अभी ना जाओ चोद के !-1

(Abhi Na Jao Chod Ke-1)

नीरू बेन 2009-08-15 Comments

This story is part of a series:

मैं चाहती थी कि वो पहले मुझे चूमे चाटे और मेरे शरीर के सारे अंगों को सहलाए और उन्हें प्यार करे,
उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है।
… प्रेम गुरु की कलम से

ये गुलाबो भी एक नंबर की हरामजादी है। मैना और मिट्ठू के बारे में कुछ बताती ही नहीं। इस से अच्छी तो रज्जो ही थी जो पूरे मोहल्ले की खबर बता देती थी। किस लौंडिया का किस लौंडे के साथ चक्कर चल रहा है। फलां ने रात को अपनी औरत को कैसे चोदा कितनी बार चोदा और गांड मारी। मिसेज सक्सेना ने अपने मियां को कल रात कैसे चोदा ?

और रीतू आंटी ने गुप्ता अंकल को पिछले दस दिनों से अपनी चूत मारने तो क्या उस पर हाथ भी नहीं रखने दिया है। पर दो-तीन महीने पहले वो अपने तीन बच्चों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ भाग गई तो इस कम्बख्त गुलाबो को मजबूरी में काम पर रखना पड़ा। पर ये गुलाबो की बच्ची तो कुछ बताती ही नहीं। इसे तो हर समय बस पैसे की ही लगी रहती है। अब कल की ही बात लो एक हज़ार रुपये एडवांस मांग रही थी और साथ में चार दिनों की छुट्टी। तो फिर चार दिनों तक घर का काम और सफाई क्या उसकी अम्मा आकर करेगी ? आज आने दो खबर लेती हूँ।

आप चौंक गई होंगी कि यह गुलाबो, मैना और मिट्ठू का क्या चक्कर है ?

ओह… असल में ये मैना नई नई आई है ना। क्या कमाल का फिगर है साली का। मोटे नैन नक्श, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, कमान की तरह तनी भोंहें, कंधारी अनार की तरह गज़ब के स्तन और पतली कमर ! रेशमी बाहें और खूबसूरत चिकनी टांगें। नितम्बों का तो पूछो ही मत और उस पर लटकती काली चोटी तो ऐसे लगती है जैसे कि कोई नागिन लहराकर चल रही हो। एक दम क़यामत लगती है साली। कूल्हे मटका कर तो ऐसे चलती है जैसे इसके बाप की सड़क हो। पूरे मोहल्ले के लौंडो को दीवाना बना रखा है।

मेरा तो जी करता है कि इसका टेंटुआ ही पकड़ कर दबा दूँ। साली ने मेरा तो जीना ही हराम कर दिया है। जो पहले मेरी एक झलक पाने को तरसते थे आज मेरी ओर देखते ही नहीं, मैना जो आ गई है। मुझे समझ नहीं आता इस मैना में ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है ?

अगर सच पूछो तो ३६ साल की उम्र में भी मेरी फिगर बहुत कातिलाना लगती है। बस कमर कोई २-३ इंच जरूर फालतू होगी। मेरे नितम्ब और बूब्स तो उस से भी २१ ही होंगे। मेरे नितम्बों के कटाव तो जानलेवा हैं। जब मैं नाभि-दर्शना काली साडी पहनकर चलती हूँ तो कई मस्ताने मेरे नितम्बों की लचक देखकर गस खाकर गिर ही पड़ते है। पीछे से बजती हुई सीटियाँ सुन कर मैं तो निहाल ही हो जाती हूँ।

पिछले ८-१० सालों में तो मैंने इस पूरे मोहल्ले पर एकछत्र राज ही किया है। पर जब से ये मैना आई है मेरा तो जैसे पत्ता ही कट गया।

और ये साला मिट्ठू तो किसी की ओर देखता ही नहीं। पहले तो इसकी मौसी इसे अपने पल्लू से बांधे फिरती थी और उसके जाने के बाद ये मैना आ गई। ये प्रेम का बच्चा भी तो एक दम मिट्ठू बना हुआ है अपनी मैना का। आज सुबह जब ऑफिस जा रहा था तो कार तक आकर फिर वापस अन्दर चला गया जैसे कोई चीज भूल आया हो।

जब बाहर आया तो मैना भी साड़ी के पल्लू से अपने होंठ पोंछते हुए गेट तक आई। हाईई… क्या किस्सा-ए-तोता मैना है। मेरी तो झांटें ही जल गई। बाथरूम में जाकर कोई २० मिनट तक चूत में अंगुली की तब जाकर सुकून मिला।

मैंने कितनी कोशिश की है इस मिट्ठू पर लाइन मारने की, पर साला मेरी ओर तो अब आँख उठा कर भी नहीं देखता। पता नहीं अपने आप को अजय देवगन समझता है। ओह. कल तो हद ही कर दी। जब बाज़ार में मिला तो विश करते हुए आंटी बोल गया और वो भी उस हरामजादी मैना के सामने। क्या मैं इतनी बड़ी लगती हूँ कि आंटी कहा जाए ?

