बचपन की दोस्त से मुलाक़ात और चुदाई- 1

(Desi Sexy Ladki Chudai Kahani)

धीरज 90 2024-03-15 Comments

देसी सेक्सी लड़की चुदाई कहानी मेरी पुरानी क्लासमेट के साथ सेक्स की है. मैं कई साल बाद उससे मिला. उसकी शादी हो चुकी थी. हम दोनों पुनः दोस्त बन गए और बात सेक्स तक गयी.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम धीरज है और मैं 30 साल का हूँ.
मैं नागपुर महाराष्ट्र से हूँ. मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ.

यह कहानी मेरी बचपन की सहेली की है, जिसे मैंने उसे उसके शादी के बाद चोदा था.

अब आपका ज्यादा वक्त न लेते हुए सीधे देसी सेक्सी लड़की चुदाई कहानी पर आता हूँ.
पहले मैं आपको मेरी बचपन की सहेली के बारे में बता दूँ.

उसका नाम कल्याणी है. शादी से पहले वह दिखने में कोई ज्यादा खूबसूरत नहीं थी, मतलब सामान्य सी लड़की थी.
उसके घर वालों ने उसकी शादी भी जल्दी कर दी थी.

यह बात कोरोना काल की है. अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर आयी थी, जिसमें भारत में बहुत भारी नुकसान हुआ था.
उस समय ऑक्सीजन की कमी हर जगह पर थी. लोगों को अस्पताल में बेड तक नहीं मिल रहे थे.

लॉकडाउन की वजह से बाहर निकलने को भी मना किया गया था.
इसी बीच मेरे एक दोस्त का मेरे पास फ़ोन आया कि उसके पिता की कोरोना से हालत खराब हो गई है.

मैं ज्यादा समय न लेते हुए सीधा उसके बताए हुए अस्पताल में उसके पिताजी को देखने पहुंच गया.
उसी वक़्त मैंने कल्याणी को वहां देखा.
मैं छह साल के बाद उसको देख रहा था.

दोस्तो क्या बताऊं आपको, शादी के बाद वह तो बला की खूबसूरत लग रही थी.
उसके उठे हुए स्तन, गदराया हुआ शरीर देख कर मैं एकदम उसी के सौन्दर्य में खो सा गया था.

तभी मेरे दोस्त ने आवाज लगाई.
मैं उसके पिताजी को देखने चला गया.

उनसे मिलने के बाद मैं कल्याणी को देखने नीचे के सेक्शन में आया.
मुझे वहां देख कर उसे भी अचंभा हुआ.

वह मुस्कुराती हुई मेरी तरफ आने लगी.
हम दोनों ने अपना अपना हाल-चाल पूछा और बताया.
फिर मैंने उससे पूछा- तू यहां कैसे?

उसने बताया कि उसके पति को कोरोना हुआ है और वे आईसीयू में भर्ती हैं.
इतना बताती हुई वह रूआंसी सी हो गई.

मुझे तो लग रहा था कि उसको उसी वक्त गले से लगा कर शांत करूँ.
पर कोरोना का समय था तो किसी को छूना भी सही नहीं था.

मैंने उससे कहा- सब ठीक हो जाएगा, तू टेंशन मत ले.
फिर उसका मोबाइल नंबर लेकर मैं वहां से चला गया.

घर आकर मैं उसके बारे में सोचता रहा और उस रात मैंने उसके नाम की मुठ भी मारी.

दूसरे दिन मैंने उसको कॉल करके उसके पति का हाल-चाल पूछा.

उसने रोते सुबकते हुए कहा- वैसे तो वे ठीक हैं लेकिन डॉक्टर ने रेमडीसीवीर इंजेक्शन मंगवाया है … जो यहां उपलब्ध नहीं है. तू कहीं से ला सकता है क्या?
मैंने मना नहीं किया और अपने दोस्तों से पूछा.
हालांकि सबने ना में ही जवाब दिया.

फिर एक आखिरी कोशिश में मुझे वह इंजेक्शन मिल गया जिसके लिए मुझे 45 हजार रुपए खर्च करना पड़े.
मैंने कल्याणी को कॉल की और बताया कि इंजेक्शन मिल गया है; मैं उसे लेकर आ रहा हूँ.

मैं अस्पताल पहुंचा और उसे इंजेक्शन देकर मैं वहां से जाने लगा.
कल्याणी ने मुझे रोका और धन्यवाद कहा.

फिर दिन निकलते गए.
हम एक दूसरे के साथ व्हाट्सप्प पर बात करने लगे.

अब उसके पति की तबियत भी ठीक हो गई थी.
पर कल्याणी ने बताया कि उसको बहुत ज्यादा खर्च करना पड़ा जिसमें उसे अपने गहने भी बेचने पड़े.

मैंने उससे कुछ नहीं कहा, बस समझाया कि जान है तो जहान है. गहने आदि से ज्यादा मोल जान का होता है.
वह भी मेरी बात से सहमत थी.

उस दौरान न ही मैंने और न ही उसने रेमडीसीवीर के पैसों की बात की.

