को पहन लिया.

फ्रॉक के पीछे का ज़िप बहुत ज्यादा लम्बा था तो मैं ज़िप को अच्छे से उसको लगाकर बाहर आ गई.

भैया तो मुझे कुछ देर तक देखते ही रह गए, उनकी आंखें मेरे ऊपर से हट ही नहीं रही थीं.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मैं बहुत सुन्दर बिल्कुल परी जैसी लग रही हूँ.
इस पर मैंने उन्हें धन्यवाद कहा और उनके कहने पर केक काटने के लिए टेबल की तरफ आ गयी.

फिर जैसे ही मैंने केक काटा, भैया ने उसमें से एक टुकड़ा लेकर मेरे चेहरे एवं से लेकर मेरे गर्दन के आगे कुछ नीचे तक और पीछे भी लगा दिया.

इस पर मैं भी केक के एक टुकड़े को लेकर उन्हें लगाने दौड़ी, तो भैया भी भागे.
ऐसे ही कुछ देर तक ऐसे ही भाग दौड़ का खेल चला.

उसके बाद भैया ने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरे हाथ से केक के टुकड़े को लेकर मेरी फ्रॉक के पीछे की ज़िप को पूरी तरह से खोलकर लगाने लगे.
तभी उनके हाथ में मेरी ब्रा का हुक आ गया तो उन्होंने उसे भी खोल दिया और मेरी नंगी पीठ पर वो केक लगाने लगे.

मैं उनकी बांहों में फंसी हुई थी और कुछ भी नहीं बोल पा रही थी.
अब भैया ने मेरी फ्रॉक को पूरी तरह से खोलकर मेरे बदन से अलग कर दिया.

मैं भी चुदासी हो उठी थी और मुझे लंड की सख्त जरूरत होने लगी थी इसलिए मैंने भी संजीव भैया को उकसाते हुए उनका साथ देना शुरू कर दिया था.

उन्होंने केक के टुकड़े को लेकर मेरे गोरे दूध पर मसल दिया.
मैंने भी बड़े प्यार से अपने दिनों दूध उनके हाथ से मसलवाए.

उन्होंने मेरा साथ देखा तो अगले ही पल मेरी पैंटी उतारकर मुझे पूरी नंगी कर दिया.

मैं आह आह की सीत्कार भरने लगी. उससे संजीव भैया भी चुदासे हो गए.
अब उन्होंने मुझे टेबल पर बैठा दिया और मेरे मम्मों पर लगा केक चाटने लगे और मेरे मेरे निप्पल्स को चूसने लगे.

मैं भी अपने हाथ से अपना दूध पकड़ कर उन्हें चुसवाने लगी.
मुझे बेहद सनसनी हो रही थी.

फिर वो मेरे नीचे की तरफ बढ़े और मेरी नाभि को चूमने लगे, उसमें अपनी जीभ डालकर कुरेदने लगे.
मैंने उनके सर को पकड़ कर अपनी नाभि में दबाना शुरू कर दिया.

कुछ देर मेरी नाभि को चूमने के बाद वो मेरी चिकनी बुर तक पहुंच गए.

अब तक मुझे बहुत मज़ा आने लगा था इसलिए मैंने अपनी दोनों उजली और भरी हुई जांघों को खोल दिया.

फिर भैया मेरी बुर में अपना मुँह लगाकर उसे चाटने लगे.
मैं एकदम से उत्तेजित हो गई और भैया से लंड पेलने की कहने लगी.

भैया ने तुरंत मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चिकनी गुलाबी बुर में अपना मोटा काला लंड पेल दिया.
मेरी आह निकल गई.

इतने दिनों से लंड की प्यासी मेरी चूत ने कुछ ही झटकों में लंड को जज्ब कर लिया और मैं मजा लेने लगी.

भैया भो अपना पूरा लवड़ा चूत की गहराई में पेलकर मुझे चोदने लगे.
मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया था और लंड तेजी से अन्दर बाहर होने लगा था. तेज गति से चुदने के कारण मस्त सटासट की आवाज़ आ रही थी.

भैया ने मुझे करीब 15 मिनट तक चोदा, उसके बाद उन्होंने अपना वीर्य बाहर गिराने के नजरिये से लंड चूत से बाहर निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया.

अब मैं उनका मोटा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. उसके बाद मैंने उनके लंड का गर्म पानी मैंने अपने मुँह में ले लिया.
इस तरह से मेरी चुदाई पूरी हुई.

अब भैया और मैं बहुत थक गए थे, तो थोड़ी देर आराम करने के बाद हम दोनों अपने अपने घर के लिए निकल गए.

ऐसे ही अब संजीव भैया को जब भी समय होता, वो मुझे चोद दिया करते थे.
वो मुझे कभी कोचिंग में, तो कभी उनके रूम पर, तो कभी कहीं और बुलाकर मुझे चोदते रहते थे.