मैं तो जल भुन ही गई। जी में तो आया कि गोली ही मार दूं ! पर क्या करुँ। खैर मैंने भी सोच लिया है इस प्रेम के बच्चे को अगर अपना मिट्ठू बना कर गंगाराम नहीं बुलवाया तो मेरा नाम भी निर्मला बेन गणेश पटेल नहीं।

मैं अभी अपने खयालों में खोई ही थी कि कॉल-बेल बजी। गुलाबो आई थी। वो अपनी टांगें चौड़ी करके चल रही थी। उसके होंठ सूजे हुए थे और गालों पर नीले निशान से पड़े थे। जब मैंने उस से इस बाबत पूछा तो उसने कहा,’ओह ! बीबीजी हमें शर्म आती है !’ कहकर अपनी साड़ी के पल्लू को मुंह में लगा कर हंसने लगी।

मुझे बड़ी हैरानी हुई। कहीं मार कुटाई तो नहीं कर दी उसके पति ने ? मैंने उस से फिर पूछा तो उसने बताया ‘कल रात नंदू ने हमारे साथ गधा-पचीसी खेली थी ना ?’ उसने अपना सिर झुका लिया।

‘गधापचीसी ? ये क्या होती है ?’

उसने मेरी ओर ऐसे देखा जैसे मैं किसी सर्कस की कोई जानवर हूँ ! और फिर उसने शरमाते हुए बताया, ‘वो… वो. कभी कभी पीछे से करता है ना ?’

‘ओह ‘ मेरी भी हंसी निकल गई। ‘तू तो एक नंबर की छिनाल है री ? तू मना नहीं करती क्या ?’

‘अपने मरद को मना कैसे किया जा सकता है ? मरद की ख़ुशी के लिए वो जब और जैसे चाहे करवाना ही पड़ता है। क्या आप नहीं करवाती ?’

‘धत् . बदमाश कहीं की…? अच्छा… तुझे दर्द नहीं होता ?’
‘पहले पहले तो होता था पर अब तो बड़ा मज़ा आता है। गधापचीसी खेलने के बाद वो मुझे बहुत प्यार जो करता है ?’

मैं उस से पूछना तो चाहती थी कि उसके पति का कितना बड़ा है और कितनी देर तक करता है पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी। मैंने बातों का विषय बदला और उससे कहा ‘अच्छा पहले चाय पिला फिर झाडू पोंछा कर लेना !’ मैं आज मैना और मिट्ठू के बारे में तफसील से पूछना चाहती थी इसलिए उसे चाय का लालच देना जरूरी था।

मैं सोफे पर बैठी थी। गुलाबो चाय बना कर ले आई और मेरे पास ही फर्श पर नीचे बैठ गई। चाय की चुस्कियां लेते हुए मैंने पूछा ‘अरी गुलाबो एक बात बता ?’
‘क्या बीबीजी ?’
‘ये मैना कैसी है ?’
‘मैना कौन बीबीजी ?’
‘अरी मैं उस सामने वाली छमकछल्लो की बात कर रही हूँ !’

‘ओह.। वो मधु दीदी ? ओह वो तो बेचारी बहुत अच्छी हैं !’
‘तुम उसे अच्छी कहती हो ?’
‘क्यों क्या हुआ ? क्या किया है उसने… वो तो. वो तो. बड़ी.. !’
‘अच्छा उसकी वकालत छोड़. एक बात बता ?’
‘क्या ?’
‘ये मैना और मिट्ठू दिनभर अन्दर ही घुसे क्या करते रहते हैं ?’
‘दिन में तो साहबजी दफ्तर चले जाते हैं !’
‘ओह ! तुम भी निरी जाहिल हो ! मैं ऑफिस के बाद के बाद की बात कर रही हूँ।’

गुलाबो हंस पड़ी, ‘ओह. वो. बड़ा प्यार है जी उन दोनों में !’
‘यह तो मैं भी जानती हूँ पर ये बता वो प्यार करते कैसे हैं ?’
‘क्या ?? कहीं आप उस वाले प्यार की बात तो नहीं कर रही ?’
‘हाँ हाँ चलो वो वाला प्यार ही बता दो ?’
‘वो तो बस आपस में चिपके ही बैठे रहते हैं !’

‘और क्या करते हैं ?’ मेरी झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी। यह गुलाबो की बच्ची तो बात को लम्बा खींच रही है असली बात तो बता ही नहीं रही।

गुलाबो हंसते हुए बोली ‘रात का तो मुझे पता नहीं पर कई बार मैंने छुट्टी वाले दिन उनको जरूर देखा है !’ उसने आँखें नचाते हुए कहा।

अब आप मेरी चूत की हालत का अंदाजा लगा सकती है वो किस कदर पनिया गई थी और उसमें तो जैसे आग ही लग गई थी। मैंने अपनी जांघें जोर से भींच लीं।

‘अरी बता ना ? क्या करते हैं ?’