इसके बाद दीवाली आ गई.

एक दिन अचानक से मुझे कल्याणी का कॉल आया और उसने मुझे उस इंजेक्शन के पैसे के बारे में पूछा.

मैंने भी बोल दिया कि हां वह 45 हजार में मिला था.

उसने कहा कि उतने पैसे तो मेरे पास अभी नहीं है. मैं तुम्हें थोड़ा थोड़ा करके दे दूंगी.
मैंने उससे कहा कि तुम पैसे के बारे में इतना मत सोचो!

इसके बाद उसने कहा- मुझे तुमसे एक बार मिलना है.
मैंने भी उससे मिलने की इच्छा जताई और हम दोनों मिलने का वक़्त तय किया.

हम दोनों एक रेस्तरां में मिलने पहुंच गए.
कल्याणी को इस तरह अकेले मिलने से मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा था.
शायद वह भी इसी हालत की शिकार थी.

हालचाल पूछने के बाद मैंने उससे कॉफ़ी के लिए पूछा.
उसने हां कह दिया.

दोनों में बातचीत हुई, पुरानी बातें निकलीं.
फिर मैंने उससे बातों बातों में कह दिया कि तुझे पता था कि मैं बचपन में तुझे चाहता था.

उस पर उसने कहा- हां, मुझे पता था … पर मेरी शादी जल्दी हो गयी. इस वजह से मैं तुझे भूल गयी थी लेकिन किस्मत में हमारा मिलना था, तो हम मिल गए.

तभी वेटर कॉफी ले आया.
वेटर की गलती से सर्व करते समय कल्याणी के कपड़ों पर कॉफी गिर गयी जिससे उसके कपड़े खराब हो गए.

मैंने उससे कहा- इधर पास में ही मेरी बुआ का खाली फ्लैट है. तुम चाहो तो साफ करने के लिए मेरे साथ वहां चल सकती हो.

वह बोली- फ्लैट खाली क्यों है?
मैंने कहा- आजकल बुआ फूफा जी अपने बेटे के पास कनाडा गई हुई हैं.

वह बोली- तो चाभी क्या तुम्हारे पास रहती है?
मैंने कहा- नहीं, पर बुआ अपने फ्लैट की चाभी उधर ही बाहर छिपा कर रख गई हैं. मुझसे उन्होंने चाभी ले जाने के लिए कहा भी था पर मैं भूल गया था. चलो, चाभी मिल जाएगी.

उसने हामी भर दी.

मैं उसे फ्लैट पर लेकर आया.

चाभी बाहर ही एक गमले की मिट्टी में गाड़ कर छिपाई हुई थी.

मैंने चाभी निकाली और उसे अन्दर ले गया.

अन्दर लाकर मैंने उसे बाथरूम दिखाया और खुद हॉल में उसका इंतजार करने लगा.

वह खुद को साफ करके बाहर आ गयी.
उस वक्त वह बला की खूबसूरत लग रही थी.

ऐसा लग रहा था कि उसे वहीं पटक कर चोद दूँ.
लेकिन मैंने अपने आप को काबू में रखा.
मैं कोई जोर जबरदस्ती नहीं करना चाहता था.

वह फ्लैट की तारीफ करने लगी और पूछने लगी कि बुआ कब वापस आएंगी.
मैंने कहा- वे कम से कम दो महीने बाद आएंगी. कोरोना के कारण उनका वीजा क्लियर हो पाना जल्दी संभव नहीं है. हो सकता है कि वे कनाडा में ही रुकी रहें.

कुछ देर बाद हम दोनों वहां से निकले और अपने अपने घर चल दिए.
फ्लैट की चाभी मैं अपने साथ ले आया.

उस रात हमारी बहुत सी बातें हुईं.
बातों बातों में उसने उस फ्लैट के बारे में कुछ ज्यादा ही पूछा.
मैं उसका इशारा समझ गया था.

अगले ही पल मैंने उसे उस फ्लैट में अकेले मिलने के लिए पूछा.
उसने झट से हामी भी भर दी.

हमारे मिलने का दिन तय हुआ.

मैंने उससे कुछ सेक्सी बातें करना शुरू कर दीं क्योंकि अब वह खुद से ही ऐसी बातें करना चाहती थी.

बातों बातों में मैंने उसकी ब्रा का साइज पूछ लिया.
उसने मुझे 32D बताया.

दूसरे दिन मैं एक जॉकी के शोरूम में गया.
वहां से एक काले रंग की पैडेड ब्रा और पैंटी खरीद ली.

फिर मैं मिलने वाले दिन का इंतजार करने लगा.

जब इंतजार खत्म हुआ तो मैं कल्याणी को लेकर उस फ्लैट में पहुंचा.

फ्लैट काफी दिनों से बन्द था इसलिए मैंने पहले ही एक बंदा भेज कर कमरा साफ करवा दिया था.

आते ही मैंने कल्याणी को अपनी बांहों में पकड़ लिया.
उसने भी मेरा भरपूर साथ दिया.