मुझे उनसे चुदवाने में बहुत ही मज़ा आने लगा था.
मेरी चूत को अब लंड की खुराक मिलने लगी थी इसलिए मेरी चूत भी खिली खिली सी रहने लगी थी.

ऐसे ही चुदवाते हुए कुछ दिन बीत गए, समय फिर से एक बार बदला.
मेरी तबियत ख़राब हो गयी और मैं 5 दिनों तक कोचिंग पर काम के लिए नहीं गयी.

एक दिन सुजय सर ने मुझे कॉल करके मेरा हाल-चाल पूछा और समाचार जाना.
मैंने उन्हें बताया कि अभी भी मेरी तबियत पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है. मुझे पूरी तरह से ठीक होने में 2-4 दिन और लगेंगे.

उन्होंने बोला- ठीक है तुम अच्छे से रहो और ठीक होने पर ही कोचिंग आना. मेरे पास समय हुआ तो मैं कल तुम्हारे घर तुमसे मिलने आऊंगा.
मैंने कहा- ठीक है सर.
और मैंने फ़ोन रख दिया.

फिर वो अगले दिन दिन के करीब 11 बजे मेरे घर मुझसे मिलने आए.
उस समय मेरे घर में मम्मी-पापा नहीं थे, दोनों किसी काम से बाहर गए हुए थे और मैं नहाने जा रही थी.

मैंने घर के मेन गेट को बंद कर दिया था, पर न जाने क्यों गेट उस समय ठीक से बंद नहीं हो पाया और वो खुला ही रह गया.

उसके बाद मैं अपने घर के आंगन में नहाने के लिए चली आई.
हमारा घर काफ़ी पुराना था, जिस वजह से उसमें बाथरूम नहीं था.
हम सब आंगन में ही नहाते थे.

मैं आंगन में आकर नल चलाकर बाल्टी में पानी भरने लगी.
इतने में ही सुजय सर मुझे बाहर से सौम्या-सौम्या कहकर बुलाने लगे, पर पानी की आवाज़ की वजह से मैं उनकी आवाज़ को नहीं सुन पाई.
इसके चलते सुजय सर सीधा अन्दर की तरफ आ गए.

उस समय बाल्टी में पानी भर रहा था और मैं नहाने के लिए अपने कपड़ों को खोल रही थी.
तब सुजय सर वहीं पर छिपकर मुझे देखने लगे.

कुछ ही देर के बाद मैं पूरी नंगी हो गयी और अपने बालों को पानी से भिगोकर शैम्पू लगाने लगी.

शैम्पू लगाने के बाद मैंने अपने बालों को पानी से धो लिया और अब मैं अपने बूब्स पर गोल-गोल घुमाते हुए साबुन लगाने लगी.

चूचों के बाद मैंने अपनी बुर में साबुन लगाया और उसके बाद अपनी गोरी जांघों पर साबुन घिसा.

देखते-देखते मेरा पूरा नंगा बदन साबुन के झाग से लिपट गया था.

फिर मैं अपने बूब्स को रगड़ने लगी और अपनी बुर को भी उंगली डालकर साफ़ किया.
इसके बाद मैंने अपने बदन पर पानी डालकर नहाने लगी.

रगड़ रगड़ कर नहाने के बाद मैं खड़ी हो गयी और अपने भीगे जिस्म को तौलिये से पौंछने लगी.

पूरे जिस्म को अच्छे से पौंछने के बाद मैंने अपने भीगे बालों को भी अच्छी तरह से पौंछ लिया.
फिर मैंने तौलिये को वहीं आंगन में टांग दिया और नंगी ही रूम के तरफ चल दी.

ये सब सुजय सर छुपकर देख रहे थे.
फिर मैंने रूम में आकर ड्रायर से अपने भीगे बालों को सुखाया.
उसके बाद मैंने अपने बालों को बांध लिया और वैसी नंगी ही अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी.

उस समय घर में कोई था नहीं, तो मुझे नंगी रहना अच्छा लग रहा था.

मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई ही थी कि तभी अचानक से पीछे से सुजय सर ने आकर अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को पकड़ लिया.

मैं कुछ देर के लिए तो डर गयी कि पता नहीं कौन आ गया, पर हिम्मत करते हुए मैंने पीछे देखा तो सुजय सर थे.
मैंने सहमते हुए पूछा- सर आप? आप कब आए?

तब उन्होंने सारी बात बताई कि वो कैसे अन्दर आए और उन्होंने क्या-क्या देखा.
इस पर मैं थोड़ी सी झेम्प गयी, पर अब तो सुजय सर मेरे बदन से खेलने आ ही गए थे.