‘वो बाथरूम में घुस जाते हैं और… और…’

हे भगवान् इस हरामजादी गुलाबो को तो किसी खुफिया उपन्यास की लेखिका होना चाहिए किस कदर रहस्य बना कर बता रही है।
‘ओफो… अब आगे भी तो कुछ करते होंगे बताओ ना ?’

गुलाबो हंसते हुए बोली ‘और क्या फिर दोनों कपालभाति खेलते हैं !’
‘कैसे ?’
‘मधु दीदी पहले उनका वो चूसती हैं फिर साहबजी उनकी मुनिया को चूसते हैं…!’

मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और मेरी मुनिया तो अब बस पीहू पीहू करने लगी थी। उसमें तो कामरस की बाढ़ सी आ गई थी। और अब तो उसका रस मेरी गांड के सुराख तक पहुँच गया था। जी तो कर रहा था कि अभी उसमें अंगुली डालकर आगे पीछे करने लगूं पर गुलाबो के सामने ऐसा कैसे किया जा सकता था। मैंने अपनी जांघें जोर से कस लीं।

‘फिर ?’
‘फिर क्या मधु दीदी दिवाल की तरफ मुंह करके घोड़ी बन जाती हैं और वो पीछे से आकर उनसे चिपक जाते हैं !’
‘फिर ?’
‘फिर मैच चालू हो जाता है !’
‘कितनी देर लगाते हैं ?’
‘कोई आधा घंटा तो लगता ही होगा !’
‘हाय राम आधा घंटा ?’ मैंने हैरानी से पूछा।
‘हाँ और नहीं तो क्या ? आपको कितना लगता है ?’
‘चुप… छिनाल कहीं की ?’

गुलाबो हंसने लगी। मैंने उस से फिर पूछा ‘उसका कितना बड़ा है ?’
‘अब हमने कोई नापा थोड़े ही है पर फिर भी बित्ते भर का तो जरूर है !’
‘बित्ते बोले तो ?’

‘हथेली (पंजे) को चौड़ा करके अंगूठे और छोटी अंगुली की दूरी जितना। बस ये समझ लो कि मोटा और लम्बा सा खीरा या बैंगन हो !’
‘और रंग कैसा है ?’
‘रंग तो गोरा ही लगता है !’
‘लगता है मतलब ?’

‘ओह, बीबीजी अब मैंने कोई पकड़ कर या अन्दर जा कर तो देखा नहीं। उस चाबी के छेद में से तो ऐसा ही नजर आएगा ना ?’
‘और उस मैना की चूत कैसी है ?’

‘हाईई… क्या गोरी चिट्टी एक दम पाँव रोटी की तरह फूली हुई एक दम झकास। साहबजी तो उसे चूस चूस कर लाल ही कर देते हैं।’
‘कभी गधापचीसी भी खेलते हैं ?’
‘वो तो मैंने नहीं देखा ! क्यों ?’

अब आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकती हैं कि मेरी चूत में कितनी खलबली मची होगी उस समय। अब बर्दाश्त करना बड़ा मुश्किल था। बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारनी ही पड़ेगी। मैंने सोफे से उठते हुए उससे कहा, ‘अच्छा चल छोड़ तू एडवांस मांग रही थी ना ?’

‘हाँ बीबीजी बहुत जरुरत है मेरी भतीजी की शादी है ना अगले हफ्ते ? अब ३-४ दिन मैं नहीं आ पाउंगी !’

‘ठीक है तू सफाई कर जाते समय ले जाना !’ मैंने कहा और भाग कर बाथरूम में घुस गई और… ???

आज तो गुलाबो ने मुझे ऐसी खुशखबरी सुनाई कि मैं तो बस झूम ही उठी। मुझे लगने लगा कि अब तो इस मिट्ठू को गंगाराम बुलाने का सुनहरा मौका हाथ आ ही जाएगा। मैना आज जयपुर जाने वाली थी ना ४-५ दिनों के लिए ? हे भगवान् कुछ ऐसा कर कि ये साली वहीं पड़ी रहे। हे लिंग महादेव कुछ ऐसा कर कि इसकी टांग ही टूट जाए और २-४ महीने बिस्तर से ही ना उठ पाए और मैं और मेरा मिट्ठू यहाँ गुटरगूं करते रहें।

आप सोच रही होंगी मैं इस मिट्ठू की इस कदर दीवानी क्यों हो गई हूँ ? दरअसल पिछले एक डेढ़ साल से गणेश मगन भाई (मेरे पति) को मधुमेह (शूगर) की तकलीफ़ हो गई है और वो मेरे साथ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। खस्सी तोता बन गए हैं बिलकुल लप्पू-झन्ना। वैसे भी उनका ३-४ इंच का ही तो है। हाथ के अंगूठे जितना मोटा। और बस एक दो मिनट में ही टीं बोल जाते हैं। शादी के १-२ साल तक तो मैंने कोई ज्यादा चिंता नहीं की। फिर पता नहीं मेरी किस्मत अच्छी थी कि किट्टू (कोमल) पैदा हो गई और उसके प्यार में मैं सब कुछ भूल सी गई।

