मेरा गुप्त जीवन- 83

(Mera Gupt Jeewan-83 Baalsakhi Ki Chut Chudai)

यश देव 2015-10-20 Comments

This story is part of a series:

बालसखी की चूत चुदाई

मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न पूनम? सच बोलना?
पूनम भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी। कम्मो दीदी देना ज़रा अपनी कैंची, मैं काट ही देती हूँ इस साले को! ना होगी यह लण्डी न बजेगी चूती।

पूनम गुस्से में कैंची ढून्ढ रही थी और मैं अब वाकयी में ही डर कर भाग रहा था और पूनम मुझ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। और इस भागा भागी में ना जाने कब मैंने पूनम को पकड़ लिया और उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके लबों पर एक हॉट किस जड़ दी।
उसने भी किस का जवाब किस से दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर उसके संग खेलने लगी।
मैं भी उसके गोल सॉलिड मम्मों को हाथ से मसलने लगा और एक हाथ उसकी काले बालों से ढकी चूत पर रख दिया, ऊँगली से चूत को टटोला तो बहुत ही पनिया रही थी।

फिर मैं ने पूनम को लबों पर एक हॉट चुम्मी दी जिसमें मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर उसकी जीभ के साथ दंगा कर रही थी।
कम्मो भी पूनम के पीछे खड़ी होकर उसके गोल मोटे चूतड़ों को प्यार से सहला रही थी।
पूनम भी बार बार अपनी चूत को मेरे लंड से छू रही थी और मेरे लंड की टिप को चूत में छुपे भग से रगड़ रही थी, साथ ही अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी।

अब कम्मो हम दोनों के बीच खड़ी होकर हम दोनों को टाइट जफ्फी डाल रही थी, पूनम अब तकरीबन मेरे से पूरी तरह चिपकी हुई थी। कम्मो के इशारे पर मैंने उसको उठा लिया अपने दोनों हाथों में और लंड को उसकी उभरी चूत के मुंह पर रख कर एक दो चक्कर कमरे के लगा आया और इस दौरान पूनम का मुंह मेरे मुंह से चिपका हुआ था और हम एक दूसरे को बहुत ही कामातुर चुम्बन देने में लगे हुए थे।

पूनम ने अपनी कमर को थोड़ा सा धक्का दिया और लंड एकदम गीली और पनियाई चूत में प्रवेश कर गया।
कम्मो ने कहा- क्या गृह प्रवेश हो गया? छोटे मालिक बधाई हो आपका ‘इत्ता’ सा पूनम की ‘उत्ती’ सी में चला गया।
मैं बोला- देखिये, ध्यान से देखिए, दो दोस्त एक दूसरे को खूब चोद रहे हैं।

और यह कह कर मैंने पूनम को पलंग की साइड में लिटा दिया और आप खड़ा होकर उसकी चूत में लंडा लंड धक्के मारने लगा।
पूनम की गोरी टांगें मेरी कमर के इर्द गिर्द हो रही थी, पूनम बहुत गर्म हो चुकी थी सो कुछ ही क्षण में धराशायी होने के लक्षण दिखाने लगी, उसकी दोनों टांगें जो मेरी कमर के इर्द गिर्द थीं, वो उन को दबा कर मेरी कमर का हिलना डुलना रोक रही थी।
जब वो छूटी तो उसकी टांगों ने मेरा घेराव पक्की तरह से कर दिया था।

वो फिर ज़रा सम्भली तो मैंने उसको बिस्तर पर पूरा लिटा दिया और खुद जल्दी से उसकी चौड़ी हुई टांगों में घुस कर अपना लौड़ा फिर उसकी चूत के हवाले कर दिया।

कम्मो भी मेरे पीछे बैठे हुई थी पलंग पर और मेरे और पूनम को पूरी मदद दे रही थी।
अब मैंने पारम्परिक आसन में पूनम की चुदाई शुरू कर दी यानि वो बिस्तर में लेटी थी और मैं उसके ऊपर लेटा था और लंड मेरा अंदर चूत में समाया था और उसकी गोल टांगें हवा में लहरा रही थी।
प्रतिद्वंदी की आँखें बंद थी, मुँह ज़रा सा खुला था और सांस ज़ोर से चल रही थी।

लेकिन मेरा लंड भी बड़ा बेरहम बना हुआ चुदाई चूत की मर्ज़ी के अनुसार कर रहा था न वो मेरी सुन रहा था न वो पूनम की सुन रहा था।
बस लगा था धक्कम पेल में और चोद रहा था ऐसे कि जैसे हम बैठे हों रेल में!
धीरे से पूरा नाभि तक अंदर डाल कर फिर उसी तरह से धीरे से निकलना उसका चूत के मुंह तक, और फिर यही खेल दुबारा और कितनी बार और लेकिन फिर जब चूत कहने लगे माशाअल्लाह क्या सोच सोच कर चोद रहा है बे? जल्दी कर साले।