हम इस तरह से लिपटे थे जिससे ऐसा लग रहा था कि कोई नाग नागिन एक दूसरे से लिपट गए हों.

उसके शरीर के एक एक अंग को मैंने अपने हाथ से टच किया.
फिर मैंने उसे वह ब्रा पैंटी वाला गिफ्ट दिया और चेंज करने को बोला.

जब वह कपड़े बदलकर आयी तो वह मेरे लिए भी एक अचंभा था.
वह सुखद पल मुझे बेहद सनसनी दे रहा था.

कल्याणी अपने साथ एक काले रंग की सिल्क की नाईटी लाई हुई थी जिसमें वह कमाल की माल लग रही थी.
उसको देख कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया.

मैंने कल्याणी के पास जाकर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे बेतहाशा चूमने लगा.

वह भी मेरा भरपूर साथ देने लगी.
ऐसा लग रहा था, जैसे वह काफी दिनों की भूखी हो.

फिर मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया और बेडरूम के अन्दर बेड पर ले जाकर लिटा दिया.
उसको अपने लंड की ओर इशारा करके लंड मुँह में लेने को कहा.

पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे जोर देने पर वह मान गयी.

मैंने अपना 6 इंच का लंड बाहर निकाला और कल्याणी के मुँह में दे दिया.
उसने लंड को किसी लॉलीपॉप की तरह चूसा.

मैं उस समय सातवें आसमान में था.

करीब 5 मिनट तक लंड चुसवाने के बाद मैंने उसकी नाइटी को निकाला.
कल्याणी काली पैडेड ब्रा और काली पैंटी में किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थी.

उसके दोनों स्तन उसकी ब्रा से मुझे झाँकते हुए नजर आ रहे थे.

मैंने तुरंत आगे बढ़ कर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसके स्तनों को आज़ाद कर दिया.
बड़ी ही मादक हसीना सी दिखने वाली कल्याणी को यूं देख कर मुझसे रुका न गया.

मैं उसके एक स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को मसलने व सहलाने लगा.

धीरे धीरे चूचियों से खेल करते हुए मैं उसकी चूत की तरफ आ गया.
मैंने उसकी पैंटी को एक झटके में ही उतार फेंका.

अब उसकी चिकनी चूत मेरे सामने नंगी हो गई थी.
उसकी चूत की खुशबू मुझे मदहोश किए जा रही थी.

मैंने ज्यादा देर न करते हुए उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
कल्याणी की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

कुछ मिनट तक चूत चाटने के बाद उसकी चूत से पानी आ गया.
मैंने उसके पानी को चाट कर साफ कर दिया.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और एक धक्का दे मारा.

कल्याणी दर्द से थोड़ा कराह उठी.
काफी दिनों से उसकी चूत चुदी नहीं थी.

फिर मैंने थोड़ा थूक लगाया और लंड एक झटके में ही उसकी चूत में पेल दिया.
वह कराह उठी मार जल्द ही हम दोनों मजा लेने लगे.

अब हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई.
दस मिनट तक लगातार धक्कों के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

हालांकि मेरे लौड़े में अभी बहुत कुछ बाकी था.

मैंने उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख दिया और लंड को अन्दर बाहर करने लगा.
मुझे रसभरी चूत में शंटिंग करने में बहुत मजा आ रहा था.
वह भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी.

बीच बीच में वह मुझे कह रही थी- आह … तेज तेज चोदो मुझे … धीरज और तेज चोदो मेरे राजा. मैं महीनों से प्यासी हूँ.

सच में वह देसी सेक्सी लड़की बहुत दिनों से प्यासी थी.
उसके पति ने बीमारी के बाद से उसे चोदा ही न था.

अब मैं भी उसको जोर जोर से चोद रहा था.
कुछ ही देर में मेरा भी माल निकलने को था.

मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी.
करीब 5 मिनट की और चुदाई के बाद मैंने अपना सारा वीर्य कल्याणी की चूत में छोड़ दिया और हम दोनों एक दूसरे से चिपके निढाल होकर पड़े रहे.

थोड़ी देर बाद मैंने उसको उठाया और बाथरूम में ले जाकर उसकी चूत साफ करने लगा.

उसी समय मेरा लंड पुन: खड़ा हो गया और बाथरूम में ही हम दोनों ने एक बार और चुदाई की.

उस बाथरूम चुदाई में मैंने कल्याणी को घोड़ी बना कर चोदा और उसकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया.
इस तरह दो बार की चुदाई से हम दोनों सन्तुष्ट हो गए और कुछ देर बाद घर को चल दिए.

कल्याणी की गांड की चुदाई कैसे हुई, ये मैं अपनी अगली सेक्स कहानी में आपको बताऊंगा.

मेरी देसी सेक्सी लड़की चुदाई कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताइएगा.
[email protected]

देसी सेक्सी लड़की चुदाई कहानी का अगला भाग: बचपन की दोस्त से मुलाक़ात और चुदाई- 2

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