मेरी खूबसूरती की तो पूरी दुनिया कायल थी फिर मोहल्ले के लौंडे लपाड़े तो मुझे देखकर आगे पीछे घुमते ही रहते थे जैसे मैं कोई हूर ही हूँ। मेरा दावा है कि अगर आज भी मैं काली जीन पेंट और खुला टॉप पहन कर निकलूँ तो मेरे मटकते नितम्ब देखकर अच्छे अच्छों का पेंट में ही निकल जाए।

अपने बारे में बता दूं। मेरी उम्र ३६ साल है। लम्बाई ५’ ४’ साइज़ ३६-३०-३६, मैं पंजाबी परिवार से हूँ। मेरे पिताजी का सूरत में ट्रांसपोर्ट का काम धंधा है। गणेश भाई भी सूरत से हैं। मेरे ससुराल में सोने चांदी और हीरों का का कारोबार है। एक बार मैं उनके शो-रूम में कानों में पहनने वाली सोने की बालियाँ लेने गई थी तो गणेश ने एक की जगह २ जोड़ी बालियाँ दे दीं। और बोला- बदल बदल कर पहन लेना, आपको बहुत सुन्दर लगेंगी।

पता नहीं क्या बात थी मुझे उसकी बातें बहुत अच्छी लगी और हमने प्रेम विवाह कर लिया। शादी के बाद गणेश ने भरतपुर में ज्वेलरी का शो-रूम खोल लिया। घर में सब तरह का आराम है। मुझे गहनों से तो जैसे लाद ही रखा है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। बस कमी है तो एक अदद लंड की।

शादी हुए १०-१२ साल हो गए हैं। गणेश की उम्र ४२-४३ की है। कोमल पैदा होने के बाद मैंने अपनी चूत के नीचे टाँके लगवा लिए थे और अब तो उसका चीरा केवल ३ इंच का ही रह गया है। मैं तो चाहती हूँ कि कोई मोटा और लम्बा सा लंड एक ही झटके में मेरी इस फुदकती चूत में ठोक दे और आधे घंटे तक बिना रुके रगड़ता ही रहे, भले ही उसके २-३ टाँके ही टूट जाएँ, सारे कसबल निकाल दे। पर अब गणेश तो गोबर गणेश ही बन गया है।

मैं तो चाहती हूँ कि एक मोटा सा लंड हो जिसे मुंह में लेकर सारी रात चूसती ही रहूँ और फिर उसकी ४-५ चम्मच मलाई गटागट पी जाऊं। पर क्या करुँ गणेश की तो मुश्किल से २-४ बूँदें ही निकलती हैं और वो भी १०-१५ दिनों के बाद। मैं तो इस चूत में अंगुली कर कर के थक गई हूँ और इतना आजिज़ (तंग) आ चुकी हूँ कि कभी कभी सोचती हूँ कि जबरदस्ती किसी को पकड़ कर उसका लंड ही काट खाऊं।

हे भगवान् ! तू कितना दयालु है। गणेश एक हफ्ते के लिए सूरत गए हुए हैं साथ में किट्टी भी अपने दादा दादी से मिलने चली गई है। और खास बात तो यह है कि आज मैना भी चली जायेगी तो मिट्ठू भी मेरी तरह अकेला होगा। मैं तो यह सोच कर ही रोमांच से भर गई हूँ।

जब गुलाबो ने बताया था कि मिट्ठू रोज़ रात को मैना को फ़ोन करेगा और फ़ोन पर आपस में बातें करते हुए दोनों मुट्ठ मारेंगे तो समझो मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गई थी। एक बड़ा राज़ कितनी आसानी से मेरे हाथ लग गया था। आज मुझे लगा कि इन नौकरानियों को १००-२०० रुपये फ़ालतू या एडवांस देकर कितना बड़ा फायदा उठाया जा सकता है। गुलाबो मेरी जान तेरा बहुत बहुत शुक्रिया।

और फिर मैंने रात के टिच्च १० बजे अपने मोबाइल से मिट्ठू को फ़ोन लगाया। मैंने तो तुक्का ही मारा था। अब मुझे क्या पता था कि वो सचमुच ही मुट्ठ मार रहा था उस समय। बेचारे की हालत ही पतली हो गई थी। मैंने भी ऐसे ऐसे सवाल पूछे कि उसका तो सिर ही चकरा गया होगा। वो तो मेरा नाम ही पूछता रह गया। जब मैंने उस से पूछा कि उसने मैना की कभी गांड मारी है?