मैं बीच में धक्कम पेल छोड़ कर मुम्मों को चूसना और चूचियों को गोल गोल मुंह में घुमाना भी कर रहा था।
अब पूनम ने अपनी कमर ऊपर उठा कर मुझको इशारा किया कि जल्दी करो तो मैं फिर शुरू हुआ तेज़म तेज़ धक्का धक्की में और अपने हाथों को उसके गोल सॉलिड चूतड़ों के नीचे रख कर ऐसी ज़ोर से शुरू कर दी पेलमपेल कि पूनम आनन्द में अपना सर इधर से उधर हिलाने लगी और मुंह सी आअह्हह ऊऊहहह के स्वर अपने आप निकलने लगे!

चंद मिनटों में पूनम अपनी दोनों बाँहों मेरे गले में डाल कर और टांगों को मेरी कमर में लपेट कर मेरे धक्कों को सहन करती हुई यह जा और वो जा हो गई, उसका मुंह मेरे मुंह से चिपक गया और चूतड़ मेरे लौड़े से चिपक गए।
यह देख कर कम्मो ने ताली बजाई और कहा- वाह छोटे मालिक, क्या खूब चोदा है अपनी बचपन की फ्रेंड को!

पूनम के कान के पास अपना मुंह ले जा कर कम्मो ने पूछा- अभी और आये लंडम प्रसाद या फिर थोड़ी देर ठहर के?
पूनम ने दबी ज़बान से कहा- अभी और नहीं और रात में फिर कभी नहीं।

मैं यह सुन कर हट गया पूनम के ऊपर से और अपना गीला और अकड़ा लंड निकाला और कम्मो की चूत में डाला।
कम्मो ने कहा- छोटे मालिक, आप मेरे नीचे आ जाओ अब मुझ को मेहनत करने दो आप तो थक गए होंगे।
यह कर कम्मो मेरे ऊपर आ गई और मेरा गीला लंड उसने झट से अपनी चूत में डाल लिया।

पूनम अधखुली आँखों से यह सब देख रही थी लेकिन मैंने आँखें बंद कर लीं और कम्मो को मेहनत करने दी।
जब देखा कि पूनम को शायद नागवार लगा है तो मैंने अपना दायाँ हाथ बढ़ा कर उसको अपने नज़दीक कर लिया और उसके मोटे मुम्मों से खेलने लगा और साथ ही उसके मुंह से मुंह जोड़ कर उसको चूमने लगा।

उधर कम्मो अपनी ही धुन में मुझको कभी धीरे और कभी तेज़ ऊपर से चोद रही थी।
जब कम्मो ने देखा कि पूनम शायद बुरा मान रही है तो उसने भी पूनम की चूत में उंगली डाल कर उसके भग को सहलाना शुरू कर दिया और जब वो थोड़ी सी गरम हुई तो कम्मो बोली- पूनम, मैं नीचे आती हूँ, तुम आ जाओ और चुदा लो छोटे मालिक से!

पूनम बोली- नहीं नहीं कम्मो दीदी, आप लगे रहो, मुझको ज़रा भी बुरा नहीं लगा है।
कम्मो तब बोली- छोटे मालिक आप ज़रा रुको मैं नीचे आती हूँ और आप मुझको ऊपर से धीरे धीरे ही चोद दो!
यह कह कर कम्मो नीचे आ गई और मैं कम्मो के ऊपर चढ़ गया।
तब कम्मो ने पूनम से कहा- तुम अपनी चूत को मेरे मुंह पर रख दो।

पूनम उठ कर टांगों के सहारे बैठ गई और उसकी चूत कम्मो के मुंह पर आ गई।
अब कम्मो ने नीचे से पूनम की चूत को चूसना शुरू किया और थोड़ी देर में उसके भग को चूस रही ही थी कि पूनम एकदम अकड़ गई और ऐसा लगा कि वो झड़ गई और वो कम्मो के ऊपर से उठने लगी लेकिन कम्मो ने उसको रोक दिया।

उधर मैं ऊपर से कम्मो को धीरे धीरे चोद रहा था और उसकी गीली चूत को चोदने में बहुत आनन्द आ रहा था। पूनम की चूत को कम्मो अभी भी चाट रही थी, पूरी जीभ गोल कर के अंदर डाल रही थी या फिर उसकी भग को चूस रही थी और पूनम को अब फिर से बहुत मज़ा आना शुरू हो गया था।
मेरी चुदाई से और पूनम की चूत चुसाई से कम्मो भी जल्दी ही झड़ गई।

फिर हम तीनों बिस्तर पर लेट गए।
थोड़ी देर आराम करने के बाद पूनम बोली- अब मैं अपने कमरे में जाती हूँ।
मैंने पूनम को रोक लिया- मित्रवर कहाँ जा रहे हो?
पूनम बोली- अपने कमर्वा में जात रहीं।
मैं बोला- काहे जात हो, यहीं सोवत नाहीं का?
पूनम बोली- नहीं न, तुम डिस्टर्ब्वा होगे ना?
मैं बोला- डिस्टर्ब्वा? अभी चुदायन का मज़ा आवत रहिंन और अभो ही ससुर तुम चल पड़े. यही तो कतई ठीक नाही है रे?