आज का दिन सुजय सर का था.
वो मेरे मम्मों को दबाने लगे और जल्द ही उन्होंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अब वो मेरे बिस्तर पर मेरे ऊपर चढ़ चुके थे और मेरे मम्मों के दोनों निप्पलों को बारी बारी से अपने मुँह से से चूस रहे थे.
मेरे निप्पल्स को चूसते हुए ही वो मेरी बुर पर भी अपने हाथ को फेर रहे थे.

मैं चुदासी हो गई थी.
सुजय सर ने मेरी आंखों में देखा और मैंने मूक स्वीकृति देते हुए उन्हें चोदने के लिए कह दिया.

सुजय सर ने अपने लंड को धीरे-धीरे मेरी बुर में डालना शुरू कर दिया और मेरी चुदाई शुरू कर दी.
मैं कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी. उस समय बस मेरे मुँह से चुदाई वाली आवाज़ निकल रही थी.

सुजय सर मुझे तेज़ी में चोदे जा रहे थे और मैं अपने सर से चूत चुदवाए जा रही थी.
मेरी धकापेल चुदाई के बाद सर ने अपना सारा माल मेरे बिस्तर पर ही गिरा दिया और मुझे चूमने लगे.

फिर कुछ देर रूककर उन्होंने कहा- सौम्या, तुम तो बहुत मस्त माल निकलीं. आज तुम्हें चोदकर मज़ा आ गया. अभी तुम ऐसी ही नंगी रहना, तुम नंगी बहुत अच्छी लगती हो.
मैंने उनकी बात पर बस ‘ठीक है …’ में उत्तर दिया.

उसके बाद उन्होंने मुझे एक बार और चोदा, फिर अपने कपड़े पहने और वापस जाने के लिए निकल गए.
मैं नंगी ही रही और दरवाज़ा बंद करके वापस अपने बिस्तर पर नंगी ही आकर लेट गयी.

मुझे वापस से बुखार चढ़ गया था, कुछ कमजोरी भी लगने लगी थी मगर बदन हल्का हो गया था.
शायद चूत की गर्मी शांत होने से ऐसा हुआ था.

फिर तीन दिन बाद मेरी तबीयत ठीक होने पर मैं कोचिंग गयी तो वहां सबने पहले मेरा हाल चाल पूछा.
मैंने बताया कि अब मैं ठीक हूँ.
सबने ख़ुशी ज़ाहिर की.

फिर मैं अपने काम में लग गयी.

दोपहर के समय जब सब लंच करने को गए हुए थे तो उसी वक़्त वहां कोचिंग का चपरासी भोलू मेरे पास आ गया.
उसने भी सबसे पहले मेरे तबियत की बात पूछी, तो मैंने उसे बताया कि अब मैं ठीक हूँ.

तब फिर उसने कुछ झिझकते हुए मुझे कहा- दीदी एक बात है, जो मुझे बहुत दिन से आपसे बोलना था, पर कैसे बोलूं ये नहीं समझ पा रहा था.
इस पर मैंने कहा- कौन सी बात है, बेझिझक होकर बोलो.

उसने कहा कि दीदी बात कुछ ऐसी है कि आपके जन्मदिन के दिन जब सब लोग चले गए थे और उस समय आप और संजीव भैया कोचिंग पर थे, तो उस समय मैं भी वहां सुजय सर के बोलने पर एक काम से वापस आया था. तब मैंने आपको नंगी देखा था. उसके बाद संजीव भैया ने आपको चोदा था, वो भी मैंने देख लिया था.

उसकी बातों को सुनकर पहले तो मैं थोड़ी घबरा गई, पर फिर मैंने उससे पूछा- तो क्या हुआ … तुम क्या चाहते हो, ये बताओ?
उसने कहा- आप बुरा तो नहीं मानेंगी न?

मैंने मन में सोचा कि साले तू मुझे चोदना चाहता है, इससे ज्यादा तू करेगा भी क्या.
सामने से मैंने कहा- हां बोल ना, मैं कुछ बुरा नहीं मानूंगी.

उसने कहा- मैं भी आपको नंगी करके अच्छी तरह से चोदना चाहता हूँ.
मैंने थोड़ी देर सोचने के बाद उससे कहा- ठीक है, तुम मुझे चोद लेना, जैसे तुम्हारा मन हो.

मेरी बात को सुनकर वो बहुत खुश हुआ और उसने मुझसे मेरा फ़ोन नंबर मांगा.
मैंने उसे अपना नम्बर दे दिया.

दोस्तो, अब मेरी नंगी जवानी की मदमस्त चुदाई की कहानी के अगले भाग में आपको भोलू के लंड से कैसे चुदाई हुई, मैं वो लिखूँगी.
आप मुझे मेल करें और मेरी टीचर स्टूडेंट Xxx कहानी पर कमेंट्स करें.
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टीचर स्टूडेंट Xxx कहानी का अगला भाग: मेरी नंगी जवानी की चुदाई की कहानी- 3

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