तो उसने शरमाते हुए बताया कि वो तो बहुत चाहता है पर मधु (मैना) नहीं मानती।

चूतिया है साला एक नंबर का। मैं तो कहती हूँ कि ऐसी मटकती गांड तो किसी भी कीमत पर मारे बिना नहीं छोड़नी चाहिए। फिर उसने मेरे साथ साथ ही मुट्ठ मारी और हम दोनों एक साथ ही झड़े थे। उसने मेरा नाम जानने कि बहुत कोशिश की पर मैंने फ़ोन काट दिया था। वो तो बस अंदाजा ही लगता रह गया होगा। मैं जानती हूँ वो दिन भर रात वाली बात को याद करके अपने लंड को सहलाता रहा होगा।

आज तो दिन भर मैं रात की तैयारी में ही लगी रही। सबसे पहले अपनी मुनिया को चकाचक बनाया और फिर पूरे शरीर पर गुलाबो से मालिश और उबटन लगवाकर, गुलाबजल मिले गर्म पानी से स्नान किया।
आज मैंने अपनी शादी वाला जोड़ा पहना था। गले में मंगलसूत्र, हाथों में लाल रंग की चूड़ियाँ, बालों में गज़रा और आँखों में कज़रा। पांवों में पायल और कानों में सोने की छोटी छोटी बालियाँ जैसी मैंने चूत की दोनों पंखुडियों पर भी पहनी हुई हैं। मैंने हाथों में मेंहंदी लगाई और पावों में महावर। मैं तो आज पूरी दुल्हन की तरह सजी थी जैसे कि मेरी सुहागरात हो।

पूरे कमरे में गुलाब की भीनी भीनी खुशबू और पलंग पर नई चादर, गुलाब की पंखुडियां पूरे बेड पर बिछी हुई और ४-५ तकिये। साइड टेबल पर एक कटोरी में शहद और गुलाबजल, ५-६ तरह की क्रीम, तेल, वैसलीन, पाउडर आदि सब संभाल कर रख दिया था। एक थर्मोस में केशर, बादाम और शिलाजीत मिला गर्म दूध रख लिया था।

आज तो पूरी रात हमें मस्ती करनी थी। और आज ही क्यों अब तो अगले ४ दिनों तक उस मिट्ठू को पूरा निचोड़ कर ही दम लूंगी। साले ने मुझे बहुत तड़फाया है गिन गिन कर बदला लूंगी।

और फिर वोही रात के ठीक १०.०० बजे :
हेल्लो !
हाय मैं बोल रही हूँ !
हेल्लो मधु ?
बिल्ली को तो ख़्वाबों में भी बस छिछडे ही नज़र आते हैं ?
क… कौन ??
ओह लोल… भूल गए क्या ? मैं तुम्हारी नई मैना बोल रही हूँ !
ओह.। हाय… आप कैसी हैं ?
बस तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही हूँ ?
मैं आ जाता हूँ पर तुम अपना नाम और पता तो बताओ ना ?

निरे लोल हो तुम क्या अब भी नहीं पहचाना ?
ओह..न.। नी.। नीरू आंटी ?
तुम्हे शर्म नहीं आती ?
क्. क. क्यों ?
मुझे आंटी कहते हो ?
ओह.। सॉरी पर मैं क्या कह कर बुलाऊं ?
मुझे सिर्फ नीरू या मैना कहो ?
ठीक है नीरुजी… आई मीन मैनाजी ?
सिर्फ मैना ?
ठीक है मेरी मैना मेरी बुलबुल !
मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ !
पर वो..गणेश भाई…?’
ओफो.। जल्दी करो ना उसकी चिंता छोडो वो यहाँ नहीं हैं।
ठीक है, मैं आता हूँ।

और फिर वो लम्हा आ ही गया जिसके लिए मैं पिछले २ महीनो से बेकरार थी। कॉल-बेल बजी तो मैं बेतहाशा दौड़ती हुई मेन-गेट तक आई। चूडीदार पायजामा और सिल्क का कुरता पहने मेरे सामने मेरा मिट्ठू, मेरा प्रेम, मेरा आशिक, मेरा महबूब, मेरे सपनों का शहजादा खड़ा था। मैं तो उस से इस कदर लिपट गई जैसे कोई सदियों की प्यासी कोई विरहन अपने बिछुडे प्रेमी से मिलती है।

मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपने जलते हुए होंठ उसके थरथराते हुए होंठों पर रख दिए। मैं तो उसे बेतहाशा चूमती ही चली गई। वो तो बस ऊँ…उन्नन. आआं. ही करता रह गया। अचानक मैंने उसके गालों पर अपने दांत गड़ा दिए तो उसकी चीख निकलते निकलते बची। उसने भी मुझे जोर से अपनी बाहों में कस लिया। यही तो मैं चाहती थी। आप शायद हैरान हो रही हैं। ओह. आपको बता दूं की अगर औरत अपनी तरफ से किसी चीज की पहल करे तो आदमी का जोश दुगना हो जाता है।