यह सुन कर कम्मो और पूनम ज़ोर ज़ोर से हंस पड़ी, हमने हाथ पकड़ कर पूनम को अपने बिस्तर पर लिटा लिया।
हम तीनो एक साथ ही सो गए, एक तरफ पूनम थी और दूसरी तरफ कम्मो।

रात को मैं काफी बार उन दोनों पर चढ़ा था लेकिन यह याद नहीं किस पर कितनी बार!
सुबह जब नींद खुली तो मैं सिर्फ पूनम के साथ नंगा ही सोया था और पूनम भी पूर्ण रूप से नग्न ही थी।

कुछ देर में उसकी चूत के काले बालों से खेलता रहा और फिर उसके मम्मों को चूसने लगा उसकी चूत को हाथ लगाया तो वह काफी गीली हो रही थी।
मैं उस पर चढ़ने की सोच ही रहा था कि इतने में कम्मो चाय के कप ले कर आ गई और मुझको पूनम पर चढ़ने के लिए तैयार होते देख कर बोली- छोटे मालिक, आप तो कभी कभी कमाल ही कर देते हो. बेचारी पूनम पर आप रात में कम से कम 4 बार चढ़े थे और मेरे ऊपर 3 बार और अभी भी आप का मन नहीं भरा है?

मैं हैरान होकर बोला- हाँ, यह हो सकता है कम्मो रानी, क्यूंकि मेरा रात भर एक बार भी नहीं छूटा सो सारा माल तो मेरे अंदर ही जमा हो रहा है और वो मुझ को बार बार तुम सब को चोदने के लिए विवश कर देता है। मुझ को ऐसा लगता है जैसे मेरे लंड में हर वक्त खुजली होती रहती है और वो तभी शांत होती है जब मैं किसी लड़की पर चढ़ जाता हूँ जंगली सांड की तरह!

मैं यह बातें कर ही रहा था की पूनम की नींद खुल गई और वो मुझको और कम्मो को देख कर हैरान हो गई और अपने हाथ से अपने नंगे मम्मे और चूत को छिपाने की कोशिश करने लगी।
मैं बोला- पूनम बेबी रहने दो, हम सब ने तुम्हारा सब कुछ देख रखा है, उठो और चाय पी लो यार!
पूनम मेरे को देख कर बोली- तुम्हारी इत्ती सी तो अभी भी खड़ी है क्या मुझ पर फिर हमला करने वाले थे तुम?
मैं हँसते हुए बोला- हाँ, करने वाला ही था कि कम्मो आ गई और तुम को मेरे पंजों से बचा लिया।

कम्मो बोली- पूनम, तुम को याद है कि कितनी बार इन्होंने तुम पर हमला किया है रात भर में?
पूनम बोली- पूरी तरह तो याद नहीं लेकिन शायद यह मुझ पर 3-4 बार चढ़ा है, मेरी चूत की तो दुर्गति हो गई होगी अब तक!
कम्मो हँसते हुए बोली- घबराओ नहीं, मैंने सुबह देख लिया था, तुम्हारी चूत सही सलामत है, हाँ थोड़ी सी सूजी हुई ज़रूर है।

पूनम रोने का मुंह बना कर बोली- ज़ालिम सोमू, तुम तो मुझको बर्बाद कर दोगे… उफ़ मेरी चूत? कम्मो दीदी मैं चल तो सकूंगी ना?
कम्मो हँसते हुए बोली- चल तो पाओगी लेकिन छोटे मालिक के सहारे की ज़रूरत पड़ेगी!
पूनम रूठते हुए बोली- कभी नहीं, सोमू का सहारा लेना मतलब कई बार चुदाना। कभी नहीं… सोमु का चोदना, चूत का सत्यानाश !!! उफ़ मेरी माँ!

पूनम चाय पीने का बाद कपड़े पहन कर जाने लगी तो मुड़ के मेरी तरफ देखने लगी और मुस्कराते हुए बोली- सोमू आज रात का प्रोग्राम कितने बजे शुरू होगा?
कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुम को हरा देगी।

कहानी जारी रहेगी।
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top