मैं भी तो यही चाहती थी कि वो आज की रात मेरे साथ किसी तरह की कोई नरमी ना बरते। मैं तो चाहती थी कि बस वो मेरे जलते बदन को पीस ही डाले और मेरा पोर पोर इस कदर रगड़े कि मैं अगले दो दिन बिस्तर से उठ ही ना पाऊं।

३-४ मिनट तक तो हम इसी तरह चिपके खड़े रहे। हमें तो बाद में ख़याल आया कि हमने कितनी बड़ी बेवकूफी की है ? जोश जोश में दरवाजा ही बंद करना भूल गए। हे भगवान् तेरा लाख लाख शुक्र है किसी ने देखा नहीं।

मैंने झट से दरवाजा बंद कर लिया और फिर दौड़ कर मिट्ठू से लिपट गई। उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने उसके गले में अपनी दोनों बाहें डाल दीं और उसके सीने से अपना सिर लगा दिया। मेरे उरोज उसके सीने से लग गए थे।

हाय राम उसके दिल की धड़कन तो किसी रेल के इंजन की तरह धक् धक् कर रही थी। उसके होंठ काँप रहे थे और उसकी तेज और गर्म साँसें तो मैं अपने सिर और चेहरे पर आसानी से महसूस कर रही थी। पर उस समय इन साँसों की किसे परवाह थी। वो मुझे गोद में उठाये ही बेडरूम में ले आया। हलकी दूधिया रोशनी, गुलाब और इत्र की मादक और भीनी भीनी महक और मेरे गुदाज़ बदन की खुश्बू उसे मदहोश करने के लिए काफी थी।

जैसे ही हम लोग बेडरूम में पहुंचे उसने मुझे धीरे से नीचे खड़ा कर दिया पर मैंने अपनी गिरफ्त नहीं छोड़ी। उसने मेरा सिर अपने दोनों हाथों के बीच में पकड़ लिया और थोड़ा झुक कर मेरे दोनों होंठों को अपने मुंह में भर लिया। आह… उसके गर्म होंठो का रसीला अहसास तो मुझे जैसे अन्दर तक भिगो गया। मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। वो तो उसे किसी रसीली कुल्फी की तरह चूसने लगा। मेरी आँखें बंद थी। उसने फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद ही मेल गई। कोई १० मिनट तक तो मैं और वो आपस में गुंथे इसी तरह एक दूजे को चूसते चूमते रहे।

मेरी मुनिया तो पानी छोड़ छोड़ कर बावली ही हुए जा रही थी। मैं जानती हूँ उसका पप्पू भी उसके पाजामे में अपना सिर धुन रहा होगा पर मैंने अभी उसे छुआ नहीं था। उसके हाथ जरूर मेरी पीठ और नितम्बों पर रेंग रहे थे। कभी कभी वो मेरे उरोजों को भी दबा देता था।

मैं उस से इस तरह चिपकी थी कि वो चाह कर भी मेरी मुनिया को तो छू भी नहीं सकता था। ऐसा नहीं था कि हम केवल मुंह और होंठ ही चूस रहे थे वो तो मेरे गाल, माथा, नासिका, गला, पलकों और कानो की लोब भी चूमता जा रहा था। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं कोई सदियों की तड़फती विरहन हूँ और बस आज का ये लम्हा ही मुझे मिला है अपनी प्यास बुझाने को। मैं भी उसके होंठ गाल और नाक को चूमती जा रही थी।

आप शायद सोच रही होंगी ये नाक भला कोई चूमने की चीज है ? ओह ! आप की जानकारी के लिए बता दूं जब कोई मर्द किसी लड़की या औरत को देखता है तो सबसे पहले उसकी नज़र उसके स्तनों पर पड़ती है और वो उन्हें चूसना और दबाना चाहता है। उसके बाद उसकी नज़र उसके होंठो पर पड़ती है। उसके होंठो को देखकर वो यही अंदाजा लगाता है कि उसके नीचे के होंठ भी ऐसे ही होंगे।

इसी तरह जब भी कोई लड़की या औरत किसी लडके या आदमी को प्रेम की नज़र से देखती है तो सबसे पहले उसकी नाक पर ही नज़र पड़ती है। एक और बात बताऊँ आदमी की नाक उसके अंगूठे के बराबर होती है और शायद आप मुश्किल से यकीन करें लगभग हर आदमी के लंड की लम्बाई उसके अंगूठे की लम्बाई की ३ गुना होती है। नाक और अंगूठा चूसने और चूमने का यही मतलब है कि उसके अचतेन या अंतर्मन में कहीं ना कहीं ये इच्छा है कि वो उसके लंड को चूमना और चूसना चाहती है। नहीं तो भला लडकियां बचपन में अंगूठा इतने प्यार से क्यों चूसती हैं ?

ओह… कहीं आप यह तो नहीं सोच रही कि फिर मेरे पति का लंड केवल ३ इंच का ही क्यों है तो मेरी प्यारी पाठिकाओं सुनो इस दुनिया में कई अपवाद और अजूबे भी तो होते हैं ना ? नहीं तो फिर इस कुदरत, किस्मत, परमात्मा और सितारों के खेल को कौन माने ?

मैं भी क्या ऊल जुलूल बातें ले बैठी। कोई १० मिनट की चूमा चाटी के बाद हम अपने होंठ पोंछते हुए अलग हुए तो मैंने देखा कि उसका पप्पू तो ऐसे खड़ा था जैसे पाजामे को फाड़ कर बाहर निकल आएगा। मैं तो उसे देखने के लिए कब से तरस रही थी। और देखना ही क्या मैं तो सबसे पहले उसकी मलाई पीना चाहती थी।

वो मेरे सामने खड़ा था। मैं झट से नीचे बैठ गई और उसके पाजामे का नाड़ा एक ही झटके में खोल दिया। उसने अंडरवियर तो पहना ही नहीं था। हे भगवान् लगभग ७ इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा गोरे रंग का पप्पू मेरी नीम आँखों के सामने था। मैंने आज तक इतना बड़ा और गोरा लंड नहीं देखा था। सुपाड़ा तो लाल टमाटर की तरह था बिलकुल सुर्ख आगे से थोड़ा पतला और उस पर एक छोटा सा काला तिल। मैं जानती हूँ ऐसे लंड और सुपाड़े गांड मारने के लिए बहुत ही अच्छे होते हैं। पर गांडबाज़ी की बात अभी नहीं।

मैं तो हैरान हुए उसे देखती ही रह गई। इतने में उसके लंड ने एक जोर का ठुमका लगाया तब मैं अपने खयालों से लौटी। मैंने झट से उसकी गर्दन पकड़ ली जैसे कोई बिल्ली किसी मुर्गे की गर्दन पकड़ लेती है। लोहे की सलाख की तरह एक दम सख्त १२० डिग्री पर खड़ा लंड किसी भी औरत को अपना सब कुछ न्योछावर कर देने को मजबूर कर दे।

मेरी मुट्ठी के बीच में फंसे उसके लंड ने २-३ ठुमके लगाए पर मैं उसे कहाँ छोड़ने वाली थी। मैंने तड़ से उसका एक चुम्मा ले लिया। उस पर आया प्री कम मेरे होंठों से लग गया। आह ! क्या खट्टा, नमकीन और लेसदार सा स्वाद था। मैं तो निहाल ही हो गई। उसने मेरा सिर पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगा।

मैं उसकी मनसा अच्छी तरह जानती थी। मैंने साइड टेबल पर पड़ी कटोरी से शहद और गुलाबजल का मिश्रण अपनी अंगुली से लगाकर उसके सुपाड़े पर लगा दिया और फिर उसे अपने होंठों में दबा लिया। उसने इतने जोर का ठुमका लगाया कि एक बार तो वो मेरे मुंह से ही फिसल गया। मैंने झट से उसे फिर दबोचा और लगभग आधे लंड को एक ही झटके में अपने मुंह में ले लिया।

जैसे ही मैंने उसकी पहली चुस्की ली मिट्ठू के मुंह से एक हलकी सी सीत्कार निकल गई। ओईई… नीरू… आं… मेरी मैना… मेरी बुलबुल… हाय…

मेरी मुंह की लार, शहद और उसके प्री कम का मिलाजुला स्वाद तो मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती। मुझे तो बरसों के बाद जैसे ये तोहफा मिला था। वैसे तो गणेश का लंड ३ इंच का है पर शुरू शुरू में उसकी भी खूब मलाई निकलती थी। पर अब तो उसके पल्ले कुछ नहीं रह गया है। पिछले २-३ सालों से तो मैं इस मलाई के लिए तरस ही गई थी।

ऐसा नहीं है कि मैं केवल लंड ही चूसे जा रही थी। मैंने उसकी दोनों गोलियों को एक हाथ से पकड़ रखा था। थी भी कितनी बड़ी जैसे कोई दो लीचियाँ हों। दूसरे हाथ से मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ रखा था। मिट्ठू ने मेरा सिर पकड़ कर एक धक्का मेरे मुंह में लगा दिया तो उसका लंड ५ इंच तक मेरे मुंह के अन्दर चला गया और मुझे खांसी आ गई। मैंने लंड बाहर निकाल दिया। मेरे थूक से लिपडा उसका लंड दूधिया रोशनी में ऐसे चमक रहा था जैसे कोई मोटा और लम्बा खीरा चाँद की रोशनी में चमक रहा हो।

मैंने अपने हाथ उसके लंड पर ऊपर नीचे करने चालू रखे। कुछ दम लेने के बाद मैंने उस पर फिर अपनी जीभ फिराई तो उसके लंड ने ठुमके लगाते हुए प्री कम के कई तुपके फिर छोड़ दिए। मुझे लंड चूसते हुए कोई १० मिनट तो जरूर हो गए थे। मिट्ठू मेरा सिर पकड़े था। वो धक्के लगाना चाहता था पर डर रहा था कि कहीं मुझे फिर खांसी ना आ जाए और मैं बुरा ना मान जाऊं।

मेरी मुनिया का तो बुरा हाल था। कोई और समय होता तो मैं एक हाथ की अंगुली उसमें जरूर करती रहती पर इस समय तो लंड चूसने की लज्जत के सिवा मुझे किसी चीज का होश ही नहीं था। मैंने उसकी गोलियों को फिर पकड़ लिया और अपने मुंह में भर लिया। एक हाथ से मैंने उसका लंड पकड़े हुए ऊपर नीचे करना जारी रखा। लंड इतनी जोर से अकड़ा कि एक बार तो मुझे लगा कि मेरे हाथ से ही छूट जाएगा। उसका तो बुरा हाल था। उसकी साँसे तेज चल रही थी और और वो पता नहीं सीत्कार के साथ साथ क्या क्या बड़बड़ाता जा रहा था।

मैं जानती थी कि वो अब झड़ने के करीब पहुँच गया है। मैंने उसकी गोलियों को छोड़ कर फिर लंड मुंह में ले लिया। अबकी बार मैंने उसे चूसा नहीं बस उस पर अपने जीभ ही फिराती रही। पूरी गोलाई में कभी अपने होंठों को सिकोड़ कर ऊपर से नीचे और कभी नीचे से ऊपर। उसने मेरा सिर जोर से दबा लिया और थोड़ा सा धक्का लगाने लगा।

मैं जानती थी उसकी मंजिल आ गई है। मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ लिया और कोई ३-४ इंच मुंह में लेकर दूसरे हाथ से उसकी गोलियों को कस कर पकड़ लिया और एक लम्बी चुस्की लगाईं तो उसकी एक जोर की चीख सी निकल गई। मैंने उसका सुपाड़ा अपने दांतों से हौले से दबाया तो वो थोड़ा सा पीछे हुआ और उसके साथ ही पिछले १५-२० मिनट से कुबुलाते लावे की पहली पिचकारी मेरे मुंह और ब्लाउज पर गिर गई।

मैंने झट से उसका लंड अपने मुंह में भर लिया और फिर उसकी पता नहीं कितनी पिचकारियाँ मेरे मुंह में निकलती ही चली गई। आह.। इस गाढ़ी मलाई के लिए तो मैं कब की तरस रही थी। मैं तो उसे गटागट पीती चली गई।

मिट्ठू बड़बड़ा रहा था, ‘आह ! मेरी नीरू ! मेरी रानी ! मेरी बुलबुल मेरी मैना… आः तुमने तो मुझे… आह… निहाल ही कर दिया… ओईईई…’ और उसके साथ ही उसने बची हुई २-३ पिचकारियाँ और छोड़ दी। मैं तो उसकी अंतिम बूँद तक निचोड़ लेना चाहती थी। अब तो मैंने इस अमृत की एक भी बूँद इधर उधर नहीं जाने दी। कोई ४-५ चम्मच गाढ़ी मलाई पीकर मैं तो जैसे निहाल ही हो गई। जब उसका पप्पू कुछ सिकुड़ने लगा तो मैंने उसे आजाद कर दिया और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उठ खड़ी हुई।

मिट्ठू ने मेरे होंठ चूम लिए। मैंने भी अपने होंठों से लगी उस मलाई की बूंदे उसके मुंह में डाल दी। उसे भी इस गाढ़ी मलाई का कुछ स्वाद तो मिल ही गया। फिर मैंने उसे परे कर दिया। मैंने उसकी आँखों में झाँका। अब वो इतना भी लोल नहीं रह गया था कि मेरी चमकती आँखों की भाषा न पढ़ पाता। मैं तो उस से पूछना चाहती थी क्यों ? कैसा लगा ?

शायद उसे मेरी मनसा का अंदाजा हो गया था। उसने कहा, ‘मेरी रानी मज़ा आ गया !’

‘मुझे मैना कहो ना ?’

‘ मेरी मैना थैंक्यू ‘ और एक बार उसने मुझे फिर अपनी बाहों में भर कर चूम लिया।

‘ठहरो..’
‘क्या हुआ?’

मैंने उसकी ओर अपनी आँखें तरेरी ‘ देखो तुमने ये क्या किया ?’

‘क क्.. क्या ?’

‘अपनी मलाई मेरे कपड़ो में भी डाल दी। तुम भी एक नंबर के लोल हो। कभी उस मैना को ऐसे नहीं चुसवाया ?’

‘ओह… सॉरी !’

आगे की कहानी के लिए भाग-२ की प्रतीक्षा करें !

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